भारतीय उत्पादों पर 12.5% तक अतिरिक्त शुल्क लगाने का प्रस्ताव; ATF की कीमत ₹75.60 प्रति लीटर पर तय, ₹10,000 करोड़ का स्थिरीकरण फंड मंजूर
वैश्विक व्यापार और ऊर्जा क्षेत्र से जुड़ी दो बड़ी खबरों ने बुधवार को सुर्खियां बटोरीं। एक ओर अमेरिका ने भारत समेत 54 देशों पर जबरन मजदूरी से बने सामानों के आयात को रोकने में विफल रहने का आरोप लगाते हुए अतिरिक्त टैरिफ लगाने का प्रस्ताव रखा है, वहीं दूसरी ओर केंद्र सरकार ने विमानन क्षेत्र को राहत देने के लिए एविएशन टर्बाइन फ्यूल (ATF) की कीमतों पर कैप लगाने और ₹10,000 करोड़ के विशेष फंड को मंजूरी दी है।
नई दिल्ली (ए)। अमेरिका ने भारत सहित 54 देशों को ऐसी सूची में शामिल किया है, जिन पर जबरन मजदूरी से तैयार उत्पादों के आयात को प्रभावी ढंग से रोकने में नाकाम रहने का आरोप लगाया गया है। इस आधार पर अमेरिकी प्रशासन ने इन देशों से आने वाले सामानों पर 12.5 प्रतिशत तक अतिरिक्त कस्टम ड्यूटी लगाने का प्रस्ताव रखा है। इस मुद्दे पर भारत और अमेरिका के बीच व्यापार समझौते को लेकर नई दिल्ली में बातचीत भी जारी है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि प्रस्तावित अतिरिक्त शुल्क लागू होता है तो भारतीय निर्यातकों के लिए अमेरिकी बाजार में प्रतिस्पर्धा बनाए रखना चुनौतीपूर्ण हो सकता है। खासकर टेक्सटाइल, इंजीनियरिंग और श्रम-प्रधान उद्योगों पर इसका असर पड़ने की आशंका जताई जा रही है।
उधर, बढ़ती वैश्विक अस्थिरता और मिडिल ईस्ट में जारी तनाव के बीच केंद्र सरकार ने विमानन क्षेत्र को राहत देने के लिए महत्वपूर्ण फैसला लिया है। सरकार ने ₹10,000 करोड़ के एविएशन टर्बाइन फ्यूल (ATF) प्राइस स्टेबलाइजेशन फंड को मंजूरी प्रदान की है। इसके साथ ही घरेलू उड़ानों के लिए ATF की कीमत ₹75.60 प्रति लीटर पर निर्धारित कर दी गई है।
सरकार का मानना है कि इस कदम से एयरलाइंस कंपनियों पर बढ़ते ईंधन खर्च का दबाव कम होगा और हवाई किरायों में अनावश्यक बढ़ोतरी को रोका जा सकेगा। साथ ही तेल विपणन कंपनियों और यात्रियों को भी राहत मिलने की उम्मीद है।
इन दोनों घटनाक्रमों को भारत की अर्थव्यवस्था और व्यापारिक गतिविधियों के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है। जहां एक ओर अमेरिकी टैरिफ प्रस्ताव भारतीय निर्यात क्षेत्र के लिए नई चुनौती बन सकता है, वहीं ATF कीमतों पर नियंत्रण का फैसला घरेलू विमानन उद्योग को स्थिरता प्रदान करने की दिशा में बड़ा कदम माना जा रहा है।