21 निर्माण अनुबंधों में गड़बड़ी का दावा, 16.85 लाख रुपए के कथित अतिरिक्त भुगतान पर विवाद; इंजीनियरों ने जांच प्रक्रिया को दी चुनौती
दुर्ग-भिलाई। पेवर ब्लॉक निर्माण कार्यों में कथित वित्तीय अनियमितताओं को लेकर नगर निगम के अभियंताओं के खिलाफ शुरू हुई कार्रवाई फिलहाल थम गई है। छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने दुर्ग कलेक्टर के वसूली और कार्रवाई संबंधी पत्र तथा निगम के मुख्य अभियंता की ओर से जारी कारण बताओ नोटिस पर अगली सुनवाई तक रोक लगा दी है। संबंधित इंजीनियरों ने अदालत में दलील दी कि जांच के दौरान उनका पक्ष सुने बिना ही उनके खिलाफ कार्रवाई की प्रक्रिया शुरू कर दी गई। मामले की अगली सुनवाई 9 दिसंबर को होगी।
जांच में 21 अनुबंधों पर दर्ज की गई आपत्ति
नगर निगम भिलाई में वर्ष 2023-24 के दौरान कराए गए पेवर ब्लॉक निर्माण कार्यों के 29 अनुबंध जांच के दायरे में आए थे। जांच प्रतिवेदन में इनमें से 21 अनुबंधों में दर्ज निर्माण की मात्रा और स्थल पर वास्तविक स्थिति के बीच अंतर बताया गया। इसी आधार पर 16,85,457 रुपए के कथित अधिक भुगतान का उल्लेख करते हुए संबंधित अधिकारियों और कर्मचारियों से जवाबदेही तय करने तथा राशि की वसूली की प्रक्रिया शुरू की गई।
सितंबर में जारी हुए थे कार्रवाई के निर्देश
शिकायतों की जांच के लिए दुर्ग कलेक्टर ने लोक निर्माण विभाग और ग्रामीण यांत्रिकी सेवा के कार्यपालन अभियंताओं की संयुक्त टीम से जांच कराई। 27 अगस्त 2026 को रिपोर्ट तैयार होने के बाद 3 सितंबर को कलेक्टर ने नगर निगम आयुक्त को पत्र लिखकर संबंधित अभियंताओं और कर्मचारियों पर कार्रवाई करने के निर्देश दिए। इसमें कथित अतिरिक्त भुगतान की वसूली का विषय भी शामिल था।
इसके बाद 16 सितंबर को नगर निगम के मुख्य अभियंता ने संबंधित इंजीनियरों को कारण बताओ नोटिस जारी किए। उप अभियंता अर्पित बंजारे सहित अन्य अधिकारियों ने इन नोटिसों और कार्रवाई की प्रक्रिया को हाईकोर्ट में चुनौती दी।
इंजीनियरों ने प्रक्रिया पर उठाए सवाल
याचिकाकर्ताओं का कहना था कि जांच के दौरान उन्हें न तो अपना पक्ष रखने का पर्याप्त अवसर मिला और न ही जांच प्रक्रिया में शामिल किया गया। इसके बावजूद जांच रिपोर्ट में उनके नाम शामिल कर कार्रवाई की प्रक्रिया शुरू कर दी गई। इंजीनियरों ने अदालत में यह भी कहा कि कलेक्टर के पत्र में कार्रवाई और वसूली के निर्देश पहले ही दिए जा चुके थे। ऐसे में बाद में कारण बताओ नोटिस जारी करना प्रभावी सुनवाई का विकल्प नहीं हो सकता।
याचिकाकर्ताओं ने पूरी प्रक्रिया को प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों के विपरीत बताते हुए राहत मांगी। उनकी ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता मतीन सिद्दीकी तथा अधिवक्ता जैनब मुस्तफा वनक और अपूर्वा निगम ने पक्ष रखा।
शासन ने जांच रिपोर्ट के आधार पर कार्रवाई की बात कही
राज्य शासन ने याचिका के जवाब में कार्रवाई को नियमों के अनुरूप बताया। शासन की ओर से कहा गया कि शिकायतों पर जांच कराई गई थी और रिपोर्ट में सामने आए निष्कर्षों के आधार पर ही कलेक्टर ने निर्देश जारी किए। प्रतिवादियों ने अपना जवाब दाखिल करने के लिए चार सप्ताह की मोहलत मांगी, जिसे अदालत ने मंजूरी दे दी।
न्यायमूर्ति बिभु दत्त गुरु की एकलपीठ ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद संबंधित पत्र और नोटिस के प्रभाव तथा क्रियान्वयन पर अगली सुनवाई तक रोक लगा दी। अदालत ने राज्य शासन, दुर्ग कलेक्टर और अन्य संबंधित अधिकारियों को नोटिस जारी कर जवाब भी मांगा है।
42 करोड़ के निर्माण कार्यों की जांच का मुद्दा भी जुड़ा
नगर निगम की परियोजना शाखा के पेवर ब्लॉक निर्माण कार्यों को लेकर पहले भी वित्तीय हिसाब-किताब पर सवाल उठे थे। करीब 42 करोड़ रुपए के कार्यों के संदर्भ में लगभग 30 करोड़ रुपए के काम का पूरा लेखा-जोखा नहीं मिलने और कुछ फाइलों की जांच नहीं हो पाने की जानकारी सामने आई थी।
हाईकोर्ट के ताजा आदेश को अंतिम फैसला नहीं माना जा सकता। अदालत ने फिलहाल कार्रवाई पर अंतरिम रोक लगाई है। कथित अनियमितताओं की वास्तविक स्थिति और संबंधित इंजीनियरों की जिम्मेदारी का निर्धारण आगे की न्यायिक प्रक्रिया में होगा।