बिना कार्रवाई का ब्योरा दिए पोर्टल पर बंद कर रहे थे शिकायतें; 15 दिन में लिखित स्पष्टीकरण देने के निर्देश
रायपुर। आम लोगों की शिकायतों के निराकरण में लापरवाही के मामले में लोक निर्माण विभाग ने अपने 13 अधिकारियों को कारण बताओ नोटिस जारी किया है। मामला सीएम हेल्पलाइन 1076 से जुड़ा है, जहां शिकायतों का समाधान किए बिना ही उन्हें बंद किए जाने की बात सामने आई है। विभागीय जांच में कार्रवाई का विवरण और समस्या दूर करने की जानकारी दर्ज नहीं करने की गड़बड़ी भी मिली है। नोटिस जारी होने के बाद अब संबंधित अधिकारियों को 15 दिन के भीतर लिखित जवाब देना होगा।
पोर्टल की समीक्षा में मिली खामियां
पीडब्ल्यूडी ने अगस्त और सितंबर के दौरान दर्ज शिकायतों की स्थिति की समीक्षा की थी। इसमें एल-1, एल-2 और एल-3 स्तर पर शिकायतों को बंद करने की प्रक्रिया में कमियां पाई गईं। कई शिकायतों में यह स्पष्ट नहीं था कि संबंधित अधिकारी ने मौके पर जाकर जांच की या नहीं, समस्या दूर करने के लिए क्या कदम उठाए और शिकायतकर्ता को क्या जानकारी दी गई।
विभाग ने इसे शिकायतों के निराकरण की निर्धारित प्रक्रिया के विपरीत मानते हुए 13 अधिकारियों को नोटिस जारी किया है।
अधीक्षण अभियंता से लेकर एसडीओ तक शामिल
नोटिस पाने वालों में तीन अधीक्षण अभियंता, पांच कार्यपालन अभियंता और पांच अनुविभागीय अधिकारी शामिल हैं।
एल-1 स्तर पर अतुल राज पेगवार, राजेश कुमार बाजपेयी, जगदीश प्रसाद, अशोक कुमार हरियाले और सोनल ढालेन्द्र को नोटिस दिया गया है। ये अधिकारी बिलासपुर, बेमेतरा, पेंड्रा, दुर्ग और पाटन से संबंधित जिम्मेदारियां संभाल रहे हैं।
एल-2 स्तर पर केशव प्रसाद लहरे, घासीराम जांगड़े, रोशन कुमार साहू, प्यारे लाल पैकरा और प्रज्ञा नंद को जवाब देने के लिए कहा गया है। ये क्रमशः बेमेतरा, कोरबा, बिलासपुर, सारंगढ़ और कांकेर से संबंधित हैं।
एल-3 स्तर पर रायपुर मंडल क्रमांक-2 के डीके नेताम, दुर्ग मंडल की अर्पणा चौरपगार और राष्ट्रीय राजमार्ग मंडल बिलासपुर के महादेव लहरे को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया है।
समाधान का विवरण दर्ज करना अनिवार्य
विभाग ने स्पष्ट किया है कि शिकायतों को पोर्टल पर बंद करने से पहले की गई कार्रवाई का पूरा विवरण दर्ज करना होगा। इसमें स्थल निरीक्षण, समस्या के निराकरण के लिए उठाए गए कदम, कार्रवाई की तारीख और आगे काम पूरा करने की समय-सीमा शामिल होगी। शिकायतकर्ता को दी गई जानकारी भी दर्ज करनी होगी। यदि मामला किसी दूसरे विभाग के अधिकार क्षेत्र में आता है, तो इसकी वजह स्पष्ट करना जरूरी होगा।
15 दिन में देना होगा जवाब
विभाग के अनुसार, शिकायतों को केवल पोर्टल पर बंद कर देना उनका समाधान नहीं माना जा सकता। कार्रवाई की जानकारी अधूरी रहने से शिकायतों की वास्तविक स्थिति और निराकरण की प्रगति का आकलन प्रभावित होता है। इसी कारण संबंधित अधिकारियों को जवाब देने का अवसर दिया गया है। निर्धारित अवधि में जवाब नहीं देने पर उनके विरुद्ध एकतरफा कार्रवाई की जा सकती है।