रायपुर। सड़कों का जाल किसी भी राज्य की अर्थव्यवस्था की जीवनरेखा होता है। भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई) अपने गठन के 31वें वर्ष में प्रवेश करते हुए छत्तीसगढ़ में विकास की नई इबारत लिख रहा है। बीते वर्षों में तैयार हुए राष्ट्रीय राजमार्गों, फ्लाईओवर और आर्थिक कॉरिडोर ने न केवल प्रदेश की कनेक्टिविटी को मजबूत किया है, बल्कि उद्योग, व्यापार, पर्यटन और कृषि को नई उड़ान दी है। आज छत्तीसगढ़ की सड़कें केवल दूरी नहीं घटा रहीं, बल्कि संभावनाओं का विस्तार कर रही हैं।
भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई) ने छत्तीसगढ़ में अधोसंरचना विकास की दिशा में उल्लेखनीय उपलब्धियां हासिल की हैं। 31 वर्षों की यात्रा में संस्था ने प्रदेश को आधुनिक, चौड़ी और सुरक्षित सड़कों का मजबूत नेटवर्क प्रदान किया है, जिसने राज्य को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय व्यापार मानचित्र पर स्थापित किया है।
🔹 एनएच-53: वैश्विक कनेक्टिविटी का सेतु
महाराष्ट्र से ओडिशा तक फैला राष्ट्रीय राजमार्ग-53, जो एशियन हाईवे-46 का हिस्सा है, राज्य की आर्थिक गतिविधियों की धुरी बन चुका है। राजनांदगांव, दुर्ग, भिलाई, रायपुर और सरायपाली को जोड़ने वाला यह फोरलेन मार्ग उद्योगों के लिए जीवनरेखा साबित हो रहा है। आरंग के समीप महानदी पर निर्मित सिक्स-लेन ब्रिज इंजीनियरिंग उत्कृष्टता का प्रतीक है।
🔹 राजधानी से औद्योगिक बेल्ट तक तेज कनेक्टिविटी
राष्ट्रीय राजमार्ग-130 और 149B ने रायपुर, बिलासपुर, कोरबा और कटघोरा जैसे औद्योगिक केंद्रों को निर्बाध रूप से जोड़ा है। इससे कोयला, इस्पात और ऊर्जा क्षेत्र को परिवहन में बड़ी राहत मिली है। अंबिकापुर से धमतरी तक फैला नेटवर्क सुदूर अंचलों को मुख्यधारा में ला रहा है।
🔹 रायपुर-विशाखापट्टनम आर्थिक गलियारा
निर्माणाधीन 125 किलोमीटर लंबा सिक्स-लेन कॉरिडोर राज्य को सीधे समुद्री बंदरगाह से जोड़ेगा। तीन किलोमीटर लंबी स्मार्ट टनल इस परियोजना की विशेष पहचान है। यह मार्ग बस्तर अंचल में औद्योगिक और आर्थिक गतिविधियों को नई ऊर्जा देगा।
🔹 आधुनिक फ्लाईओवर और बायपास
रायपुर का टाटीबंध फ्लाईओवर और बिलासपुर का पेंड्रीडीह इंटरचेंज यातायात प्रबंधन के आधुनिक उदाहरण हैं। वहीं दुर्ग-रायपुर-आरंग बायपास महानगरों के ट्रैफिक दबाव को कम कर औद्योगिक निवेश को प्रोत्साहन देगा।
🔹 रायपुर-धनबाद कॉरिडोर से औद्योगिक मजबूती
627 किलोमीटर लंबा यह आर्थिक गलियारा छत्तीसगढ़ और झारखंड के बीच व्यापारिक संबंधों को सशक्त करेगा। सफर का समय घटने से कोरबा और रायगढ़ के उद्योगों को सीधा लाभ मिलेगा।
🔹 पर्यटन और आस्था को मिली गति
डोंगरगढ़, सिरपुर, राजिम, रतनपुर, मैनपाट और बस्तर जैसे स्थलों तक पहुंच अब पहले से कहीं अधिक आसान हो गई है। बेहतर सड़क नेटवर्क से पर्यटन क्षेत्र में नई संभावनाएं विकसित हुई हैं।
🔹 सामाजिक उत्तरदायित्व की मिसाल
एनएचएआई सड़क निर्माण के साथ सामाजिक सरोकारों को भी प्राथमिकता दे रहा है। बिलासपुर और रतनपुर में केटल शेल्टर का निर्माण सड़क सुरक्षा और पशु संरक्षण की दिशा में अभिनव पहल है।