सरकार नई गोल्ड मोनेटाइजेशन स्कीम की तैयारी में, सराफा व्यापारियों को बनाया जा सकता है कलेक्शन पार्टनर
देश में घरों और मंदिरों में रखे निष्क्रिय सोने को अर्थव्यवस्था से जोड़ने की दिशा में सरकार बड़ा कदम उठाने की तैयारी में है। प्रस्तावित नई गोल्ड मोनेटाइजेशन स्कीम के तहत अब लोग अपना सोना बैंकों के साथ-साथ ज्वेलर्स के पास भी जमा कर सकेंगे, जिस पर ब्याज का लाभ मिलने की संभावना है।
नई दिल्ली (ए)। सरकार जल्द ही गोल्ड मोनेटाइजेशन स्कीम के नए स्वरूप का ऐलान कर सकती है। प्रस्तावित योजना के तहत सराफा व्यापारियों को भी ‘कलेक्शन पार्टनर’ के रूप में शामिल करने की तैयारी की जा रही है। इसके लागू होने के बाद आम लोग अपने घरों में रखा सोना ज्वेलर्स के पास जमा कर सकेंगे और उस पर ब्याज का लाभ भी प्राप्त कर सकेंगे।
जानकारी के अनुसार, इस योजना में जमा किए गए सोने पर 2.5 प्रतिशत तक ब्याज मिलने की संभावना है। अब तक सोना जमा करने की सुविधा मुख्य रूप से बैंकों तक सीमित थी, लेकिन नए ढांचे के जरिए इसके दायरे को बढ़ाने की तैयारी की जा रही है।
सराफा कारोबार से जुड़े संगठनों का मानना है कि ज्वेलर्स को योजना से जोड़ने पर घरों में वर्षों से रखा सोना तेजी से बाजार में आएगा। इससे बड़ी मात्रा में सोने का उपयोग आर्थिक गतिविधियों में किया जा सकेगा और देश की आयात निर्भरता कम हो सकती है।
अनुमान है कि यदि भारतीय परिवारों के पास मौजूद कुल सोने का छोटा हिस्सा भी इस योजना में शामिल होता है, तो इससे बड़ी मात्रा में पूंजी बाजार में आ सकती है। विशेषज्ञों के मुताबिक इससे सोने के आयात पर खर्च कम होने के साथ विदेशी मुद्रा की बचत और रुपये को मजबूती मिलने में मदद मिल सकती है।
रिपोर्टों के अनुसार, भारतीय घरों और मंदिरों में बड़ी मात्रा में सोना सुरक्षित रखा गया है। भारत दुनिया के सबसे बड़े सोना उपभोक्ता देशों में शामिल है और हर साल बड़ी मात्रा में सोने का आयात करता है। ऐसे में सरकार की यह पहल सोने को निष्क्रिय संपत्ति से उत्पादक संसाधन में बदलने की दिशा में अहम कदम मानी जा रही है।