सोना 1,654 रुपए और चांदी 2,650 रुपए सस्ती; ऑलटाइम हाई से अब तक भारी गिरावट दर्ज
कीमती धातुओं के बाजार में इस सप्ताह गिरावट का रुख देखने को मिला। सोने और चांदी दोनों की कीमतों में कमी दर्ज की गई है। इंडिया बुलियन एंड ज्वेलर्स एसोसिएशन (IBJA) के आंकड़ों के अनुसार, सोना एक सप्ताह में 1,654 रुपए प्रति 10 ग्राम सस्ता हुआ है, जबकि चांदी की कीमत में 2,650 रुपए प्रति किलोग्राम की गिरावट आई है। विशेषज्ञ इसे मुनाफावसूली और वैश्विक बाजार के दबाव का असर मान रहे हैं।
नई दिल्ली (ए)। घरेलू सर्राफा बाजार में इस सप्ताह सोने और चांदी की कीमतों में गिरावट दर्ज की गई। इंडिया बुलियन एंड ज्वेलर्स एसोसिएशन (आईबीजेए) के ताजा आंकड़ों के अनुसार, 24 कैरेट सोने की कीमत में 1,654 रुपए प्रति 10 ग्राम की कमी आई है। इसके साथ ही सोना 1.58 लाख रुपए से घटकर लगभग 1.56 लाख रुपए प्रति 10 ग्राम के स्तर पर पहुंच गया है।
चांदी की कीमतों में भी नरमी देखने को मिली है। सप्ताह के दौरान चांदी 2,650 रुपए प्रति किलोग्राम सस्ती होकर 2.66 लाख रुपए से घटकर करीब 2.63 लाख रुपए प्रति किलोग्राम रह गई। बाजार विशेषज्ञों का कहना है कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मुनाफावसूली, निवेशकों की बदलती रणनीति और वैश्विक आर्थिक संकेतकों के कारण कीमती धातुओं में दबाव बना हुआ है।
इस वर्ष की शुरुआत में सोने ने निवेशकों को शानदार रिटर्न दिया था। 31 दिसंबर 2025 को सोने का भाव लगभग 1.33 लाख रुपए प्रति 10 ग्राम था, जो 29 जनवरी 2026 को बढ़कर 1.76 लाख रुपए के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया था। हालांकि इसके बाद बाजार में लगातार उतार-चढ़ाव देखने को मिला और अब सोना अपने उच्चतम स्तर से करीब 20 हजार रुपए प्रति 10 ग्राम नीचे कारोबार कर रहा है।
चांदी में भी इसी तरह का रुझान देखने को मिला। वर्ष के अंतिम दिन 2025 में चांदी का भाव 2.30 लाख रुपए प्रति किलोग्राम था, जो जनवरी 2026 में रिकॉर्ड 3.86 लाख रुपए प्रति किलोग्राम तक पहुंच गया। लेकिन उसके बाद आई गिरावट के चलते चांदी अब अपने सर्वोच्च स्तर से करीब 1.23 लाख रुपए प्रति किलोग्राम नीचे आ चुकी है।
विशेषज्ञों का मानना है कि वैश्विक आर्थिक परिस्थितियों, डॉलर की चाल, ब्याज दरों और निवेशकों की जोखिम लेने की क्षमता का सीधा असर कीमती धातुओं की कीमतों पर पड़ रहा है। आने वाले दिनों में अंतरराष्ट्रीय बाजार के संकेतों के आधार पर सोना और चांदी दोनों में उतार-चढ़ाव जारी रह सकता है।
निवेशकों को सलाह दी जा रही है कि वे बाजार की मौजूदा परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए दीर्घकालिक दृष्टिकोण के साथ निवेश संबंधी निर्णय लें।