ईरानी सेना की चेतावनी—‘सबसे खतरनाक अभियान’ शुरू होगा
पश्चिम एशिया में तनाव चरम पर पहुंच गया है। अमेरिका और इजराइल के संयुक्त हमले में ईरान के सर्वोच्च नेता Ali Khamenei के मारे जाने का दावा किया गया है। तेहरान स्थित उनके कार्यालय परिसर पर कई मिसाइलों से हमले की खबर है। हमले में उनके परिवार के सदस्यों और कई वरिष्ठ सैन्य कमांडरों के भी हताहत होने की सूचना है। हालांकि हालात बेहद संवेदनशील बने हुए हैं और क्षेत्र में बड़े सैन्य टकराव की आशंका गहरा गई है।
तेल अवीव/तेहरान (ए)। सूत्रों के मुताबिक, शनिवार देर रात तेहरान में स्थित सर्वोच्च नेता के कार्यालय कॉम्प्लेक्स को निशाना बनाते हुए करीब 30 मिसाइलें दागी गईं। बताया जा रहा है कि उस समय खामेनेई वरिष्ठ कमांडरों के साथ बैठक कर रहे थे। हमले में उनकी बेटी, दामाद, बहू और पोती समेत लगभग 40 कमांडरों के मारे जाने की बात सामने आई है।
नेतन्याहू और ट्रम्प का दावा
इजराइल के प्रधानमंत्री Benjamin Netanyahu ने देर रात बयान जारी कर खामेनेई के मारे जाने का दावा किया। इसके कुछ समय बाद अमेरिका के राष्ट्रपति Donald Trump ने भी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर इसी तरह का बयान दिया।
रविवार सुबह ईरान की सरकारी समाचार एजेंसियों ‘तसनीम’ और ‘फार्स’ ने भी इस घटना की पुष्टि करने की खबरें प्रसारित कीं।
ईरान में 40 दिन का शोक
ईरानी इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) ने बयान जारी कर कहा कि देश ने अपना महान नेता खो दिया है। सरकार ने 40 दिन के राजकीय शोक और सात दिन के सार्वजनिक अवकाश की घोषणा की है। तेहरान सहित कई शहरों में सुरक्षा कड़ी कर दी गई है।
‘अब सबसे खतरनाक जवाब’ की चेतावनी
ईरानी सेना ने कड़ा रुख अपनाते हुए कहा है कि अब तक का सबसे खतरनाक सैन्य अभियान शुरू किया जाएगा। बयान में अमेरिकी ठिकानों को निशाना बनाए जाने की चेतावनी दी गई है। क्षेत्र में पहले ही मिसाइल हमलों और जवाबी कार्रवाई से हालात विस्फोटक बने हुए हैं।
हमलों में भारी जनहानि का दावा
तेहरान समेत 10 बड़े शहरों पर हमलों की खबर है। ईरानी अधिकारियों के मुताबिक अब तक 200 से अधिक लोगों की मौत और 700 से ज्यादा के घायल होने की सूचना है। एक स्कूल पर मिसाइल गिरने से बड़ी संख्या में छात्राओं के हताहत होने का दावा भी किया गया है। हालांकि स्वतंत्र स्रोतों से इन आंकड़ों की पुष्टि नहीं हो सकी है।
कौन थे अयातुल्ला अली खामेनेई
19 अप्रैल 1939 को मशहद में जन्मे Ali Khamenei ईरान की इस्लामी व्यवस्था के सबसे प्रभावशाली चेहरों में रहे। 1979 की इस्लामी क्रांति में Ruhollah Khomeini के करीबी सहयोगी रहे खामेनेई ने 1989 में उनके निधन के बाद देश के सर्वोच्च नेता का पद संभाला। वे 1981 से 1989 तक ईरान के राष्ट्रपति भी रहे। समर्थक उन्हें इस्लामी व्यवस्था का संरक्षक मानते रहे, जबकि आलोचक उनके शासन को कठोर और केंद्रीकृत बताते हैं।
क्षेत्रीय अस्थिरता की आशंका
खामेनेई के मारे जाने के दावे ने पश्चिम एशिया में अस्थिरता की आशंका को और बढ़ा दिया है। अंतरराष्ट्रीय समुदाय की नजर अब इस बात पर टिकी है कि ईरान की ओर से संभावित जवाबी कार्रवाई किस स्तर की होगी और क्या यह टकराव व्यापक युद्ध में तब्दील होगा।