पत्नी के शारीरिक संबंध से इनकार और सुसाइड की धमकियों को अदालत ने माना मानसिक उत्पीड़न; दो माह के भीतर 20 लाख रुपए स्थायी भरण-पोषण देने का आदेश
छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने एक महत्वपूर्ण फैसले में कहा है कि पति को लगातार शारीरिक संबंध बनाने से रोकना तथा सुसाइड की धमकी देना मानसिक क्रूरता की श्रेणी में आता है। अदालत ने 11 साल से अलग रह रहे दंपती के मामले में फैमिली कोर्ट का आदेश पलटते हुए पति की अपील मंजूर कर तलाक दे दिया।
बिलासपुर। छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने वैवाहिक संबंधों को लेकर एक अहम फैसला सुनाते हुए कहा है कि पत्नी द्वारा पति के साथ शारीरिक संबंध बनाने से लगातार इनकार और आत्महत्या की धमकी देना मानसिक क्रूरता माना जाएगा। अदालत ने इसे विवाह टूटने का पर्याप्त आधार मानते हुए 11 साल से अलग रह रहे अंबिकापुर के एक दंपती की शादी को खत्म कर दिया।
जस्टिस रजनी दुबे और जस्टिस एके प्रसाद की डिवीजन बेंच ने अपने निर्णय में कहा कि लंबे समय से अलगाव और वैवाहिक जिम्मेदारियों को निभाने से साफ इनकार दर्शाता है कि दांपत्य संबंध अब सामान्य नहीं रह गए हैं। कोर्ट ने पति की अपील स्वीकार करते हुए उसे दो महीने के भीतर पत्नी को 20 लाख रुपए स्थायी गुजारा भत्ता देने का निर्देश दिया।
पत्नी बोली—पति योग में लीन, वैवाहिक संबंधों में रुचि नहीं
अंबिकापुर निवासी 45 वर्षीय युवक ने बताया कि उसकी शादी 30 मई 2009 को रायपुर की एक महिला से हिंदू रीति-रिवाजों से हुई थी। पति का आरोप था कि शादी के एक माह बाद ही पत्नी उसे छोड़कर मायके चली गई और 2013 में कुछ दिन साथ रहने के दौरान भी उसने शारीरिक संबंध बनाने से इंकार कर दिया। यहां तक कि पति ने कहा—पत्नी ने संबंध बनाने पर सुसाइड करने की धमकी तक दी।
दूसरी ओर, पत्नी ने आरोपों को सिरे से नकारते हुए कहा कि उसका पति एक साध्वी का भक्त है और योग-साधना में लीन रहने के कारण वैवाहिक संबंधों में रुचि नहीं रखता था। उसने यह भी कहा कि पति संतान नहीं चाहता था और उसने खुद शारीरिक व मानसिक प्रताड़ना झेली है।
पत्नी ने वैवाहिक अधिकारों की बहाली के लिए अर्जी भी दायर की थी, लेकिन बाद में उसे वापस ले लिया।
11 साल से अलगाव—किसी भी रिश्ते का अंत: कोर्ट
फैमिली कोर्ट ने पहले पति की अर्जी खारिज कर दी थी, जिसके खिलाफ उसने हाईकोर्ट में अपील की। हाईकोर्ट ने पाया कि दोनों 11 वर्षों से अलग रह रहे हैं और पत्नी स्वयं भी अब पति के साथ रहने की इच्छुक नहीं है।
कोर्ट ने कहा कि इतने लंबे समय का अलगाव, marital obligation निभाने से स्पष्ट इनकार और शारीरिक संबंधों में अनिच्छा मानसिक क्रूरता के दायरे में आती है।
अंततः हाईकोर्ट ने फैमिली कोर्ट का निर्णय रद्द करते हुए पति के पक्ष में तलाक डिक्री जारी कर दी।