अमेरिकी राष्ट्रपति बोले- समझौता नहीं हुआ तो हो सकता है नया सैन्य अभियान; ईरान ने समुद्र के नीचे बिछी केबलों को निशाना बनाने की चेतावनी दी
अमेरिका और ईरान के बीच तनाव एक बार फिर बढ़ने के संकेत मिल रहे हैं। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने ईरान के साथ समझौता नहीं होने पर दोबारा सैन्य कार्रवाई की संभावना जताई है। इसके जवाब में ईरान ने चेतावनी दी है कि अमेरिका और इजराइल ने फिर हमला किया तो खाड़ी क्षेत्र में समुद्र के नीचे बिछी इंटरनेट केबलों को निशाना बनाया जा सकता है। इससे इंटरनेट, बैंकिंग और ऑनलाइन कारोबार प्रभावित होने का खतरा बढ़ सकता है।
वॉशिंगटन डीसी (ए)। अमेरिका और ईरान के बीच जारी टकराव में एक बार फिर सैन्य कार्रवाई की आशंका गहरा गई है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने फ्लोरिडा में एक चुनावी रैली के दौरान कहा कि यदि ईरान समझौते के लिए तैयार नहीं होता है, तो अमेरिका एक और छोटा सैन्य अभियान चला सकता है। उन्होंने इसके लिए पहले चलाए गए अभियान ‘एपिक फ्यूरी’ का जिक्र किया। हालांकि, ट्रम्प ने यह स्पष्ट नहीं किया कि संभावित कार्रवाई कब होगी और उसका स्वरूप क्या रहेगा।
ट्रम्प इससे पहले भी युद्ध को जल्द समाप्त करने की बात कह चुके हैं। व्हाइट हाउस के बाहर पत्रकारों से चर्चा के दौरान उन्होंने कहा था कि अमेरिका इस संघर्ष को बहुत कम समय में खत्म कर सकता है। हालांकि, उन्होंने यह सवाल भी उठाया कि युद्ध को पूरी तरह समाप्त किया जाए या इसे धीरे-धीरे कमजोर पड़ने दिया जाए। उन्होंने होर्मुज जलडमरूमध्य से तेल की आवाजाही जारी रहने की बात भी कही। यह मार्ग वैश्विक तेल आपूर्ति के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण है।
समुद्र के नीचे बिछी केबलों पर खतरा
अमेरिकी धमकी के बीच ईरान ने भी जवाबी कार्रवाई की चेतावनी दी है। उसका कहना है कि अमेरिका और इजराइल ने दोबारा हमला किया तो खाड़ी देशों के आसपास समुद्र के नीचे बिछी इंटरनेट केबलों को निशाना बनाया जा सकता है। इन केबलों के जरिए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बड़ी मात्रा में डिजिटल डेटा का आदान-प्रदान होता है। इन्हें नुकसान पहुंचने पर इंटरनेट कनेक्टिविटी, बैंकिंग सेवाओं और ऑनलाइन कारोबार में व्यवधान पैदा हो सकता है। इससे क्षेत्रीय तनाव का असर डिजिटल बुनियादी ढांचे और वैश्विक अर्थव्यवस्था तक पहुंचने की आशंका है।
मिडटर्म चुनाव के बाद हमले की चर्चा
ट्रम्प ने अक्टूबर की शुरुआत में कहा था कि अमेरिका 3 नवंबर को होने वाले मध्यावधि चुनाव से पहले ईरान पर हमला नहीं करेगा। इन चुनावों के परिणाम से अमेरिकी संसद के दोनों सदनों में राजनीतिक नियंत्रण तय होगा। वहीं, 21 अक्टूबर को प्रकाशित द न्यूयॉर्क टाइम्स की एक रिपोर्ट में दावा किया गया कि अमेरिकी और इजराइली सेनाएं चुनाव के बाद ईरान पर संभावित हमले की योजना बना रही हैं।
रिपोर्ट के मुताबिक, संभावित लक्ष्यों में ईरान के ऊर्जा प्रतिष्ठान, परमाणु केंद्र तथा मिसाइल और ड्रोन से जुड़े भंडार शामिल हो सकते हैं। हालांकि, संभावित कार्रवाई की तारीख और अंतिम रणनीति को लेकर आधिकारिक स्थिति स्पष्ट नहीं है।
फ्रांस और तुर्किये ने दी कूटनीति की सलाह
ईरान पर नए हमले की आशंका के बीच फ्रांस, तुर्किये और जर्मनी ने तनाव बढ़ने को लेकर चिंता जताई है। तुर्किये के विदेश मंत्री हाकान फिदान ने कहा कि नई सैन्य कार्रवाई संघर्ष को व्यापक क्षेत्र में फैला सकती है। उनके मुताबिक, इस संकट का समाधान बातचीत और कूटनीतिक प्रयासों से ही निकाला जाना चाहिए।
फ्रांस के विदेश मंत्री ज्यां-नोएल बारो ने भी सभी पक्षों से तनाव बढ़ाने वाले कदमों से बचने की अपील की। उन्होंने चेताया कि अमेरिका और ईरान के बीच टकराव बढ़ने से वैश्विक तेल और गैस की कीमतों पर गंभीर असर पड़ सकता है। जर्मनी के विदेश मंत्री योहान वाडेफुल ने कहा कि जर्मनी, फ्रांस और ब्रिटेन ईरान के साथ बातचीत के लिए तैयार हैं, ताकि उसे परमाणु हथियार हासिल करने से रोका जा सके।