दिवालिया प्रक्रिया के बाद से बंद है वेतन भुगतान, कई कर्मचारियों पर बढ़ा कर्ज; एकमुश्त बकाया मिलने की उम्मीद में जारी है प्लांट पहुंचने का सिलसिला
भिलाई स्थित जेपी सीमेंट प्लांट में दिवालिया प्रक्रिया शुरू होने के बाद पिछले 28 महीनों से कर्मचारियों को वेतन नहीं मिला है। आर्थिक तंगी, कर्ज और पारिवारिक जिम्मेदारियों के बावजूद करीब 130 कर्मचारी आज भी रोज प्लांट पहुंचकर अपनी उपस्थिति दर्ज करा रहे हैं। कर्मचारियों को भरोसा है कि कानूनी प्रक्रिया पूरी होने के बाद उनका वर्षों से लंबित वेतन और अन्य भुगतान एक साथ मिल जाएगा।
दुर्ग-भिलाई। भिलाई के जेपी सीमेंट प्लांट में कार्यरत कर्मचारियों का संघर्ष लगातार गहराता जा रहा है। लगभग ढाई साल से वेतन नहीं मिलने के बावजूद करीब 130 कर्मचारी रोजाना प्लांट पहुंचकर अपनी उपस्थिति दर्ज करा रहे हैं। इसके बाद वे परिवार का खर्च चलाने के लिए कोई दूसरा काम करने निकल जाते हैं। कर्मचारियों का कहना है कि उन्हें अब भी उम्मीद है कि दिवालिया प्रक्रिया पूरी होने के बाद उनका वर्षों से लंबित वेतन और अन्य बकाया राशि एकमुश्त मिल जाएगी।
हाल ही में प्लांट के सुपरवाइजर पुष्पेंद्र परमार की आत्महत्या के बाद कर्मचारियों की आर्थिक और मानसिक स्थिति एक बार फिर चर्चा में आ गई है। लंबे समय से वेतन नहीं मिलने के कारण अधिकांश कर्मचारी गंभीर वित्तीय संकट का सामना कर रहे हैं।
जेपी सीमेंट कंपनी 18 अक्टूबर 2025 से कॉर्पोरेट इनसॉल्वेंसी रिजॉल्यूशन प्रोसेस (सीआईआरपी) के तहत है। कंपनी के प्रबंधन की जिम्मेदारी अंतरिम समाधान पेशेवर (आईआरपी) आशुतोष खेमानी के पास है। दिवालिया प्रक्रिया लागू होने के साथ ही कंपनी का पुराना निदेशक मंडल भंग कर दिया गया और सभी प्रशासनिक अधिकार आईआरपी को सौंप दिए गए।
प्लांट के वर्तमान यूनिट हेड पी.के. सिंह ने बताया कि दिवालिया प्रक्रिया शुरू होने के बाद पुराने प्रबंधन के पास किसी प्रकार का प्रशासनिक या वित्तीय निर्णय लेने का अधिकार नहीं बचा है। कर्मचारियों को न तो औपचारिक रूप से काम पर आने से रोका गया और न ही उन्हें सेवा से मुक्त किया गया। इसी कारण कर्मचारी प्रतिदिन प्लांट पहुंचकर अपनी उपस्थिति दर्ज कराते हैं।
करीब 150 नियमित कर्मचारियों में से अधिकांश आजीविका चलाने के लिए छोटे-मोटे रोजगार कर रहे हैं। किसी ने बैंक से ऋण लिया है तो किसी ने क्रेडिट कार्ड के सहारे परिवार का खर्च उठाया है। कर्मचारियों के अनुसार प्रत्येक कर्मचारी का लगभग 10 से 15 लाख रुपए वेतन और अन्य भुगतान बकाया है। पहले उनका मासिक वेतन 30 से 40 हजार रुपए के बीच था, लेकिन लंबे समय से आय बंद होने के कारण कई परिवार आर्थिक संकट में हैं।
जानकारी के अनुसार कंपनी पर करीब 100 करोड़ रुपए की देनदारियां थीं, जिसके बाद राष्ट्रीय कंपनी कानून न्यायाधिकरण (एनसीएलटी) के आदेश पर दिवालिया प्रक्रिया शुरू की गई। वर्तमान में कंपनी की संपत्तियों, देनदारियों और दावों की जांच जारी है।
कर्मचारियों का कहना है कि कठिन परिस्थितियों के बावजूद उन्होंने उम्मीद नहीं छोड़ी है। उन्हें विश्वास है कि कानूनी प्रक्रिया पूरी होने के बाद उनका बकाया वेतन और अन्य देय भुगतान मिलेगा। फिलहाल वे इसी भरोसे के साथ रोजाना प्लांट पहुंचकर अपनी उपस्थिति दर्ज करा रहे हैं।