एथेनॉल ब्लेंडिंग पर बढ़ते सवालों के बीच सरकार का पक्ष; सुप्रीम कोर्ट में प्रयोगात्मक प्रक्रिया होने की बात भी रखी गई थी
पेट्रोल में एथेनॉल मिश्रण को लेकर उठ रहे सवालों और विवाद के बीच केंद्र सरकार ने स्पष्ट किया है कि E-20 योजना किसी जल्दबाजी में लागू नहीं की गई। सरकार का कहना है कि यह प्रक्रिया लंबे वैज्ञानिक परीक्षण, चरणबद्ध अध्ययन और अंतरराष्ट्रीय मानकों के आधार पर लागू की गई है।
नई दिल्ली (ए)। देश में पेट्रोल में एथेनॉल मिश्रण को लेकर जारी बहस के बीच केंद्र सरकार ने E-20 ईंधन को सुरक्षित और वैज्ञानिक प्रक्रिया का हिस्सा बताया है। सरकार ने कहा कि एथेनॉल ब्लेंडिंग का फैसला अचानक नहीं लिया गया, बल्कि इसे चरणबद्ध तरीके से व्यापक परीक्षण और विशेषज्ञों की जांच के बाद लागू किया गया है। सरकार के अनुसार इस प्रक्रिया से वाहनों को किसी प्रकार के बड़े नुकसान की आशंका नहीं है।
दिल्ली में एथेनॉल ब्लेंडिंग को लेकर आयोजित इंडस्ट्री एक्सपर्ट्स की प्रेस कॉन्फ्रेंस में सरकार की ओर से शामिल विशेषज्ञ वर्तिका शुक्ला ने कहा कि एथेनॉल मिश्रण को लेकर भारत ने वैश्विक स्तर पर अपनाई जा रही प्रक्रिया का अनुसरण किया है। उन्होंने बताया कि इस प्रणाली को लागू करने से पहले विभिन्न प्रमुख एजेंसियों द्वारा तकनीकी परीक्षण और अध्ययन किए गए हैं।
उन्होंने जानकारी दी कि वर्ष 2013-14 के दौरान देश में पेट्रोल में केवल 1.5 प्रतिशत एथेनॉल मिश्रण किया जाता था, लेकिन अब इस कार्यक्रम के तहत 20 प्रतिशत एथेनॉल मिश्रण यानी E-20 लागू किया जा रहा है। निर्धारित लक्ष्य के अनुसार इसे वर्ष 2030 तक हासिल किया जाना था, लेकिन सरकार ने यह लक्ष्य तय समय से करीब पांच वर्ष पहले दिसंबर 2025 तक पूरा कर लिया है।
हालांकि इस मुद्दे पर हाल ही में सुप्रीम कोर्ट में सरकार का एक अलग पक्ष भी सामने आया था। कुछ दिन पहले अदालत में सरकार ने कहा था कि पेट्रोल में 20 प्रतिशत एथेनॉल मिश्रण की प्रक्रिया अभी अध्ययन और प्रयोग के चरण में है तथा इसके पूर्ण प्रभावों का आकलन अगले वर्ष तक स्पष्ट हो सकेगा।
एथेनॉल ब्लेंडिंग को सरकार ईंधन आयात पर निर्भरता कम करने, पर्यावरण संरक्षण और किसानों की आय बढ़ाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल मान रही है, हालांकि इस पर तकनीकी और व्यावहारिक प्रभावों को लेकर चर्चा अभी भी जारी है।