तीन दिन तक चलेगी एमपीसी की बैठक, 5 अगस्त को गवर्नर करेंगे फैसलों का ऐलान
नई दिल्ली (ए)। भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) की मौद्रिक नीति समिति (MPC) की तीन दिवसीय बैठक सोमवार से शुरू हो गई है। बाजार और अर्थशास्त्रियों का अनुमान है कि केंद्रीय बैंक इस बार रेपो रेट में कोई बदलाव नहीं करेगा और इसे मौजूदा स्तर 5.25 प्रतिशत पर बरकरार रख सकता है। महंगाई के रुझान, कच्चे तेल की कीमतों और वैश्विक आर्थिक अनिश्चितताओं को देखते हुए आरबीआई के सतर्क रुख अपनाने की संभावना जताई जा रही है।
जून की बैठक में भी दरें थीं स्थिर
आरबीआई ने वित्त वर्ष 2026-27 की दूसरी मौद्रिक नीति समीक्षा जून में की थी, जिसमें रेपो रेट को 5.25 प्रतिशत पर यथावत रखा गया था। हालांकि, महंगाई के अनुमान को बढ़ाकर 5.1 प्रतिशत कर दिया गया था। चालू वित्त वर्ष में एमपीसी की कुल छह बैठकें प्रस्तावित हैं और यह तीसरी समीक्षा बैठक है।
महंगाई और वैश्विक संकेतों पर नजर
विशेषज्ञों का मानना है कि कच्चे तेल की ऊंची कीमतें, मौसम से जुड़े जोखिम और अमेरिकी फेडरल रिजर्व की सख्त मौद्रिक नीति के बावजूद आरबीआई फिलहाल ब्याज दरों में बदलाव करने से बच सकता है। केंद्रीय बैंक का ध्यान घरेलू महंगाई, तरलता प्रबंधन और आर्थिक वृद्धि के संतुलन पर केंद्रित रहने की उम्मीद है।
दिसंबर में 25 बेसिस पॉइंट बढ़ोतरी की संभावना
बाजार विश्लेषकों के अनुसार यदि महंगाई का दबाव बना रहा, तो दिसंबर की मौद्रिक नीति समीक्षा में रेपो रेट में 25 बेसिस पॉइंट की बढ़ोतरी की जा सकती है। पेट्रोल-डीजल की कीमतों में वृद्धि और मौसम संबंधी प्रभावों के कारण खुदरा एवं थोक महंगाई पर दबाव बना हुआ है, जिससे पूरे वर्ष के लिए उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (CPI) लगभग 4.9 प्रतिशत रहने का अनुमान है।
रेपो रेट से कैसे प्रभावित होती है अर्थव्यवस्था
रेपो रेट वह दर होती है जिस पर आरबीआई वाणिज्यिक बैंकों को अल्पकालिक ऋण उपलब्ध कराता है। जब महंगाई बढ़ती है, तो आरबीआई रेपो रेट बढ़ाकर बाजार में नकदी प्रवाह कम करने का प्रयास करता है। इससे बैंकों के लिए ऋण महंगा हो जाता है और ग्राहकों को मिलने वाले होम, वाहन व अन्य ऋणों की ब्याज दरें भी बढ़ जाती हैं।
वहीं आर्थिक गतिविधियों को गति देने के लिए आरबीआई रेपो रेट घटाता है, जिससे बैंकों को सस्ता ऋण मिलता है और आम लोगों व उद्योगों के लिए कर्ज लेना आसान हो जाता है। इसी माध्यम से केंद्रीय बैंक महंगाई और आर्थिक विकास के बीच संतुलन बनाए रखने की कोशिश करता है।