हाईकोर्ट ने अतिरिक्त समय देने से किया इनकार, 23 साल पुराने मामले में फिर तेज हुई कानूनी कार्रवाई
छत्तीसगढ़ के बहुचर्चित रामअवतार जग्गी हत्याकांड में हाईकोर्ट ने सख्त रुख अपनाते हुए पूर्व मुख्यमंत्री अजीत जोगी के पुत्र अमित जोगी को तीन सप्ताह के भीतर सरेंडर करने का निर्देश दिया है। इस फैसले के बाद प्रदेश की राजनीति में हलचल तेज हो गई है।
बिलासपुर (ए)। लंबे समय से सुर्खियों में रहे रामअवतार जग्गी हत्याकांड में छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट से अहम फैसला सामने आया है। मुख्य न्यायाधीश रमेश सिंह की डिवीजन बेंच ने मामले में आरोपी अमित जोगी को तीन सप्ताह के भीतर आत्मसमर्पण करने का निर्देश दिया है।
हाईकोर्ट का सख्त रुख
1 अप्रैल 2026 को हुई सुनवाई के दौरान अमित जोगी की ओर से जवाब प्रस्तुत करने के लिए अतिरिक्त समय मांगा गया था, लेकिन कोर्ट ने इस मांग को खारिज कर दिया। इसके साथ ही अदालत ने स्पष्ट किया कि अब मामले में और देरी स्वीकार नहीं की जाएगी और आरोपी को जेल जाना होगा।
क्या है पूरा मामला
यह मामला 4 जून 2003 का है, जब एनसीपी नेता रामअवतार जग्गी की गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। इस केस में अमित जोगी सहित कुल 31 लोगों को आरोपी बनाया गया था। 2007 में निचली अदालत ने अमित जोगी को बरी कर दिया था, लेकिन सीबीआई की अपील के बाद मामला फिर से चर्चा में आया। सुप्रीम कोर्ट के हस्तक्षेप के बाद हाईकोर्ट में इस केस की दोबारा सुनवाई शुरू हुई, जो अब निर्णायक मोड़ पर पहुंच गई है।
राजनीतिक हलचल तेज
अमित जोगी को पहले इस मामले में अंतरिम राहत मिली हुई थी और वे लंबे समय से बाहर थे। लेकिन अब सरेंडर के आदेश के बाद प्रदेश की राजनीति में एक बार फिर हलचल बढ़ने के आसार हैं। इस संवेदनशील मामले में आगे की कानूनी प्रक्रिया पर सभी की नजरें टिकी हुई हैं।