डिजिटल क्रॉप सर्वे से 85% खसरे ऑनलाइन सत्यापित
79% किसानों की बनी फार्मर आईडी, योजनाओं का लाभ होगा आसान
58 हजार ग्रामीण युवाओं को मिला रोजगार, साल में दो बार काम का अवसर
छत्तीसगढ़ में खेती-किसानी अब तकनीक के सहारे नई दिशा में बढ़ रही है। केंद्र सरकार की एग्रीस्टेक परियोजना के तहत डिजिटल क्रॉप सर्वे ने कृषि व्यवस्था में पारदर्शिता और सटीकता को नई मजबूती दी है। इस पहल से जहां किसानों को योजनाओं का लाभ तेजी से मिलेगा, वहीं हजारों ग्रामीण युवाओं के लिए रोजगार के नए रास्ते भी खुले हैं।
रायपुर। छत्तीसगढ़ में कृषि क्षेत्र को आधुनिक और तकनीकी रूप से सशक्त बनाने की दिशा में एग्रीस्टेक परियोजना तेजी से प्रभाव दिखा रही है। मोबाइल ऐप आधारित डिजिटल क्रॉप सर्वे के माध्यम से अब खरीफ और रबी फसलों का डेटा सीधे ऑनलाइन दर्ज किया जा रहा है, जिससे कृषि प्रबंधन अधिक सटीक और पारदर्शी बन रहा है।
खरीफ वर्ष 2025 के लिए 15 अगस्त से शुरू किए गए इस सर्वे में राज्य के 33 जिलों के 18,008 गांवों को शामिल किया गया। कुल 1 करोड़ 19 लाख 68 हजार से अधिक खसरों का सर्वेक्षण किया गया, जिनमें से 1 करोड़ 18 लाख से ज्यादा खसरों को अनुमोदित किया जा चुका है। इस तरह करीब 85 प्रतिशत कार्य सफलतापूर्वक पूरा कर लिया गया है। वहीं रबी फसल 2026 के लिए सर्वेक्षण 1 जनवरी से जारी है।
एग्रीस्टेक के तहत किसानों की डिजिटल पहचान बनाने पर भी तेजी से काम हुआ है। राज्य के 40 लाख से अधिक किसानों में से लगभग 31.68 लाख किसानों का सत्यापन कर उनकी फार्मर आईडी तैयार कर ली गई है, जो कुल का 79.22 प्रतिशत है। इस बेहतर प्रदर्शन के चलते केंद्र सरकार ने राज्य को विशेष केंद्रीय सहायता योजना के तहत 104 करोड़ रुपये की राशि प्रदान की है।
मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने कहा कि सरकार किसानों को तकनीक से जोड़कर खेती को अधिक पारदर्शी और सक्षम बनाने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने कहा कि इस परियोजना से कृषि आंकड़ों का वैज्ञानिक प्रबंधन संभव होगा और किसानों को योजनाओं का लाभ समय पर मिलेगा।
राजस्व मंत्री टंक राम वर्मा ने इसे ग्रामीण अर्थव्यवस्था के लिए भी महत्वपूर्ण पहल बताया। उन्होंने जानकारी दी कि खरीफ सीजन 2025-26 में 33 जिलों के 14,066 गांवों में सर्वे कार्य पूरा किया गया, जिसमें 58,335 बेरोजगार युवाओं को सर्वेयर के रूप में रोजगार मिला। इन युवाओं को लगभग 12 करोड़ रुपये का भुगतान किया जाएगा।
विशेष बात यह है कि अब वर्ष में दो बार—खरीफ और रबी सीजन में—डिजिटल सर्वेक्षण होने से युवाओं को नियमित रोजगार मिलने लगेगा। इससे गांवों में आर्थिक गतिविधियां बढ़ेंगी और कृषि क्षेत्र में तकनीक का दायरा और मजबूत होगा।