30,213 करोड़ रुपये के इश्यू पर संस्थागत खरीदारों का खास जोर; 1,119 रुपये है शेयर का ऊपरी मूल्य, ग्रे मार्केट में 258 रुपये प्रीमियम का दावा
नई दिल्ली। शेयर बाजार में जियो प्लेटफॉर्म्स के IPO को लेकर निवेशकों का उत्साह दिखाई दे रहा है। 23 अक्टूबर को आवेदन के अंतिम दिन सुबह 10 बजे तक इश्यू छह गुना से अधिक सब्सक्राइब हो गया। उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक, कंपनी के 19.75 करोड़ शेयरों के मुकाबले लगभग 119 करोड़ शेयरों के लिए आवेदन प्राप्त हुए। सबसे अधिक मांग संस्थागत निवेशकों की ओर से आई, जिनकी श्रेणी 13 गुना से ज्यादा भर गई। खुदरा निवेशकों की श्रेणी में सब्सक्रिप्शन 1.76 गुना रहा।
IPO से जुटाए जाएंगे 30,213 करोड़ रुपये
जियो प्लेटफॉर्म्स ने इस सार्वजनिक निर्गम के माध्यम से 30,213 करोड़ रुपये जुटाने का लक्ष्य रखा है। इश्यू खुलने से पहले एंकर निवेशकों को शेयर जारी कर कंपनी 8,110 करोड़ रुपये जुटा चुकी थी। इसके बाद बाजार में उपलब्ध शेष इश्यू का आकार लगभग 22,103 करोड़ रुपये रह गया।
शुरुआती दो दिनों में भी मिला अच्छा प्रतिसाद
इश्यू के पहले दिन 21 अक्टूबर को ही निवेशकों ने इसमें मजबूत रुचि दिखाई थी। उस दिन IPO 3.02 गुना सब्सक्राइब हुआ और 59.68 करोड़ शेयरों के लिए बोलियां दर्ज की गईं। अगले दिन संस्थागत निवेशकों की भागीदारी बढ़ने से मांग में और इजाफा हुआ।
एक लॉट के लिए 13,428 रुपये जरूरी
IPO में प्रति शेयर कीमत 1,065 से 1,119 रुपये के बीच रखी गई है। खुदरा श्रेणी में न्यूनतम आवेदन के लिए 13,428 रुपये की राशि निर्धारित की गई है। वहीं, अधिकतम 14 लॉट यानी 168 शेयरों के लिए आवेदन करने पर ऊपरी मूल्य के आधार पर लगभग 1.87 लाख रुपये निवेश करने होंगे।
लिस्टिंग पर मुनाफे की उम्मीद, लेकिन जोखिम बरकरार
ग्रे मार्केट में जियो के शेयरों का प्रीमियम 258 रुपये प्रति शेयर बताया जा रहा था। यदि ऊपरी इश्यू मूल्य 1,119 रुपये में यह प्रीमियम जोड़ा जाए तो संभावित कीमत 1,377 रुपये बनती है। इस हिसाब से अनुमानित बढ़त 23 प्रतिशत से अधिक बैठती है। हालांकि, ग्रे मार्केट प्रीमियम आधिकारिक बाजार मूल्य नहीं है और इससे वास्तविक लिस्टिंग या मुनाफे की पुष्टि नहीं होती।
कर्ज भुगतान और कारोबारी जरूरतों पर खर्च होगी राशि
IPO से प्राप्त रकम का उपयोग रिलायंस जियो इन्फोकॉम लिमिटेड के कर्ज चुकाने और सामान्य कॉरपोरेट उद्देश्यों के लिए किया जाएगा। निर्गम के बाद प्रमोटर समूह की हिस्सेदारी घटकर 64.48 प्रतिशत रहने का अनुमान है, जबकि सार्वजनिक शेयरधारकों की हिस्सेदारी बढ़कर 35.52 प्रतिशत हो जाएगी।
निवेशकों की बड़ी भागीदारी के बीच अब बाजार की नजर शेयरों के अंतिम आवंटन और लिस्टिंग पर रहेगी। निवेशकों को ध्यान रखना चाहिए कि अधिक सब्सक्रिप्शन या ऊंचा GMP अपने आप में लिस्टिंग लाभ की गारंटी नहीं है।