कोर्ट के आदेश पर एस-स्क्वायर आयरोमैक्स के अधिकृत अधिकारी और दोनों मैनेजिंग डायरेक्टरों पर केस, झूठी शिकायत और आपराधिक षड्यंत्र समेत कई धाराएं
भिलाई। डीएसपी को कथित रूप से झूठे मामले में फंसाने और उनके खिलाफ लगातार भ्रामक शिकायतें करने के मामले में सुपेला पुलिस ने एस-स्क्वायर आयरोमैक्स प्राइवेट लिमिटेड से जुड़े तीन लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की है। इनमें कंपनी के अधिकृत अधिकारी सतनाम सिंह, मैनेजिंग डायरेक्टर विभूति भूषण बाबू और मैनेजिंग डायरेक्टर श्रीराम गुप्ता शामिल हैं। डीएसपी की शिकायत पर पहले पुलिस स्तर पर कार्रवाई नहीं हुई, जिसके बाद उन्होंने न्यायालय का रुख किया। मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट दुर्ग भूपेश कुमार बसंत के 11 सितंबर 2026 के आदेश के बाद सुपेला पुलिस ने मामला दर्ज किया है।
स्कार्पियो को लेकर शुरू हुआ विवाद
मामले की शुरुआत स्कार्पियो एन वाहन क्रमांक CG 05/AP 5000 को लेकर हुई शिकायत से बताई गई है। कंपनी के अधिकृत अधिकारी सतनाम सिंह ने 13 अक्टूबर 2025 को जामुल थाने में शिकायत दर्ज कराई थी। इसमें आरोप लगाया गया था कि वाहन डीएसपी ने वापस नहीं किया है। शिकायत के बाद पुलिस ने मामले की जांच की और डीएसपी का बयान भी दर्ज किया।
इसी बीच वाहन के मूल मालिक अंकित सिंह ने 7 नवंबर 2025 को पुलिस के समक्ष अलग शिकायत दी। जांच में वाहन को लेकर कंपनी और अंकित सिंह के बीच लेनदेन से संबंधित विवाद सामने आया। जामुल पुलिस ने जांच पूरी करने के बाद मामले में कोई अपराध घटित होना नहीं पाया। पुलिस ने इसकी जानकारी सतनाम सिंह को 20 फरवरी 2026 और अंकित सिंह को 21 फरवरी 2026 को दी।
जांच के बाद भी शिकायतें जारी रहने का आरोप
डीएसपी ने न्यायालय में दिए आवेदन में आरोप लगाया कि जामुल पुलिस की जांच में स्थिति स्पष्ट होने के बावजूद सतनाम सिंह, विभूति भूषण बाबू और श्रीराम गुप्ता ने आपस में मिलीभगत कर उनके खिलाफ लगातार शिकायतें कीं। आरोप है कि पूर्व जांच के निष्कर्ष और उपलब्ध तथ्यों को सामने नहीं रखा गया और उनके खिलाफ आपराधिक आरोप लगाए जाते रहे।
आवेदन के अनुसार, 27 मई 2026 को एसपी, एएसपी और थाना जामुल में शिकायत की गई। इसके बाद 14 जुलाई को थाना सुपेला में भी शिकायत दी गई। डीएसपी ने 29 मई को डीजीपी और एसपी तथा 6 जुलाई को मुख्यमंत्री के ऑनलाइन पोर्टल पर भी शिकायत किए जाने का उल्लेख किया है।
थाने में सुनवाई नहीं हुई तो कोर्ट पहुंचे
डीएसपी के मुताबिक 17 और 21 जुलाई को सुपेला थाने में भी शिकायत दी गई, लेकिन एफआईआर दर्ज नहीं हुई। इसके बाद उन्होंने न्यायालय में आवेदन प्रस्तुत किया। कोर्ट के समक्ष उन्होंने आरोप लगाया कि उनके खिलाफ की गई शिकायतें पहले हो चुकी पुलिस जांच के तथ्यों को छिपाकर की गईं और उन्हें आपराधिक मामले में फंसाने का प्रयास किया गया।
कोर्ट ने प्रथम दृष्टया अपराध माना
11 सितंबर 2026 को मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट दुर्ग भूपेश कुमार बसंत ने उपलब्ध दस्तावेजों का अवलोकन किया। आदेश में प्रथम दृष्टया मिथ्या सूचना देने, लोक सेवक के कार्य में बाधा डालने, झूठी शिकायत एवं साक्ष्य तैयार करने, नुकसान पहुंचाने के इरादे से झूठा अपराध लगाने, छल और आपराधिक षड्यंत्र से जुड़े अपराध बनने की बात कही गई।
न्यायालय ने धारा 175(3) बीएनएसएस के तहत आवेदन स्वीकार करते हुए थाना प्रभारी सुपेला को तीनों आरोपियों के खिलाफ बीएनएस की धारा 217, 221, 229, 248, 318, 356 और 61 के तहत एफआईआर दर्ज कर जांच करने का आदेश दिया।
अब पुलिस खंगालेगी शिकायतों का रिकॉर्ड
कोर्ट के निर्देश के बाद पुलिस ने मामला दर्ज कर विवेचना शुरू कर दी है। जांच में जामुल थाने की पूर्व कार्रवाई, वाहन से जुड़े दस्तावेज, दोनों पक्षों के बीच हुए लेनदेन, अलग-अलग स्तर पर की गई शिकायतों और उपलब्ध अन्य साक्ष्यों की पड़ताल की जाएगी। मामले में आगे की कार्रवाई जांच के तथ्यों के आधार पर होगी।