भिलाई में तीन स्थानों पर एक साथ कार्रवाई, दस्तावेजों और डिजिटल साक्ष्यों की गहन जांच जारी; 43 करोड़ के मुआवजा घोटाले से जुड़े तार खंगाल रही एजेंसी
भारतमाला परियोजना में कथित मुआवजा घोटाले की जांच अब नए मोड़ पर पहुंच गई है। प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने गुरुवार तड़के भिलाई में रिटायर्ड आईएएस अधिकारी जेके ध्रुव से जुड़े ठिकानों पर छापेमार कार्रवाई की। जांच एजेंसी की टीम दस्तावेजों, वित्तीय लेनदेन और डिजिटल रिकॉर्ड की पड़ताल कर रही है। माना जा रहा है कि कार्रवाई का संबंध भारतमाला परियोजना में हुए करोड़ों रुपये के भुगतान घोटाले से जुड़े तथ्यों की जांच से है।
दुर्ग-भिलाई। भारतमाला परियोजना के तहत सामने आए बहुचर्चित मुआवजा घोटाले की जांच में प्रवर्तन निदेशालय ने बड़ी कार्रवाई करते हुए भिलाई में तीन अलग-अलग स्थानों पर छापेमारी की है। इनमें रिटायर्ड आईएएस अधिकारी जेके ध्रुव का निवास भी शामिल है। ईडी अधिकारियों की टीम सुबह तड़के पहुंची और दस्तावेजों के साथ इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों की जांच शुरू की, जो देर तक जारी रही।

सूत्रों के अनुसार, जेके ध्रुव वर्तमान में सीजी-पीएससी भर्ती घोटाले के मामले में न्यायिक हिरासत में हैं। ऐसे में भारतमाला मामले में उनके संभावित संबंधों को लेकर जांच एजेंसियां विभिन्न पहलुओं की पड़ताल कर रही हैं। हालांकि, ईडी की ओर से कार्रवाई के संबंध में आधिकारिक जानकारी अभी सार्वजनिक नहीं की गई है।
जांच के केंद्र में रायपुर-विशाखापट्टनम आर्थिक कॉरिडोर के लिए भूमि अधिग्रहण के दौरान हुए कथित अनियमित भुगतान हैं। इस मामले में कारोबारी हरमीत सिंह खनूजा को प्रमुख आरोपियों में शामिल माना जा रहा है। जांच एजेंसियों को कथित तौर पर जमीन सौदों और मुआवजा राशि के लेनदेन से जुड़े कई महत्वपूर्ण सुराग मिले हैं, जिनके आधार पर कार्रवाई आगे बढ़ाई जा रही है।

ऐसे सामने आया करोड़ों का मुआवजा घोटाला
जांच में सामने आया है कि भूमि अधिग्रहण प्रक्रिया के दौरान कुछ भूखंडों को कृत्रिम रूप से छोटे-छोटे हिस्सों में विभाजित कर राजस्व अभिलेखों में नए नाम जोड़े गए। इसके बाद मुआवजा राशि का आंकलन बढ़ाकर करोड़ों रुपये का भुगतान प्रस्तावित किया गया। प्रारंभिक जांच में लगभग 43 करोड़ रुपये की वित्तीय अनियमितता की पुष्टि होने की बात सामने आई है।
राजस्व विभाग की रिपोर्ट के अनुसार, अभनपुर क्षेत्र के नायकबांधा और उरला गांवों में भूमि के रिकॉर्ड में बड़े पैमाने पर फेरबदल किया गया। करीब 80 नए नाम दर्ज कराकर मुआवजा राशि को कई गुना बढ़ा दिया गया। जिस भूमि का वास्तविक मुआवजा लगभग 29.50 करोड़ रुपये होना था, उसका भुगतान मूल्य बढ़कर 70 करोड़ रुपये से अधिक पहुंच गया।
मामले में पहले भी कई राजस्व और प्रशासनिक अधिकारियों पर कार्रवाई हो चुकी है। जांच एजेंसियां अब इस पूरे नेटवर्क में शामिल अन्य लोगों की भूमिका की भी पड़ताल कर रही हैं।
क्या है भारतमाला परियोजना
भारतमाला परियोजना केंद्र सरकार की महत्वाकांक्षी सड़क अवसंरचना योजना है, जिसके तहत देशभर में आर्थिक गलियारों का विकास किया जा रहा है। परियोजना का उद्देश्य माल परिवहन को तेज, सुगम और किफायती बनाना है। रायपुर-विशाखापट्टनम आर्थिक कॉरिडोर इसी योजना का महत्वपूर्ण हिस्सा है, जिसके लिए बड़े पैमाने पर भूमि अधिग्रहण किया गया था।