सलमान खान को निशाना बनाकर मुंबई में वसूली का नेटवर्क खड़ा करने की रणनीति का दावा; जेल में रहते हुए भी गैंग के सक्रिय रहने पर उठे सवाल
गैंगस्टर लॉरेंस बिश्नोई का नेटवर्क जेल की सलाखों के पीछे से भी सक्रिय रहने के आरोपों के कारण चर्चा में है। जांच एजेंसियों की रिपोर्ट और अंडरवर्ल्ड मामलों के जानकारों के विश्लेषण के मुताबिक, गैंग बॉलीवुड हस्तियों को धमकाकर और उन पर हमलों के जरिए अपनी दहशत कायम करने की कोशिश कर रहा है। अभिनेता सलमान खान को लगातार निशाना बनाए जाने को इसी रणनीति से जोड़कर देखा जा रहा है। जानकारों का मानना है कि फिल्म जगत में भय का माहौल बनाकर वसूली और आपराधिक प्रभाव बढ़ाना इस नेटवर्क का संभावित मकसद हो सकता है।
सेलिब्रिटीज को निशाना बनाकर ताकत दिखाने की रणनीति
लॉरेंस बिश्नोई गैंग पर बॉलीवुड की चर्चित हस्तियों को निशाना बनाने के आरोप लगते रहे हैं। उपलब्ध विवरण के अनुसार, गैंग की गतिविधियों में धमकी देकर फिरौती मांगना, मांग पूरी नहीं होने पर घर या प्रतिष्ठान के बाहर गोलीबारी करना और सार्वजनिक रूप से चेतावनी देना शामिल है। पंजाबी गायक सिद्धू मूसेवाला की हत्या और महाराष्ट्र के पूर्व मंत्री बाबा सिद्दीकी की हत्या जैसे मामलों ने इस गैंग की गतिविधियों को राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा में ला दिया।
अभिनेता सलमान खान के घर के बाहर हुई गोलीबारी और उन्हें दी गई धमकियों ने भी सुरक्षा व्यवस्था को लेकर गंभीर सवाल खड़े किए। ऐसी घटनाओं को केवल व्यक्तिगत रंजिश के बजाय आपराधिक नेटवर्क की ताकत प्रदर्शित करने की कोशिश के तौर पर भी देखा जाता है।

एक घटना से पूरे फिल्म जगत में भय फैलाने का प्रयास
अपराध जगत पर लेखन करने वाले जानकारों के मुताबिक, किसी चर्चित फिल्मी हस्ती को निशाना बनाने से उसका असर केवल संबंधित व्यक्ति तक सीमित नहीं रहता। ऐसी घटना से पूरी फिल्म इंडस्ट्री में भय का माहौल बन सकता है। इसके जरिए गैंग यह संदेश देने की कोशिश कर सकता है कि उसकी मांगों को नजरअंदाज करने वालों को गंभीर परिणाम भुगतने पड़ सकते हैं।
वरिष्ठ पत्रकार विवेक अग्रवाल के विश्लेषण के अनुसार, लॉरेंस बिश्नोई सलमान खान को केंद्र में रखकर मुंबई में अपना प्रभाव बढ़ाने की कोशिश कर रहा है। उनके मुताबिक, यह तरीका अंडरवर्ल्ड के पुराने दौर की गतिविधियों से मिलता-जुलता है, जब आपराधिक गिरोह फिल्म जगत में अपना दबदबा बनाने और वसूली का नेटवर्क खड़ा करने का प्रयास करते थे।
दाऊद इब्राहिम के दौर जैसी कार्यशैली की चर्चा
मुंबई में अंडरवर्ल्ड के प्रभाव के दौर में फिल्म उद्योग से जुड़े लोगों को धमकाने और उनसे धन वसूलने के मामले सामने आते रहे हैं। दाऊद इब्राहिम की डी-कंपनी का नाम भी ऐसी गतिविधियों से जुड़ता रहा है। अब लॉरेंस गैंग की कथित गतिविधियों की तुलना उसी दौर से की जा रही है।
हालांकि, दोनों गिरोहों के काम करने के तरीकों में समानता की चर्चा को विश्लेषण के रूप में ही देखा जाना चाहिए। किसी आपराधिक नेटवर्क की वास्तविक मंशा और उसके संचालन के तरीके का निर्धारण जांच तथा उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर ही किया जा सकता है।
काले हिरण के शिकार का मामला बना धमकी की पृष्ठभूमि
सलमान खान और लॉरेंस बिश्नोई के बीच विवाद की पृष्ठभूमि वर्ष 1998 के काले हिरण शिकार मामले से जुड़ी बताई जाती है। फिल्म ‘हम साथ-साथ हैं’ की शूटिंग के दौरान जोधपुर में काले हिरण के शिकार का मामला सामने आया था। बाद में इस मामले में जोधपुर की अदालत ने सलमान खान को पांच वर्ष की सजा सुनाई थी।
बिश्नोई समुदाय में काले हिरण को धार्मिक और सांस्कृतिक महत्व प्राप्त है। इसी आधार पर लॉरेंस बिश्नोई ने सलमान खान के प्रति अपनी नाराजगी जताई थी। वर्ष 2018 में जोधपुर अदालत में पेशी के दौरान सलमान खान को जान से मारने की धमकी दिए जाने की खबरें सामने आई थीं। इसके बाद अभिनेता की सुरक्षा का मुद्दा लगातार चर्चा में रहा।
जेल से नेटवर्क चलने के आरोपों ने बढ़ाई चिंता
लॉरेंस बिश्नोई के जेल में रहने के बावजूद उसके गिरोह की गतिविधियों को लेकर सवाल उठते रहे हैं। तिहाड़ जेल के पूर्व महानिदेशक संजय बेनीवाल के हवाले से बताया गया है कि लॉरेंस जेल को अपने लिए सुरक्षित स्थान मानता है। वहीं, एनआईए की रिपोर्ट में उसके नेटवर्क के जेल के भीतर से सक्रिय रहने और मजबूत होने से संबंधित दावे किए गए हैं।
सिद्धू मूसेवाला हत्याकांड की साजिश जेल से रचे जाने और छह शूटरों को जिम्मेदारी सौंपे जाने का उल्लेख भी उपलब्ध विवरण में है। इन दावों से जेलों में बंद संगठित अपराधियों के संचार, संपर्क और नेटवर्क पर नियंत्रण को लेकर गंभीर सवाल सामने आते हैं।
मुंबई में वसूली का साम्राज्य खड़ा करने की आशंका
अपराध जगत के जानकारों के विश्लेषण में यह आशंका जताई गई है कि बॉलीवुड हस्तियों को धमकाना मुंबई में प्रभाव बढ़ाने और वसूली का नेटवर्क विकसित करने की कोशिश का हिस्सा हो सकता है। हालांकि, किसी खास हमले या धमकी के पीछे वास्तविक मकसद का निष्कर्ष जांच के निष्कर्षों और प्रमाणों के आधार पर ही निकाला जा सकता है।
फिलहाल, फिल्म जगत की सुरक्षा और संगठित अपराध के नेटवर्क पर अंकुश लगाने की चुनौती महत्वपूर्ण बनी हुई है। चर्चित हस्तियों को धमकाने की घटनाएं यह भी रेखांकित करती हैं कि जेल में बंद अपराधियों के कथित नेटवर्क और उनके सहयोगियों की गतिविधियों पर प्रभावी निगरानी कितनी जरूरी है।