कोर्ट बोली— कार्यवाही जारी रखना होता कानूनी प्रक्रिया का दुरुपयोग, ठोस साक्ष्य का अभाव
बेंगलुरु (ए)। विधानसभा चुनाव के दौरान प्रकाशित कथित ‘भ्रष्टाचार रेट कार्ड’ विज्ञापन से जुड़े आपराधिक मानहानि प्रकरण में राहुल गांधी को बड़ी राहत मिली है। कर्नाटक हाईकोर्ट ने उनके खिलाफ लंबित आपराधिक मानहानि कार्यवाही को रद्द कर दिया। अदालत ने कहा कि उपलब्ध सामग्री के आधार पर मामले को आगे बढ़ाना न्यायिक प्रक्रिया का दुरुपयोग होगा।
एकल पीठ का स्पष्ट मत
न्यायमूर्ति सुनील दत्त यादव की एकल पीठ ने अपने आदेश में कहा कि शिकायत में ऐसे ठोस साक्ष्य प्रस्तुत नहीं किए गए, जिनसे यह साबित हो सके कि विवादित विज्ञापन सीधे तौर पर राहुल गांधी के निर्देश पर जारी किया गया था। ऐसे में आपराधिक मुकदमे को जारी रखने का औचित्य नहीं बनता।
क्या था पूरा मामला?
यह शिकायत भारतीय जनता पार्टी की ओर से दर्ज कराई गई थी। आरोप था कि 5 मई 2023 को प्रमुख अखबारों में प्रकाशित पूरे पृष्ठ के विज्ञापन में तत्कालीन भाजपा सरकार पर “40 प्रतिशत कमीशन” लेने का आरोप लगाया गया, जिससे पार्टी और उसके नेतृत्व की छवि धूमिल हुई। शिकायत में कहा गया कि यह विज्ञापन सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ (पूर्व में ट्विटर) पर भी साझा किया गया।
इन नेताओं को भी बनाया गया था पक्षकार
मामले में राहुल गांधी के अलावा सिद्धारमैया और डी के शिवकुमार को भी आरोपी बनाया गया था। आरोप था कि तत्कालीन मुख्यमंत्री बसवराज बोम्मई के नेतृत्व वाली सरकार को बदनाम करने की मंशा से यह विज्ञापन प्रकाशित कराया गया।
बचाव पक्ष का तर्क
राहुल गांधी की ओर से दायर याचिका में दलील दी गई कि शिकायतकर्ता यह स्थापित करने में विफल रहा कि विज्ञापन उनके निर्देश या अनुमति से जारी हुआ। प्रथम दृष्टया व्यक्तिगत आपराधिक जिम्मेदारी तय करने लायक कोई प्रत्यक्ष साक्ष्य उपलब्ध नहीं है।
निर्णय का व्यापक असर
कानूनी विशेषज्ञों के मुताबिक, यह फैसला चुनावी अभियानों और राजनीतिक विज्ञापनों से जुड़े मामलों में एक महत्वपूर्ण संदर्भ बनेगा। अदालत ने स्पष्ट संकेत दिया है कि आपराधिक मानहानि के मामलों में प्रत्यक्ष, ठोस और स्पष्ट साक्ष्य अनिवार्य हैं; केवल आरोपों के आधार पर लंबी आपराधिक कार्यवाही उचित नहीं ठहराई जा सकती। इस निर्णय के साथ कर्नाटक की सियासत से जुड़ा एक और कानूनी विवाद समाप्त हो गया है, हालांकि राजनीतिक बयानबाजी का दौर आगे भी जारी रहने की संभावना बनी हुई है।