शासकीय संकल्प पेश, परिसीमन के बाद लोकसभा-विधानसभा में आरक्षण लागू करने की मांग; कांग्रेस ने कहा चुनावी मुद्दा, साव ने किया पलटवार
छत्तीसगढ़ विधानसभा के विशेष सत्र में गुरुवार को महिला सशक्तिकरण और 33 प्रतिशत महिला आरक्षण का मुद्दा केंद्र में रहा। सरकार ने शासकीय संकल्प के जरिए परिसीमन के बाद लोकसभा और विधानसभा में महिला आरक्षण लागू करने की मांग रखी, जिस पर सदन में सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी बहस देखने को मिली।
रायपुर। छत्तीसगढ़ विधानसभा का विशेष सत्र गुरुवार को हंगामेदार माहौल के बीच शुरू हुआ। सत्र के मुख्य एजेंडे में महिला सशक्तिकरण को लेकर शासकीय संकल्प पेश किया गया, जिसमें परिसीमन के बाद लोकसभा और विधानसभा में 33 प्रतिशत महिला आरक्षण लागू करने की मांग की गई है।
सत्र शुरू होने से पहले मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय की अध्यक्षता में भाजपा विधायक दल की बैठक आयोजित हुई। वहीं सदन की कार्यवाही शुरू होते ही सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच आरोप-प्रत्यारोप का दौर शुरू हो गया।
इस विशेष सत्र में प्रदेशभर से निगम, पालिका और पंचायतों की 500 से अधिक महिला जनप्रतिनिधियों ने भाग लिया। महिला आरक्षण जैसे महत्वपूर्ण विषय पर चर्चा के दौरान सदन में कई बार तीखी बहस भी हुई।
कांग्रेस विधायक अनिल भेड़िया ने कहा कि महिला आरक्षण विधेयक केवल चुनावी झुनझुना है। उन्होंने आरोप लगाया कि वर्ष 2023 में बिल पारित होने के बावजूद इसे लागू नहीं किया गया। उन्होंने कहा कि देश की महिलाएं अपने अधिकारों को अच्छी तरह समझती हैं।
पूर्व मंत्री अनिला भेड़िया ने कहा कि कांग्रेस 33 प्रतिशत महिला आरक्षण के पक्ष में है, लेकिन वर्तमान सीटों पर ही इसे लागू किया जाना चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा महिलाओं के नाम पर राजनीति कर रही है और चुनावी माहौल में विशेष सत्र बुलाने का उद्देश्य राजनीतिक लाभ लेना है।
वहीं डिप्टी सीएम अरुण साव ने कांग्रेस पर पलटवार करते हुए कहा कि कांग्रेस ने अपने घोषणा पत्र में महिलाओं को 500 रुपए देने का वादा किया था, लेकिन उसे पूरा नहीं किया। उन्होंने सवाल उठाया कि कांग्रेस किस आधार पर महिला अधिकारों की बात कर रही है।
चर्चा के दौरान कांग्रेस विधायकों ने दावा किया कि उनकी पार्टी ने महिलाओं को सबसे अधिक राजनीतिक अवसर दिए हैं। उन्होंने आंकड़े प्रस्तुत करते हुए कहा कि कांग्रेस दल में महिला विधायकों की संख्या भाजपा से अधिक है।
महिला आरक्षण के मुद्दे पर सदन में बहस जारी रही और दोनों पक्षों ने अपने-अपने राजनीतिक तर्कों के साथ एक-दूसरे को घेरने का प्रयास किया।