ईरान तनाव और कच्चे तेल की कीमतों में उछाल से भारतीय मुद्रा पर दबाव, पेट्रोल-डीजल से लेकर इलेक्ट्रॉनिक्स तक महंगे होने के संकेत
अमेरिकी डॉलर के मुकाबले भारतीय रुपया मंगलवार को 19 पैसे टूटकर 95.50 के ऐतिहासिक निचले स्तर पर पहुंच गया। मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव और कच्चे तेल की कीमतों में उछाल के बीच रुपये पर दबाव लगातार बढ़ रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि डॉलर की मजबूती और विदेशी निवेशकों की निकासी से आने वाले दिनों में महंगाई और बढ़ सकती है।
मुंबई (ए)। वैश्विक बाजार में बढ़ती अनिश्चितता और मिडिल ईस्ट तनाव के असर से भारतीय रुपया लगातार कमजोर होता जा रहा है। मंगलवार को रुपया अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 19 पैसे गिरकर 95.50 के रिकॉर्ड निचले स्तर पर पहुंच गया। इससे पहले सोमवार को रुपया 95.31 पर बंद हुआ था। बीते सप्ताह भी रुपये ने 95.43 का स्तर छुआ था, लेकिन अब यह नया रिकॉर्ड लो दर्ज कर चुका है।
जानकारों के अनुसार अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump के हालिया बयान के बाद ईरान के साथ संघर्ष विराम को लेकर अनिश्चितता बढ़ी है। इससे अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल आया है। ब्रेंट क्रूड ऑयल 105 डॉलर प्रति बैरल के पार निकल गया है, जिसका सीधा असर भारतीय अर्थव्यवस्था पर पड़ रहा है। भारत अपनी जरूरत का करीब 80 प्रतिशत कच्चा तेल आयात करता है। ऐसे में तेल महंगा होने से देश का आयात बिल बढ़ता है और डॉलर की मांग भी तेज हो जाती है। इसी वजह से रुपये पर लगातार दबाव बना हुआ है।
निवेशकों में बढ़ी चिंता
वैश्विक तनाव बढ़ने के बाद विदेशी निवेशक भारतीय शेयर बाजार से पैसा निकालकर सुरक्षित निवेश विकल्पों की ओर रुख कर रहे हैं। विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों की बिकवाली से डॉलर की मांग बढ़ी है, जबकि रुपये की वैल्यू कमजोर हुई है।
बढ़ सकता है व्यापार घाटा
कच्चे तेल की कीमतों में तेजी से भारत का करंट अकाउंट डेफिसिट (CAD) बढ़ने की आशंका भी गहरा गई है। आयात महंगा होने से व्यापार घाटा बढ़ सकता है, जिसका असर सीधे रुपये की स्थिति पर पड़ेगा।
आम आदमी पर पड़ेगा असर
डॉलर मजबूत होने और रुपये में गिरावट का असर आम लोगों की जेब पर भी दिखाई दे सकता है। पेट्रोल-डीजल, रसोई गैस, प्लास्टिक और अन्य पेट्रोकेमिकल उत्पाद महंगे हो सकते हैं। इसके अलावा मोबाइल, लैपटॉप और अन्य आयातित इलेक्ट्रॉनिक्स की कीमतों में भी बढ़ोतरी संभव है।
विदेश में पढ़ाई, यात्रा और इलाज कराने वाले लोगों को भी अब ज्यादा रुपए खर्च करने पड़ सकते हैं, क्योंकि डॉलर खरीदना पहले की तुलना में महंगा हो गया है।
सालभर से दबाव में रुपया
साल 2026 की शुरुआत से ही भारतीय मुद्रा दबाव में बनी हुई है। दिसंबर 2025 में पहली बार रुपया 90 के स्तर के पार गया था और अब यह 95.50 तक पहुंच चुका है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि वैश्विक तनाव और कच्चे तेल की कीमतों में तेजी बनी रही, तो रुपये पर दबाव आगे भी जारी रह सकता है।