UNICEF के सहयोग से कार्यशाला, संवेदनशील जांच और चाइल्ड फ्रेंडली पुलिसिंग पर जोर
दुर्ग। बाल संरक्षण से जुड़े मामलों में पुलिस की भूमिका को और प्रभावी बनाने के उद्देश्य से दुर्ग जिला पुलिस ने एक महत्वपूर्ण पहल की। UNICEF के सहयोग से आयोजित रेंज स्तरीय कार्यशाला में बाल कल्याण पुलिस अधिकारियों और विवेचकों को Protection of Children from Sexual Offences Act (POCSO) तथा Juvenile Justice Act (JJ Act) के प्रावधानों पर व्यवहारिक और विधिसम्मत प्रशिक्षण दिया गया। कार्यशाला का आयोजन 19 फरवरी 2026 को सुबह 10:30 बजे सीए बिल्डिंग, सिविक सेंटर भिलाई में किया गया।
बाल संरक्षण मामलों की जांच पर विस्तृत मार्गदर्शन
कार्यक्रम में प्राथमिकी पंजीयन से लेकर बाल पीड़ितों के बयान दर्ज करने की प्रक्रिया, चाइल्ड फ्रेंडली पुलिसिंग के सिद्धांत, किशोर विधि-विरुद्ध बालकों के अधिकार, जे.जे. एक्ट के प्रपत्रों का उपयोग और किशोर न्याय बोर्ड व बाल कल्याण समिति के समक्ष प्रस्तुतिकरण तक सभी पहलुओं पर विस्तार से चर्चा हुई।
चिकित्सीय परीक्षण, परामर्श, पुनर्वास तंत्र और केस स्टडी के माध्यम से जांच के दौरान आने वाली व्यवहारिक चुनौतियों और उनके समाधान पर भी मार्गदर्शन दिया गया।

“समन्वय से मजबूत होगा न्याय तंत्र” — जिला कलेक्टर
कार्यक्रम में जिला कलेक्टर ने कहा कि बच्चे देश का भविष्य हैं और उन्हें सुरक्षित वातावरण देना प्रशासन व समाज की साझा जिम्मेदारी है। उन्होंने संयुक्त प्रशिक्षण को विभिन्न विभागों के बीच समन्वय बढ़ाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताया।

उन्होंने जोर देकर कहा कि समन्वित विवेचना और पुनर्वास तंत्र को सुदृढ़ कर ही किशोर न्याय प्रणाली को प्रभावी बनाया जा सकता है।

“संवेदनशीलता और गोपनीयता सर्वोपरि” — पुलिस अधीक्षक
पुलिस अधीक्षक ने अपने संबोधन में कहा कि बाल संरक्षण से जुड़े प्रत्येक मामले में संवेदनशीलता, गोपनीयता और कानूनी प्रावधानों का अक्षरशः पालन अनिवार्य है। गुणवत्तापूर्ण विवेचना, समयबद्ध कार्रवाई और विभागीय तालमेल ही पीड़ित बच्चों को त्वरित न्याय दिलाने की कुंजी है।

उन्होंने कहा कि ऐसे प्रशिक्षण पुलिस अधिकारियों की क्षमता वृद्धि के साथ-साथ बाल हित सर्वोपरि रखने की कार्यसंस्कृति को मजबूत करेंगे।
विभागीय सहभागिता से व्यापक दृष्टिकोण
कार्यशाला में किशोर न्याय बोर्ड, आरपीएफ, जीआरपी, जिला बाल संरक्षण इकाई, बाल संप्रेक्षण गृह, परिवीक्षा अधिकारी, बाल कल्याण अधिकारी, चाइल्ड हेल्पलाइन, केस वर्कर और स्कूल शिक्षा विभाग के प्रतिनिधियों ने भाग लिया।
सभी इकाइयों ने मिलकर बाल संरक्षण तंत्र को और प्रभावी बनाने के लिए आवश्यक कदमों पर चर्चा की।
सफल आयोजन में टीमवर्क की भूमिका
कार्यक्रम के सफल संचालन में अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक श्रीमती ममता देवांगन, नगर पुलिस अधीक्षक डॉ. चित्रा वर्मा, महिला थाना स्टाफ, पुलिस लाइन और प्रशिक्षण शाखा के अधिकारियों-कर्मचारियों की सक्रिय भूमिका रही।
दुर्ग पुलिस की अपील
दुर्ग पुलिस ने नागरिकों से अपील की है कि बच्चों से जुड़े किसी भी अपराध, शोषण या उत्पीड़न की सूचना तुरंत पुलिस को दें। बाल अधिकारों की रक्षा के लिए प्रशासन और समाज का सामूहिक सहयोग आवश्यक है।