हत्या के प्रयास का मामला छुपाने पर SDM कोर्ट की कार्रवाई, समोदा पंचायत में फिर होंगे चुनाव
दुर्ग जिले के चर्चित समोदा गांव में अफीम की खेती का मामला उजागर करने वाले सरपंच अरुण गौतम को पद से बर्खास्त कर दिया गया है। एसडीएम कोर्ट ने चुनावी हलफनामे में आपराधिक प्रकरण की जानकारी छिपाने को नियमों का उल्लंघन मानते हुए उनका निर्वाचन निरस्त कर दिया। अब गांव में दोबारा उपचुनाव कराया जाएगा।
दुर्ग-भिलाई। प्रदेश में अफीम की अवैध खेती को लेकर सुर्खियों में आए समोदा गांव के सरपंच अरुण गौतम आखिरकार अपनी कुर्सी नहीं बचा सके। चुनावी हलफनामे में हत्या के प्रयास सहित गंभीर आपराधिक मामलों की जानकारी छिपाने के आरोप में एसडीएम कोर्ट ने उन्हें सरपंच पद से बर्खास्त कर दिया है। कोर्ट ने उनका निर्वाचन शून्य घोषित करते हुए पंचायत में दोबारा चुनाव कराने के निर्देश दिए हैं।
समोदा गांव उस समय प्रदेशभर में चर्चा में आया था, जब सरपंच अरुण गौतम ने गांव में अफीम की खेती होने की शिकायत प्रशासन और पुलिस से की थी। इस मामले में बीजेपी नेता विनायक ताम्रकार के खिलाफ कार्रवाई हुई थी और पुलिस ने उन्हें गिरफ्तार भी किया था। बताया जा रहा है कि अरुण गौतम और विनायक ताम्रकार के बीच लंबे समय से विवाद चला आ रहा था।
इसी विवाद के बीच विनायक ताम्रकार की ओर से अरुण गौतम पर चुनावी हलफनामे में जानकारी छिपाने का आरोप लगाया गया था। मामला तब और गंभीर हो गया जब पंचायत चुनाव में दूसरे स्थान पर रहीं प्रत्याशी भुवनेश्वरी देशमुख ने एसडीएम कोर्ट में याचिका दायर कर दी।
याचिका में आरोप लगाया गया कि पंचायत चुनाव 2025 के दौरान अरुण गौतम ने अपने खिलाफ दर्ज हत्या के प्रयास (धारा 307) समेत अन्य आपराधिक मामलों का उल्लेख हलफनामे में नहीं किया। प्रारंभिक स्तर पर रिटर्निंग अधिकारी ने आपत्ति खारिज कर दी थी, लेकिन बाद में मामला हाईकोर्ट पहुंचा। हाईकोर्ट के निर्देश पर प्रकरण की दोबारा सुनवाई एसडीएम कोर्ट में हुई।
सुनवाई के दौरान दस्तावेजों की जांच में यह स्पष्ट हुआ कि अरुण गौतम के खिलाफ दुर्ग कोर्ट में गंभीर आपराधिक मामला लंबित था, जिसे उन्होंने चुनावी शपथ पत्र में छिपाया था। कोर्ट ने इसे चुनाव नियमों का उल्लंघन मानते हुए उनका निर्वाचन निरस्त कर दिया और समोदा पंचायत का सरपंच पद रिक्त घोषित कर दिया।
हालांकि याचिकाकर्ता भुवनेश्वरी देशमुख ने खुद को निर्वाचित घोषित करने की मांग की थी, लेकिन कोर्ट ने इसे स्वीकार नहीं किया। कोर्ट ने कहा कि अरुण गौतम को 869 वोट मिले थे, जबकि भुवनेश्वरी देशमुख को 741 मत प्राप्त हुए थे। इतने बड़े अंतर के कारण दूसरे स्थान पर रहे प्रत्याशी को सीधे विजेता घोषित करना उचित नहीं होगा। कोर्ट ने जनपद पंचायत दुर्ग के सीईओ को राज्य निर्वाचन आयोग को रिपोर्ट भेजने के निर्देश दिए हैं, ताकि समोदा पंचायत में जल्द उपचुनाव कराया जा सके।