देश में सप्लाई बनाए रखने और कंपनियों का संतुलन साधने की कोशिश
आम उपभोक्ताओं के लिए टैक्स में कोई बदलाव नहीं
पश्चिम एशिया में बढ़ते युद्ध संकट और कच्चे तेल की आसमान छूती कीमतों के बीच केंद्र सरकार ने पेट्रोलियम कंपनियों के लिए नई टैक्स व्यवस्था लागू कर दी है। सरकार ने पेट्रोल के निर्यात पर पहली बार ₹3 प्रति लीटर विंडफॉल टैक्स लगाया है, जबकि डीजल और जेट फ्यूल (ATF) पर एक्सपोर्ट ड्यूटी में राहत दी गई है। सरकार का उद्देश्य घरेलू बाजार में पेट्रोल की पर्याप्त उपलब्धता बनाए रखना और तेल कंपनियों के मुनाफे के बीच संतुलन कायम करना है।
नई दिल्ली (ए)। अमेरिका-इजराइल और ईरान के बीच जारी तनाव का सीधा असर अंतरराष्ट्रीय तेल बाजार पर दिखाई दे रहा है। कच्चे तेल की कीमतें 73 डॉलर प्रति बैरल से बढ़कर 100 डॉलर के पार पहुंच गई हैं। ऐसे में निजी तेल कंपनियों को विदेशी बाजारों में ज्यादा मुनाफा नजर आने लगा था। केंद्र सरकार को आशंका थी कि कंपनियां घरेलू जरूरतों से ज्यादा तेल निर्यात कर सकती हैं, जिससे देश में सप्लाई प्रभावित हो सकती है।
पेट्रोल निर्यात अब होगा महंगा
सरकार ने पेट्रोल एक्सपोर्ट पर ₹3 प्रति लीटर का विंडफॉल टैक्स लागू कर दिया है। अब कंपनियों को विदेश भेजे जाने वाले पेट्रोल पर अतिरिक्त टैक्स चुकाना होगा। इससे कंपनियों के लिए विदेशी बाजार में पेट्रोल बेचना महंगा पड़ेगा और घरेलू बाजार में सप्लाई बढ़ाने का दबाव बनेगा।
डीजल और ATF पर राहत
सरकार ने दूसरी ओर डीजल और जेट फ्यूल (ATF) के निर्यात पर ड्यूटी घटाकर तेल कंपनियों को राहत दी है। डीजल पर एक्सपोर्ट टैक्स ₹23 से घटाकर ₹16.5 प्रति लीटर कर दिया गया है, जबकि ATF पर ड्यूटी ₹33 से घटाकर ₹16 प्रति लीटर कर दी गई है। माना जा रहा है कि इससे कंपनियों को निर्यात कारोबार में कुछ संतुलन मिलेगा।
आम लोगों पर क्या असर?
वित्त मंत्रालय ने स्पष्ट किया है कि नया टैक्स केवल निर्यात होने वाले पेट्रोल-डीजल पर लागू होगा। देश के भीतर बिकने वाले पेट्रोल और डीजल की टैक्स दरों में कोई बदलाव नहीं किया गया है। यानी इस फैसले से फिलहाल आम उपभोक्ताओं को सीधे राहत या अतिरिक्त बोझ नहीं पड़ेगा।
फिर पेट्रोल-डीजल महंगा क्यों हुआ?
सरकारी तेल कंपनियों ने शुक्रवार सुबह ही पेट्रोल और डीजल के दाम करीब ₹3 प्रति लीटर तक बढ़ाए थे। इसकी वजह अंतरराष्ट्रीय बाजार में महंगे कच्चे तेल की खरीद लागत बताई गई। बढ़ी हुई लागत का असर सीएनजी पर भी पड़ा और इसके दाम ₹2 प्रति किलो तक बढ़ा दिए गए।
क्या होता है विंडफॉल टैक्स?
विंडफॉल टैक्स वह अतिरिक्त कर होता है, जो सरकार किसी कंपनी को अचानक हुए असामान्य मुनाफे पर लगाती है। युद्ध, संकट या वैश्विक परिस्थितियों के कारण जब कंपनियों को बिना अतिरिक्त निवेश के भारी कमाई होने लगती है, तब सरकार उस लाभ का एक हिस्सा टैक्स के रूप में वसूलती है।
नॉलेज पार्ट: क्यों अहम है होर्मुज रूट?
होर्मुज जलडमरूमध्य ओमान और ईरान के बीच स्थित दुनिया का सबसे महत्वपूर्ण समुद्री तेल मार्ग माना जाता है। दुनिया का करीब 20 प्रतिशत कच्चा तेल इसी रास्ते से गुजरता है। पश्चिम एशिया में तनाव बढ़ने और इस मार्ग पर खतरे के कारण वैश्विक तेल सप्लाई प्रभावित हुई है, जिससे अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल की कीमतों में तेज उछाल आया है।