अवामी लीग के परंपरागत वोट बैंक का झुकाव बना गेमचेंजर; जमात और छात्र दल NCP को करारी हार
बांग्लादेश की सियासत में बड़ा उलटफेर हुआ है। 299 सीटों वाली संसद में बहुमत का आंकड़ा पार करते हुए Bangladesh Nationalist Party (BNP) ने 209 सीटों पर जीत दर्ज की है। इसके साथ ही लंदन से हाल में लौटे पार्टी प्रमुख Tarique Rahman का प्रधानमंत्री बनना लगभग तय माना जा रहा है।
ढाका। बांग्लादेश के आम चुनावों में इस बार मतदाताओं ने स्पष्ट जनादेश दिया है। Bangladesh Nationalist Party ने 299 में से 209 सीटों पर जीत हासिल कर पूर्ण बहुमत का रास्ता साफ कर लिया है, जबकि सरकार बनाने के लिए 150 सीटों की आवश्यकता थी। कट्टरपंथी Bangladesh Jamaat-e-Islami गठबंधन महज 70 सीटों पर सिमट गया। वहीं, शेख हसीना सरकार के खिलाफ आंदोलन में सक्रिय रही National Citizen Party (NCP) को भी मतदाताओं ने नकार दिया।
राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार BNP की एकतरफा जीत के पीछे तीन बड़े कारण रहे। पहला, पूर्व प्रधानमंत्री Sheikh Hasina की पार्टी Awami League के पारंपरिक वोट, खासकर हिंदू मतदाताओं का झुकाव BNP की ओर हुआ। गोपालगंज समेत खुलना, सिलहट, चटगांव और ठाकुरगंज जैसे जिलों में BNP ने बढ़त बनाई।
दूसरा, जमात-ए-इस्लामी का अतीत उसके लिए भारी पड़ा। 1971 के मुक्ति संग्राम में उसके रुख को लेकर मतदाताओं में अब भी नाराजगी देखी गई। तीसरा, छात्र आंदोलन से निकली NCP आंतरिक कलह और जमात से गठबंधन के कारण विश्वसनीयता खो बैठी।
इस चुनाव में सबसे बड़ा चेहरा रहे तारिक रहमान, जो पूर्व राष्ट्रपति Ziaur Rahman और पूर्व प्रधानमंत्री Khaleda Zia के पुत्र हैं। 2008 में देश छोड़ने के बाद करीब 17 वर्षों तक लंदन में निर्वासन का जीवन बिताने वाले रहमान 25 दिसंबर 2025 को स्वदेश लौटे। उनकी वापसी को BNP के लिए राजनीतिक संजीवनी माना गया।
हसीना सरकार के दौरान उन पर 80 से अधिक मामले दर्ज हुए थे और विभिन्न मामलों में सजा भी सुनाई गई थी। बावजूद इसके, वे लंदन से ही पार्टी की कमान संभाले रहे। 9 जनवरी 2026 को उन्हें औपचारिक रूप से पार्टी का चेयरमैन बनाया गया। 30 दिसंबर 2025 को खालिदा जिया के निधन के बाद यह पद रिक्त था। ढाका पहुंचने पर तारिक रहमान का स्वागत नायक की तरह हुआ। उन्होंने हवाई अड्डे पर मिट्टी को छूकर नमन किया, जिसकी तस्वीरें सोशल मीडिया पर व्यापक रूप से साझा की गईं। इसके बाद उन्होंने देशव्यापी दौरे कर अर्थव्यवस्था सुधारने का रोडमैप पेश किया और सीधे संवाद की रणनीति अपनाई।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि खालिदा जिया के निधन से उपजी सहानुभूति, अवामी लीग का चुनाव नहीं लड़ना, छात्र नेतृत्व से मोहभंग और जमात के प्रति नाराजगी—इन सभी कारकों ने BNP के पक्ष में माहौल बनाया। ढाका यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर सैफुल आलम चौधरी के मुताबिक, “BNP ने कोई असाधारण रणनीति नहीं अपनाई, लेकिन अवामी लीग के लगभग 10 फीसदी वोटरों का समर्थन उसे निर्णायक बढ़त दिला गया।” स्पष्ट जनादेश के साथ अब बांग्लादेश की राजनीति में नए अध्याय की शुरुआत होने जा रही है, जिसकी कमान तारिक रहमान के हाथों में होगी।