बारिश के बीच बढ़ी भीड़ से बिगड़े हालात, प्रवेश के दौरान धक्का-मुक्की के बाद मची अफरा-तफरी; हादसे के बाद पंडाल में एंट्री बंद
कोलकाता। पश्चिम बंगाल की राजधानी कोलकाता में शनिवार शाम दुर्गा पूजा उत्सव के दौरान एक दर्दनाक हादसा सामने आया। चोरबागान स्थित दुर्गा पूजा पंडाल में बारिश के बीच श्रद्धालुओं की भारी भीड़ जमा हो गई। इसी दौरान पंडाल में प्रवेश को लेकर धक्का-मुक्की शुरू हुई और देखते ही देखते भगदड़ जैसे हालात बन गए। इस घटना में 18 लोगों की मौत होने की खबर है, जबकि 45 से अधिक लोग घायल हुए हैं।

बारिश के बीच बिगड़े हालात
कोलकाता पुलिस के मुताबिक, शनिवार शाम बारिश शुरू होने के बाद बड़ी संख्या में लोग पंडाल के भीतर पहुंचने लगे। व्यवस्था के तहत एक बार में सीमित संख्या में श्रद्धालुओं को प्रवेश दिया जाना था, लेकिन भीड़ का दबाव लगातार बढ़ता गया। इसी दौरान पंडाल का एक हिस्सा गिर गया, जिसके बाद वहां अफरा-तफरी मच गई। लोग सुरक्षित बाहर निकलने की कोशिश करने लगे और स्थिति गंभीर हो गई।
प्रवेश के दौरान हुई धक्का-मुक्की
बताया गया कि शाम करीब 7:40 बजे नए श्रद्धालुओं को प्रवेश देने के दौरान भीड़ अनियंत्रित होने लगी। देखते ही देखते वहां भगदड़ मच गई। हादसे में कई लोगों की जान चली गई और बड़ी संख्या में लोग घायल हो गए। मृतकों में 3 पुरुष, 13 महिलाएं और 2 बच्चे शामिल बताए गए हैं। हालांकि, कोलकाता मेडिकल कॉलेज से जुड़े सूत्रों के हवाले से मृतकों की संख्या 20 होने का दावा भी किया गया है। मृतकों की अंतिम संख्या की आधिकारिक पुष्टि आवश्यक है।
हादसे के बाद पंडाल में प्रवेश बंद
घटना के तुरंत बाद पंडाल की लाइटें बंद कर दी गईं और श्रद्धालुओं की आवाजाही रोक दी गई। एहतियात के तौर पर आसपास के कई अन्य दुर्गा पूजा पंडालों को भी बंद कर दिया गया। हादसे के बाद इलाके में हड़कंप की स्थिति रही और प्रशासन की ओर से स्थिति संभालने के प्रयास किए गए।
सरकार ने जारी किया हेल्पलाइन नंबर
पश्चिम बंगाल सरकार ने हादसे से प्रभावित लोगों और उनके परिजनों की सहायता के लिए टोल-फ्री हेल्पलाइन नंबर 18003455678 जारी किया है। इस नंबर के माध्यम से प्रभावित परिवार मदद और आवश्यक जानकारी प्राप्त कर सकते हैं।
दुर्गा पूजा के उत्सवी माहौल के बीच हुए इस हादसे ने सुरक्षा व्यवस्था और भीड़ प्रबंधन को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना में जान गंवाने वाले लोगों के परिजनों के लिए यह बड़ा दुख है, वहीं घायलों के उपचार और प्रभावित परिवारों को सहायता उपलब्ध कराना प्रशासन के सामने तत्काल चुनौती है।