करीब 30 संदिग्धों की पड़ताल के लिए एसटीएफ की टीम कोलकाता रवाना, बीएसपी सहित उद्योगों में काम करने वाले कर्मचारियों के दस्तावेज खंगाल रही पुलिस
दुर्ग-भिलाई में अवैध रूप से रह रहे विदेशी नागरिकों की पहचान और फर्जी दस्तावेजों के इस्तेमाल पर रोक लगाने के लिए पुलिस ने जांच अभियान तेज कर दिया है। बीएसपी सहित अन्य औद्योगिक इकाइयों में काम करने वाले करीब 30 हजार ठेका श्रमिकों और कर्मचारियों का सत्यापन किया जा रहा है। वहीं, लगभग 30 संदिग्ध लोगों की पृष्ठभूमि की जानकारी जुटाने के लिए स्पेशल टास्क फोर्स (एसटीएफ) की टीम कोलकाता भेजी गई है। पुलिस दस्तावेजों की जांच के साथ संदिग्धों के स्थायी पते और संपर्कों का भी सत्यापन कर रही है।
दुर्ग। जिले में अवैध घुसपैठ और फर्जी पहचान पत्रों के इस्तेमाल से जुड़े मामलों की जांच के लिए पुलिस ने नई रणनीति के तहत कार्रवाई शुरू की है। औद्योगिक क्षेत्रों में काम करने वाले श्रमिकों और कर्मचारियों के रिकॉर्ड की पड़ताल की जा रही है। पुलिस ने करीब 30 हजार लोगों की सूची तैयार की है, जिनके दस्तावेजों का सत्यापन किया जा रहा है। इसके अलावा, लगभग 30 संदिग्धों की विस्तृत जानकारी जुटाने के लिए एसटीएफ का गठन किया गया है। टीम को जांच के सिलसिले में कोलकाता भेजा गया है।
पुलिस अधिकारियों के मुताबिक, संदिग्धों का डोजियर तैयार किया जा रहा है, ताकि जांच के निष्कर्षों के आधार पर कानून के अनुरूप आगे की कार्रवाई की जा सके। जिन मामलों में संबंधित बांग्लादेशी नागरिकों के खिलाफ गंभीर आपराधिक प्रकरण नहीं हैं, उनमें राज्य सरकार के माध्यम से एफआईआर वापस लेने की प्रक्रिया अपनाने पर विचार किया जा रहा है, ताकि नियमानुसार उन्हें उनके देश वापस भेजने की कार्रवाई की जा सके। इसके लिए मानक संचालन प्रक्रिया (एसओपी) भी तैयार की गई है।
पुलिस का कहना है कि जांच में ऐसे मामले सामने आए हैं, जिनमें कुछ लोग पहले पश्चिम बंगाल के रास्ते भारत के अन्य हिस्सों तक पहुंचे और बाद में कथित तौर पर फर्जी दस्तावेजों के सहारे रहने लगे। हालांकि, प्रत्येक मामले में नागरिकता और दस्तावेजों की वास्तविकता की पुष्टि जांच के बाद ही की जाएगी।
बीएसपी में पहले भी पकड़े जा चुके हैं संदिग्ध
पुलिस के अनुसार, इससे पहले भिलाई इस्पात संयंत्र में काम करने वाले 1188 श्रमिकों की जांच की गई थी। इस दौरान सात बांग्लादेशी नागरिकों को पकड़कर जेल भेजा गया था। सत्यापन के दौरान 101 लोगों के संबंध में जानकारी स्पष्ट नहीं हो सकी थी। इनमें से 45 लोगों का भौतिक सत्यापन कराया गया। इसके अलावा, बिना मुसाफिरी दर्ज कराए रह रहे 777 लोगों को चिह्नित किया गया। इनमें पश्चिम बंगाल, ओडिशा, बिहार और उत्तर प्रदेश के 160 लोगों के स्थायी पतों पर सत्यापन के लिए सस्पेक्ट रोल भेजे गए हैं।
फर्जी आधार कार्ड से भिलाई में रहने का आरोप
पुलिस ने पन्ना बीवी पिता अब्दुल रौफ के मामले का भी उल्लेख किया है। पुलिस के मुताबिक, वह मूल रूप से बांग्लादेश के खुलना जिले की रहने वाली है और करीब 14 वर्ष की उम्र में एजेंट के माध्यम से भारत आई थी। आरोप है कि कोलकाता के सोनागाछी इलाके में लगभग पांच वर्ष रहने के बाद वह दिल्ली पहुंची। वहां अंजलि सिंह के नाम से आधार कार्ड हासिल करने के बाद करीब दो साल पहले भिलाई आ गई।
पुलिस के अनुसार, वह नेहरू रोड पर सब्जी कारोबारी सूरज साव के मकान में किराए से रह रही थी। अगस्त 2024 में इसी पहचान पत्र का इस्तेमाल कर शंकराचार्य मेडिकल कॉलेज में इलाज कराने और बच्चेदानी का ऑपरेशन करवाने का भी आरोप है। इस मामले में पुलिस ने पन्ना बीवी और मकान मालिक सूरज साव को गिरफ्तार कर जेल भेजा था।
पहचान छिपाकर रहने के अन्य मामले भी सामने आए
सुपेला पुलिस ने कांट्रैक्टर कॉलोनी से ज्योति रसेल उर्फ शाहिदा खातून और उसके पति मोहम्मद रसेल को गिरफ्तार किया था। पुलिस के मुताबिक, दोनों वर्ष 2020 में अलग-अलग मामलों में पकड़े गए थे, लेकिन जमानत मिलने के बाद दोबारा भिलाई आकर रहने लगे। जांच में उनके बांग्लादेश में रह रहे परिजनों से इंटरनेट कॉल और वाट्सएप के जरिए संपर्क में रहने की जानकारी सामने आई।
एक अन्य मामले में मोहन नगर पुलिस ने जयंती नगर स्थित एक मकान पर सेक्स रैकेट संचालित होने की सूचना के आधार पर कार्रवाई की थी। वहां पश्चिम बंगाल की दो युवतियों, छत्तीसगढ़ की दो युवतियों और दो पुरुषों से पूछताछ की गई। पुलिस के अनुसार, दस्तावेजों की जांच में पश्चिम बंगाल की दोनों युवतियों की पहचान बांग्लादेशी नागरिकों के रूप में हुई। पुलिस अब पुराने मामलों के रिकॉर्ड और नए संदिग्धों की जानकारी का मिलान कर आगे की कार्रवाई कर रही है।