बारिश के मौसम में नमी, सीलन और संक्रमण बढ़ाते हैं फेफड़ों की बीमारी का जोखिम; विशेषज्ञ ने बताए शुरुआती लक्षण और बचाव के प्रभावी उपाय
बारिश का मौसम जहां गर्मी से राहत देता है, वहीं कई संक्रामक बीमारियों का खतरा भी साथ लेकर आता है। इनमें निमोनिया सबसे गंभीर बीमारियों में शामिल है, जो बच्चों, बुजुर्गों और कमजोर प्रतिरक्षा क्षमता वाले लोगों के लिए जानलेवा साबित हो सकता है। विशेषज्ञों का कहना है कि मानसून में थोड़ी सी लापरवाही भी फेफड़ों के संक्रमण को गंभीर रूप दे सकती है, इसलिए शुरुआती लक्षणों की पहचान और समय पर उपचार बेहद जरूरी है।
नई दिल्ली (ए)। मानसून के मौसम में वातावरण में बढ़ी नमी, तापमान में लगातार बदलाव और घरों में सीलन के कारण श्वसन संबंधी बीमारियों का खतरा काफी बढ़ जाता है। इन्हीं बीमारियों में निमोनिया सबसे गंभीर माना जाता है, जो समय पर इलाज न मिलने पर जानलेवा भी साबित हो सकता है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार बारिश के दिनों में बच्चों, बुजुर्गों और कमजोर प्रतिरक्षा क्षमता वाले लोगों को विशेष सतर्क रहने की आवश्यकता होती है।
साल 2022 में भारत में हुई मल्टीसेंटर ‘SWORD’ स्टडी के अनुसार, मानसून के दौरान रेस्पिरेटरी ट्रैक्ट संक्रमण के मामलों में उल्लेखनीय वृद्धि देखी जाती है। जहां गर्मियों में ऐसे संक्रमण के मामले करीब 4 प्रतिशत रहते हैं, वहीं बारिश के मौसम में यह आंकड़ा बढ़कर लगभग 13 प्रतिशत तक पहुंच जाता है। वहीं इंडियन जर्नल ऑफ चेस्ट डिजीज एंड अलाइड साइंस में प्रकाशित एक अध्ययन के मुताबिक, लंबे समय तक बारिश में भीगे रहने या गीले कपड़ों में रहने से निमोनिया का खतरा बढ़ सकता है।
अपोलो स्पेक्ट्रा हॉस्पिटल, कानपुर के पल्मोनोलॉजी विशेषज्ञ डॉ. संदीप कटियार के अनुसार, निमोनिया फेफड़ों का गंभीर संक्रमण है, जिसमें फेफड़ों में सूजन आ जाती है और उनमें पानी या पस भर सकती है। इससे शरीर को पर्याप्त ऑक्सीजन नहीं मिल पाती और मरीज को सांस लेने में कठिनाई होने लगती है। यह संक्रमण बैक्टीरिया, वायरस या फंगस की वजह से हो सकता है। कई बार सामान्य सर्दी, खांसी, फ्लू या श्वसन संक्रमण का समय पर उपचार नहीं होने पर यही बीमारी निमोनिया का रूप ले लेती है।
निमोनिया के शुरुआती लक्षण
लगातार तेज बुखार और ठंड लगना।
लगातार खांसी, जिसमें बलगम भी आ सकता है।
सांस लेने में तकलीफ या सीने में जकड़न।
सीने में दर्द, खासकर खांसते समय।
अत्यधिक कमजोरी और थकान।
बच्चों और बुजुर्गों में सुस्ती, भ्रम या भूख कम लगना।
मानसून में बचाव के लिए अपनाएं ये 11 सावधानियां
बारिश में भीगने के बाद तुरंत सूखे कपड़े पहनें।
गीले कपड़ों में लंबे समय तक न रहें।
घर में सीलन और फंगस को पनपने न दें।
नियमित रूप से हाथ धोएं और व्यक्तिगत स्वच्छता बनाए रखें।
संतुलित और पौष्टिक भोजन लें।
पर्याप्त मात्रा में पानी पीते रहें।
भीड़भाड़ और संक्रमित लोगों से दूरी रखें।
धूम्रपान और प्रदूषण से बचें।
डॉक्टर की सलाह के अनुसार फ्लू और निमोनिया के टीके लगवाएं।
सर्दी-खांसी या बुखार को नजरअंदाज न करें।
सांस लेने में तकलीफ, तेज बुखार या लगातार खांसी होने पर तुरंत चिकित्सक से संपर्क करें।
विशेषज्ञों का कहना है कि मानसून में थोड़ी सतर्कता और समय पर इलाज से निमोनिया जैसी गंभीर बीमारी से काफी हद तक बचा जा सकता है। शुरुआती लक्षण दिखाई देने पर स्वयं दवा लेने के बजाय डॉक्टर की सलाह लेना सबसे सुरक्षित विकल्प है।