साझेदारी फर्म में निवेश कराने के बाद फर्जी हस्ताक्षरों से बाहर दिखाने का आरोप; RTI से सामने आया कथित फर्जीवाड़ा
रायपुर में कारोबारी साझेदारी के नाम पर परिवार के भीतर कथित ठगी का बड़ा मामला सामने आया है। अधिराज ग्रुप से जुड़े कारोबारी पर अपनी बहन और जीजा को दोगुना मुनाफा दिलाने का भरोसा देकर करीब 1.25 करोड़ रुपए निवेश कराने और बाद में फर्जी दस्तावेजों के जरिए उन्हें फर्म से बाहर दिखाने का आरोप लगा है। शिकायत के आधार पर तेलीबांधा थाना पुलिस ने धोखाधड़ी, जालसाजी और कूटरचना से संबंधित धाराओं में मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।
रायपुर। तेलीबांधा थाना क्षेत्र में अधिराज ग्रुप से जुड़े कारोबारी के खिलाफ परिवार के सदस्यों से कथित आर्थिक धोखाधड़ी का मामला दर्ज किया गया है। शिकायतकर्ता शिवांगी गर्ग ने आरोप लगाया है कि उनके भाई शुभम सिंघल और भाभी जया सिंघल ने कारोबार में साझेदारी और दोगुना लाभ दिलाने का झांसा देकर उनसे और उनके पति से करीब 1.25 करोड़ रुपए का निवेश कराया।
पुलिस के अनुसार नागपुर निवासी शिवांगी गर्ग पेशे से मनोवैज्ञानिक काउंसलर हैं। उन्होंने अपनी शिकायत में बताया कि शुभम सिंघल रायपुर में पहले अधिराज सीमेंट और बाद में अधिराज ट्रेडलिंक नाम से साझेदारी फर्म संचालित करते थे। वर्ष 2020 में कारोबार विस्तार का हवाला देकर नकद और बैंकिंग माध्यम से अलग-अलग चरणों में निवेश कराया गया। शुरुआती दौर में विश्वास बनाए रखने के लिए मुनाफे के नाम पर कुछ राशि उनके खाते में भेजी जाती रही।
रकम मांगने पर बनाया पार्टनर
शिकायत के अनुसार जब निवेश की राशि वापस मांगी गई तो 4 अप्रैल 2025 को शिवांगी गर्ग और उनके पति को दोनों फर्मों में भागीदार बनाया गया। आरोप है कि उसी दिन शुभम सिंघल ने स्वयं साझेदारी से इस्तीफा दे दिया और इसके बाद लाभांश का भुगतान बंद कर दिया गया। जनवरी 2026 में रायपुर में हुई पारिवारिक बैठक में रकम लौटाने का आश्वासन भी दिया गया, लेकिन भुगतान नहीं किया गया।
RTI से खुला कथित फर्जीवाड़ा
पीड़िता ने रजिस्ट्रार ऑफ फर्म्स से सूचना के अधिकार (RTI) के तहत दस्तावेज प्राप्त किए। दस्तावेजों की जांच में सामने आया कि 6 मार्च और 6 अप्रैल 2026 की पार्टनरशिप डीड में उनके कथित फर्जी हस्ताक्षर कर उन्हें दोनों फर्मों से रिटायर्ड दिखा दिया गया। शिवांगी गर्ग का दावा है कि इन दोनों तारीखों पर वह रायपुर में मौजूद ही नहीं थीं।
पुलिस ने शुरू की जांच
शिकायत के आधार पर तेलीबांधा थाना पुलिस ने भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 318(4), 336(3), 338 और 340(2) के तहत मामला दर्ज कर लिया है। पुलिस अब दस्तावेजों की जांच, हस्ताक्षरों के सत्यापन और आर्थिक लेनदेन से जुड़े साक्ष्यों के आधार पर पूरे प्रकरण की पड़ताल कर रही है।