17 मांगों को लेकर ओपीडी बहिष्कार का ऐलान; समाधान नहीं हुआ तो 23 सितंबर से इमरजेंसी सेवाओं से भी दूरी की चेतावनी
रायपुर। छत्तीसगढ़ के सरकारी मेडिकल कॉलेजों और अस्पतालों में जूनियर डॉक्टर एक बार फिर आंदोलन की राह पर हैं। स्टाइपेंड और वेतन-मानदेय में संशोधन सहित 17 सूत्रीय मांगों को लेकर जूनियर डॉक्टर्स एसोसिएशन ने 21 सितंबर से ओपीडी सेवाओं के बहिष्कार की घोषणा की है। डॉक्टरों ने चेतावनी दी है कि यदि मांगों पर समय रहते निर्णय नहीं हुआ तो 23 सितंबर से इमरजेंसी सेवाओं का भी बहिष्कार किया जाएगा। आंदोलन में एमबीबीएस इंटर्न, पीजी रेजिडेंट, सीनियर रेजिडेंट और बॉन्डेड जूनियर रेजिडेंट शामिल होंगे।
आश्वासन के बाद भी आदेश जारी नहीं होने से नाराजगी
जूनियर डॉक्टरों का कहना है कि उनकी मांगों को लेकर सरकार के समक्ष पहले भी ज्ञापन और पत्र सौंपे गए थे। 19 अगस्त को स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल के साथ एमबीबीएस इंटर्न के स्टाइपेंड को लेकर बैठक हुई थी। बैठक में मिले आश्वासन के बाद डॉक्टरों ने अपना आंदोलन स्थगित कर दिया था।
डॉक्टरों के मुताबिक, उस समय 1 सितंबर से बढ़ा हुआ स्टाइपेंड देने की बात कही गई थी, लेकिन निर्धारित समय बीतने के बाद भी संबंधित सरकारी आदेश जारी नहीं हुआ। इससे चिकित्सकों में असंतोष बढ़ा है।

पहले भी आंदोलन के बाद मिला था भरोसा
एसोसिएशन का कहना है कि मांगों को लेकर पहले भी कई दिनों तक आंदोलन किया गया था। उस दौरान सरकार की ओर से समाधान का भरोसा मिलने के बाद आंदोलन वापस लिया गया, लेकिन कई मुद्दे अब भी लंबित हैं। इसी वजह से डॉक्टरों ने दोबारा चरणबद्ध आंदोलन का निर्णय लिया है।
17 सूत्रीय मांगों में स्टाइपेंड और वेतन संशोधन प्रमुख
डॉक्टरों की मांगों में एमबीबीएस इंटर्न के स्टाइपेंड में वृद्धि, पीजी रेजिडेंट, बॉन्डेड जूनियर रेजिडेंट और सीनियर रेजिडेंट के वेतन एवं मानदेय में संशोधन शामिल है। इसके अलावा डीएम और एमसीएच सुपर-स्पेशलिटी रेजिडेंट के स्टाइपेंड में बदलाव, वेतन विसंगतियों को दूर करने, बॉन्ड से संबंधित समस्याओं का निराकरण और चिकित्सा सेवाओं से जुड़े लंबित मामलों का समाधान भी मांगा गया है।
21 सितंबर से ओपीडी, 23 से इमरजेंसी का बहिष्कार
एसोसिएशन ने आंदोलन को चरणबद्ध तरीके से चलाने का फैसला किया है। 21 सितंबर से ओपीडी सेवाओं का बहिष्कार किया जाएगा। इसके बाद भी मांगों पर ठोस निर्णय नहीं होने पर 23 सितंबर से इमरजेंसी सेवाओं का बहिष्कार करने की चेतावनी दी गई है।
डॉक्टरों का कहना है कि वे सरकार के सामने लगातार अपनी मांगें रखते आए हैं। उनका उद्देश्य मांगों का स्थायी समाधान कराना है, लेकिन आश्वासन के बाद भी आदेश जारी नहीं होने के कारण आंदोलन का फैसला लेना पड़ा।