अमेरिका-ईरान तनाव लंबा खिंचा तो पेट्रोल-डीजल समेत कई चीजें हो सकती हैं महंगी
देश में अप्रैल महीने के दौरान खुदरा महंगाई दर में मामूली बढ़ोतरी दर्ज की गई है। महंगाई बढ़कर 3.48 प्रतिशत पर पहुंच गई, जिसका सबसे बड़ा असर खाद्य वस्तुओं की कीमतों में बढ़ोतरी के रूप में सामने आया है। इसी बीच अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव ने भी आर्थिक चिंता बढ़ा दी है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि वैश्विक हालात लंबे समय तक तनावपूर्ण बने रहे तो आने वाले महीनों में ईंधन और जरूरी वस्तुओं की कीमतों पर अतिरिक्त दबाव पड़ सकता है।
नई दिल्ली (ए)। नई दिल्ली से जारी ताजा आंकड़ों के मुताबिक अप्रैल 2026 में खुदरा महंगाई दर बढ़कर 3.48 प्रतिशत पर पहुंच गई है। इससे पहले मार्च महीने में यह दर 3.40 प्रतिशत दर्ज की गई थी। महंगाई में यह बढ़ोतरी ऐसे समय में हुई है, जब वैश्विक बाजार पहले से ही अनिश्चितता के दौर से गुजर रहा है।
खाद्य वस्तुओं की कीमतों ने बढ़ाई चिंता
महंगाई में बढ़ोतरी की सबसे बड़ी वजह खाने-पीने की चीजों के दामों में आया उछाल माना जा रहा है। फूड इन्फ्लेशन अप्रैल में बढ़कर 4.20 प्रतिशत पहुंच गया, जबकि मार्च में यह 3.87 प्रतिशत था।
विशेषज्ञों के अनुसार सब्जियों, दालों, तेल और अन्य जरूरी उपभोक्ता वस्तुओं की कीमतों में तेजी का सीधा असर आम परिवारों के मासिक बजट पर पड़ रहा है।
ग्रामीण क्षेत्रों में ज्यादा असर
आंकड़ों के अनुसार शहरी क्षेत्रों में महंगाई दर 3.11 प्रतिशत से बढ़कर 3.16 प्रतिशत हो गई है। वहीं ग्रामीण इलाकों में यह दर 3.63 प्रतिशत से बढ़कर 3.74 प्रतिशत पहुंच गई। इससे साफ है कि गांवों में रहने वाले लोगों पर महंगाई का असर अपेक्षाकृत अधिक पड़ा है।
नए फॉर्मूले से मापी जा रही महंगाई
सरकार अब 2024 बेस ईयर के नए फॉर्मूले के आधार पर महंगाई के आंकड़े जारी कर रही है। इसके तहत उपभोक्ता खर्च के पैटर्न में बदलाव करते हुए कई नई सेवाओं और डिजिटल खर्चों को शामिल किया गया है।
नई व्यवस्था में खाने-पीने की वस्तुओं का वेटेज 45.9 प्रतिशत से घटाकर 36.75 प्रतिशत किया गया है। दूसरी ओर हाउसिंग, बिजली और गैस जैसी जरूरतों का महत्व बढ़ाया गया है।
इसके अलावा पुराने दौर की वस्तुएं जैसे वीसीआर और ऑडियो कैसेट को उपभोक्ता बास्केट से बाहर कर दिया गया है, जबकि OTT सब्सक्रिप्शन और डिजिटल स्टोरेज जैसी आधुनिक सेवाओं को शामिल किया गया है।
कैसे बढ़ती और घटती है महंगाई
अर्थशास्त्रियों के मुताबिक महंगाई मुख्य रूप से मांग और आपूर्ति के संतुलन पर निर्भर करती है। जब बाजार में लोगों की खरीद क्षमता बढ़ती है और मांग अधिक हो जाती है, लेकिन सप्लाई सीमित रहती है, तब वस्तुओं के दाम बढ़ने लगते हैं। वहीं मांग घटने या सप्लाई बढ़ने पर कीमतों में नरमी आती है।
3.48 प्रतिशत महंगाई का आम आदमी पर असर
महंगाई दर 3.48 प्रतिशत होने का अर्थ यह है कि पिछले साल की तुलना में रोजमर्रा की वस्तुओं और सेवाओं पर खर्च औसतन 3.48 प्रतिशत बढ़ गया है। उदाहरण के तौर पर, यदि कोई सामान पिछले वर्ष 100 रुपए में मिलता था, तो अब उसकी कीमत बढ़कर लगभग 103.48 रुपए हो गई है।
आर्थिक जानकारों का मानना है कि यदि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर तनाव और कच्चे तेल की कीमतों में तेजी जारी रहती है, तो आने वाले समय में महंगाई और बढ़ सकती है।