पूर्व जज की अध्यक्षता में जांच पैनल गठित; CBI के पूर्व निदेशक और रिटायर्ड पुलिस अधिकारी भी शामिल, पैलेटगन और महिलाओं से बदसलूकी के आरोपों की होगी पड़ताल
नई दिल्ली (ए)। नई दिल्ली के जंतर-मंतर पर संसद मार्च के दौरान हुई पुलिस कार्रवाई को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने जांच का रास्ता साफ कर दिया है। कोर्ट ने मामले की पड़ताल के लिए पांच सदस्यीय हाई पावर्ड कमेटी गठित की है। कमेटी की अध्यक्षता सुप्रीम कोर्ट के पूर्व जज जस्टिस आर. सुभाष रेड्डी करेंगे। जांच में पुलिस बल के इस्तेमाल, पैलेटगन चलाने और महिलाओं से कथित बदसलूकी सहित पूरे घटनाक्रम की परिस्थितियों की पड़ताल की जाएगी।
पांच सदस्यीय कमेटी में ये नाम
सुप्रीम कोर्ट की ओर से गठित कमेटी में पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट के पूर्व चीफ जस्टिस रवि शंकर झा, दिल्ली हाईकोर्ट की पूर्व जज जस्टिस शलिंदर कौर, CBI के पूर्व निदेशक ऋषि कुमार शुक्ला और मेघालय के रिटायर्ड DGP डॉ. एलआर बिश्नोई को सदस्य बनाया गया है।
18 अगस्त को कमेटी बनाने का फैसला
सुप्रीम कोर्ट ने 18 अगस्त को मामले की सुनवाई के दौरान जांच कमेटी गठित करने का निर्णय लिया था। अब कोर्ट ने कमेटी के सदस्यों के नाम घोषित कर दिए हैं। कमेटी जंतर-मंतर पर संसद मार्च के दौरान हुए घटनाक्रम और पुलिस की कार्रवाई से जुड़े आरोपों की जांच करेगी।
20 जुलाई को संसद मार्च के दौरान हुआ था विवाद
नीट पेपर लीक और परीक्षाओं में कथित गड़बड़ी के विरोध में CJP का जंतर-मंतर पर प्रदर्शन चल रहा था। 20 जुलाई को प्रदर्शनकारियों ने संसद मार्च का प्रयास किया। इस दौरान प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच झड़प हुई। दोनों पक्षों के लोगों के घायल होने की जानकारी सामने आई थी।
पुलिस ने बल प्रयोग को बताया जरूरी
दिल्ली पुलिस के मुताबिक संसद मार्च के दौरान स्थिति को नियंत्रित करने के लिए बल प्रयोग किया गया था। पुलिस का आरोप था कि प्रदर्शनकारियों की ओर से पथराव किया गया। वहीं प्रदर्शनकारियों ने पुलिस पर लाठीचार्ज और आंसू गैस के इस्तेमाल के आरोप लगाए थे।
पैलेटगन और महिलाओं से बदसलूकी के आरोप
पुलिस कार्रवाई के बाद प्रदर्शनकारियों की ओर से पैलेटगन के इस्तेमाल और महिलाओं के साथ कथित बदसलूकी के आरोप लगाए गए। इन्हीं आरोपों सहित पुलिस कार्रवाई के पूरे घटनाक्रम की निष्पक्ष जांच की मांग की गई थी।
120 पुलिसकर्मियों के घायल होने का दावा
20 जुलाई की झड़प के दौरान बड़ी संख्या में प्रदर्शनकारियों और सुरक्षाकर्मियों के घायल होने की जानकारी सामने आई थी। पुलिस की ओर से करीब 120 पुलिसकर्मियों के घायल होने की बात कही गई थी। कुल मिलाकर 180 से ज्यादा प्रदर्शनकारियों और सुरक्षाकर्मियों के घायल होने की रिपोर्ट सामने आई थी।
49 दिन चला था प्रदर्शन
CJP का जंतर-मंतर प्रदर्शन 20 जून से शुरू हुआ था। NEET पेपर लीक और परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं को लेकर चल रहा यह आंदोलन 49 दिन तक चला। 25 जुलाई को तत्कालीन शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद प्रदर्शन समाप्त होने की बात कही गई थी।