ईओडब्ल्यू-एसीबी ने 42 आरोपियों के खिलाफ पेश किया 27 हजार पन्नों का पूरक चालान, नोएडा और रायपुर में डुप्लीकेट होलोग्राम छापने का आरोप
छत्तीसगढ़ के बहुचर्चित 3200 करोड़ रुपए से अधिक के शराब घोटाले की जांच में अवैध शराब की सप्लाई से लेकर कथित कमीशन वसूली और हवाला के जरिए विदेश तक रकम पहुंचाने का नेटवर्क सामने आया है। राज्य आर्थिक अपराध अन्वेषण एवं एंटी करप्शन ब्यूरो (ईओडब्ल्यू-एसीबी) ने मामले में 42 आरोपियों के खिलाफ करीब 27 हजार पन्नों का 10वां पूरक चालान पेश किया है। जांच एजेंसी के अनुसार, वैध शराब की बिक्री पर कथित कमीशन वसूली के अलावा बिना आबकारी शुल्क चुकाए शराब तैयार करने और बेचने के लिए अलग व्यवस्था बनाई गई थी।
रायपुर। छत्तीसगढ़ के शराब घोटाले की जांच में शराब के कथित अवैध कारोबार और उसके वितरण से जुड़े नेटवर्क को लेकर नए तथ्य सामने आए हैं। जांच एजेंसी का आरोप है कि शराब की सप्लाई, कमीशन की वसूली, नकदी एकत्र करने और हवाला के जरिए रकम दुबई तक पहुंचाने की व्यवस्था बनाई गई थी। इस मामले में ईओडब्ल्यू-एसीबी ने बुधवार को 42 आरोपियों के खिलाफ लगभग 27 हजार पन्नों का 10वां पूरक चालान अदालत में पेश किया। इसमें 20 व्यक्ति और 22 कंपनियां शामिल हैं।
चालान में यश टुटेजा, अख्तर ढेबर, प्रिंस भाटिया, नवीन केडिया, विधु गुप्ता और आबकारी अधिकारी आशीष श्रीवास्तव सहित कारोबारियों तथा विभिन्न कंपनियों के नाम शामिल बताए गए हैं। एजेंसी की जांच के मुताबिक, कथित घोटाले में शराब कारोबार के लिए दो तरह की व्यवस्थाएं संचालित की जा रही थीं।
जांच रिपोर्ट में बताया गया है कि एक तरफ वैध शराब की सप्लाई पर कथित तौर पर कमीशन वसूला जाता था, वहीं दूसरी तरफ ‘पार्ट-बी’ नाम से अलग व्यवस्था के तहत बिना आबकारी शुल्क चुकाए शराब तैयार कर बाजार में बेचने का आरोप है। इस कथित नेटवर्क में शराब के भंडारण से लेकर दुकानों तक पहुंचाने और रकम के लेन-देन की अलग-अलग कड़ियां होने की बात कही गई है।
जांच से जुड़े विवरण में यह भी आरोप लगाया गया है कि डुप्लीकेट होलोग्राम तैयार कराने के लिए नोएडा और रायपुर का इस्तेमाल किया गया। इन होलोग्राम के जरिए शराब की पहचान और बिक्री से संबंधित व्यवस्था को प्रभावित करने का आरोप है। वहीं, शराब के वितरण के लिए गोदामों और अन्य ठिकानों के इस्तेमाल की बात भी सामने आई है।
एजेंसी के अनुसार, कथित अवैध कारोबार से प्राप्त रकम के संग्रह और उसे अलग-अलग माध्यमों से आगे पहुंचाने की व्यवस्था बनाई गई थी। हवाला के जरिए दुबई तक पैसा भेजे जाने का आरोप भी जांच का हिस्सा है। मामले में पेश पूरक चालान के जरिए जांच एजेंसी ने आरोपियों, कंपनियों और कथित वित्तीय लेन-देन से जुड़ी कड़ियों को अदालत के सामने रखा है। आरोपों पर अंतिम निर्णय न्यायिक प्रक्रिया के बाद होगा।