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भिलाई में प्रमुखजन गोष्ठी में बोले संघ के अखिल भारतीय सह बौद्धिक प्रमुख, शताब्दी वर्ष को बताया नए विस्तार का पड़ाव
भिलाई के सेक्टर-4 स्थित एसएनजी स्कूल के सभागार में आयोजित प्रमुखजन गोष्ठी में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के अखिल भारतीय सह बौद्धिक प्रमुख दीपक विस्पुते ने कहा कि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ एक संगठन या संस्था नहीं है, सामाजिक परिवर्तन का महाआंदोलन है। संघ का मूल उद्देश्य समाज में “राष्ट्र प्रथम” का भाव जागृत करना और व्यक्ति निर्माण के माध्यम से राष्ट्र निर्माण करना है।
भिलाई। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के अखिल भारतीय सह बौद्धिक प्रमुख दीपक विस्पुते ने कहा कि संघ की स्थापना भारत के महान बलिदानियों की परंपरा को आगे बढ़ाने और राष्ट्रसेवा की भावना को मजबूत करने के उद्देश्य से हुई थी। उन्होंने कहा कि संघ के संस्थापक डॉ. केशव बलिराम हेडगेवार ने समाज को संगठित करने और राष्ट्र को सर्वोपरि मानने की भावना जगाने के लिए संघ कार्य की शुरुआत की थी।

सेक्टर-4 स्थित एसएनजी स्कूल के सभागार में आयोजित प्रमुखजन गोष्ठी में मुख्य वक्ता के रूप में संबोधित करते हुए विस्पुते ने कहा कि संघ के शताब्दी वर्ष को किसी उपलब्धि की अंतिम मंजिल नहीं बल्कि समाज के और भीतर जाकर कार्य करने का एक नया पड़ाव माना जाना चाहिए।

उन्होंने कहा कि संघ की यात्रा में एक समय ऐसा भी था जब इसे अप्रासंगिक माना जाता था, लेकिन समय के साथ संघ प्रासंगिक हुआ और अब समाज में प्रभावी भूमिका निभाते हुए आगे बढ़ रहा है। उन्होंने स्पष्ट किया कि संघ का मुख्य लक्ष्य व्यक्ति निर्माण और समाज निर्माण है।

विस्पुते ने संघ की शाखाओं की कार्यपद्धति का उल्लेख करते हुए बताया कि अनेक कार्यकर्ताओं ने संघ कार्य के लिए अपना जीवन समर्पित किया है, वहीं लाखों गृहस्थ भी अपनी प्राथमिकताओं में संघ कार्य को स्थान देते हुए समाज में सकारात्मक परिवर्तन के लिए सक्रिय हैं।

उन्होंने उपस्थित प्रमुखजनों से आह्वान करते हुए कहा कि समाज में बदलाव से ही देश का स्वरूप बदलेगा, यह कार्य किसी अवतार, राजनीतिक दल या सत्ता परिवर्तन से संभव नहीं है। संघ का उद्देश्य समाज में राष्ट्र प्रथम की चेतना जागृत करना है।
अपने संबोधन में उन्होंने यह भी कहा कि संघ सर्वसमावेशी है और समाज के प्रत्येक वर्ग को साथ लेकर चलने का प्रयास करता है। जो भी संघ के निकट आया और उसके कार्य को समझा, वह स्वाभाविक रूप से इस विचार से जुड़ गया।
विस्पुते ने वैश्विक परिप्रेक्ष्य का उल्लेख करते हुए कहा कि अमेरिका विश्व को बाजार के रूप में और चीन विस्तार के नजरिये से देखता है, जबकि भारत ही ऐसा देश है जो “वसुधैव कुटुंबकम” की भावना से पूरी दुनिया को एक परिवार मानता है।
उन्होंने बताया कि संघ से प्रेरित अनेक संगठन विभिन्न क्षेत्रों में बड़े स्तर पर कार्य कर रहे हैं, लेकिन संघ स्वयं किसी प्रकार की संख्या या शक्ति प्रदर्शन की होड़ में नहीं है। वर्तमान समय में परिवार व्यवस्था, बच्चों के संस्कार और पर्यावरण संरक्षण जैसे विषयों पर संघ की चिंता भी उन्होंने व्यक्त की।
कार्यक्रम में संघ के विभाग संघचालक कमलेश निषाद, जिला संघचालक गंगाधर जाधव मंच पर उपस्थित थे। कार्यक्रम की रूपरेखा विभाग सहकार्यवाह दिलेश्वर उमरे ने प्रस्तुत की। मंच संचालन जिला कार्यवाह सुनील पटेल ने किया तथा आभार प्रदर्शन जिला सहकार्यवाह दुष्यंत ने किया। गोष्ठी में बड़ी संख्या में महिला-पुरुष प्रमुखजन उपस्थित रहे।