नागपुर के रेशिमबाग मैदान में संपन्न हुआ राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ का शताब्दी वर्ष विजयादशमी उत्सव; ओटीटी प्लेटफॉर्म और नशा मुक्ति पर जताई गंभीर चिंता
नागपुर (ए)। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के शताब्दी वर्ष के पावन अवसर पर नागपुर के रेशिमबाग मैदान में आयोजित विजयादशमी उत्सव में संघ प्रमुख डॉ. मोहन भागवत ने शस्त्र पूजन कर संस्थापक डॉ. केशव बलिराम हेडगेवार को श्रद्धांजलि अर्पित की। इस दौरान उनके द्वारा दिए गए वैचारिक संबोधन को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अत्यंत प्रेरणादायी बताते हुए राष्ट्र की प्रगति और सामाजिक एकता की दिशा में एक अहम मार्गदर्शन करार दिया है।
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए संघ प्रमुख डॉ. भागवत ने देश के सामने मौजूद वर्तमान चुनौतियों और भविष्य की दिशा पर खुलकर विचार रखे। उन्होंने समाज और राष्ट्रहित में पांच प्रमुख संकल्पों—’पंच परिवर्तन’ (समरसता, कुटुंब प्रबोधन, पर्यावरण, स्व-बोध व स्वदेशी और नागरिक अनुशासन) का आह्वान किया।
व्यवहार की शैली बने पंच परिवर्तन: संघ प्रमुख ने स्पष्ट किया कि ये पांचों पहलें केवल एक वर्ष तक सीमित रहने वाले कार्यक्रम नहीं हैं, बल्कि यह व्यक्ति और समाज के जीवन में सकारात्मक बदलाव लाने वाली आचरण की एक शैली है। उन्होंने देश की स्वतंत्रता के लिए दिए गए पूर्वजों के बलिदान का स्मरण कराते हुए वर्तमान समय में भी वैसी ही राष्ट्रनिष्ठा और तपस्या की आवश्यकता पर बल दिया।
ओटीटी और सोशल मीडिया पर चिंता: नई पीढ़ी को लेकर गहरी चिंता व्यक्त करते हुए उन्होंने कहा कि डिजिटल माध्यमों और सोशल मीडिया से आ रही अनियंत्रित सूचनाओं का युवाओं पर नकारात्मक प्रभाव पड़ रहा है। बिना उचित-अनुचित के विवेक के जानकारी ग्रहण करने की प्रवृत्ति पर रोक लगाने के लिए उन्होंने देश में विशेषकर ‘ओटीटी प्लेटफॉर्म’ पर कड़े नियंत्रण और अनुशासन की आवश्यकता जताई, जिस पर शासन-प्रशासन को विचार करना चाहिए।
पर्यावरण और नशा मुक्ति का आह्वान: इसके साथ ही, हिमालयी क्षेत्रों में बिगड़ते पर्यावरण संतुलन, सामाजिक सद्भाव और युवाओं को अपनी गिरफ्त में ले रही नशे की गंभीर समस्या से निपटने के लिए उन्होंने समाज और सरकार को एकजुट होकर ठोस प्रयास करने का आह्वान किया।