1 सितंबर से देशभर में ‘क्या बोलती पब्लिक’ अभियान, युवाओं से संवाद और सदस्यता अभियान पर फोकस
नई दिल्ली (ए)। सोशल मीडिया से चर्चा में आई ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ यानी CJP ने फिलहाल चुनावी राजनीति में उतरने से इनकार किया है। संगठन ने 35 वर्ष से कम उम्र के 12 युवाओं की कोर टीम बनाकर अपनी आगे की रणनीति तय कर दी है। टीम में पत्रकार, वकील, CA, इंजीनियर और पब्लिक पॉलिसी से जुड़े लोग शामिल हैं। CJP अब राजनीतिक दल के बजाय प्रेशर ग्रुप के रूप में काम करेगी और शिक्षा, रोजगार, भ्रष्टाचार तथा सरकारी संस्थाओं की जवाबदेही जैसे मुद्दों पर सरकार को घेरने की तैयारी में है।
सोशल मीडिया के सटायर से बनेगा देशव्यापी अभियान
‘कॉकरोच जनता पार्टी’ नाम की शुरुआत एक सटायर सोशल मीडिया पेज के रूप में हुई थी। कुछ ही समय में यह युवाओं के बीच चर्चा में आया और इसके बाद इसे जमीनी आंदोलन का रूप देने की कोशिश शुरू हुई।
5 अगस्त को छत्रपति संभाजी नगर में हुई बैठक में CJP की 12 सदस्यीय कोर टीम का ऐलान किया गया। संगठन के प्रमुख चेहरे अभिजीत दीपके ने साफ किया कि फिलहाल चुनाव लड़ना उनकी प्राथमिकता नहीं है।
उनका कहना है कि मौजूदा राजनीतिक परिस्थितियों में सीधे चुनावी मैदान में उतरने के बजाय जनता के मुद्दों पर सरकार पर दबाव बनाना ज्यादा जरूरी है।
कौन हैं CJP के 12 चेहरे?
CJP की टीम में अलग-अलग क्षेत्रों का अनुभव रखने वाले युवा शामिल हैं। अभिजीत दीपके संगठन के प्रमुख चेहरों में हैं। वे पत्रकारिता और राजनीतिक संचार से जुड़े रहे हैं और पहले आम आदमी पार्टी के साथ भी काम कर चुके हैं।
आशुतोष रांका को संगठन का ‘पॉलिसी मैन’ माना जा रहा है। IIT कानपुर और LSE से पढ़ाई कर चुके रांका शिक्षा, शासन और पर्यावरण से जुड़े मुद्दों पर काम कर चुके हैं।
पत्रकार सौरव दास को मुख्य प्रवक्ता की जिम्मेदारी दी गई है। वहीं रत्ना सिंह संगठन से जुड़े कानूनी मामलों को देख रही हैं।
टीम में CA योगेश इंगले और अंकित के अलावा पब्लिक पॉलिसी से जुड़ी वैष्णवी, इंजीनियर मल्लंगी, सामाजिक कार्यकर्ता दीपक, आफरीन, रोहन देशपांडे और अजिंक्य शिंदे भी शामिल हैं।
CJP का अगला बड़ा कदम क्या होगा?
संगठन ने ‘क्या बोलती पब्लिक’ नाम से देशव्यापी अभियान शुरू करने की घोषणा की है। 1 सितंबर से CJP के सदस्य अलग-अलग राज्यों का दौरा करेंगे। इस दौरान युवाओं से संवाद के साथ सदस्यता अभियान भी चलाया जाएगा।
संगठन शिक्षा व्यवस्था में सुधार, रोजगार, सरकारी संस्थाओं की जवाबदेही और युवाओं से जुड़े मुद्दों को प्रमुखता से उठाएगा।
इसके साथ ही जंतर-मंतर आंदोलन में सहयोग करने वाले राजनीतिक दलों और सामाजिक संगठनों से संपर्क बढ़ाने की योजना भी है।
पार्टी क्यों नहीं बनाना चाहती CJP?
CJP का तर्क है कि मौजूदा राजनीतिक माहौल में विपक्षी दलों पर केंद्रीय जांच एजेंसियों के इस्तेमाल और राजनीतिक दलों में टूट जैसे आरोप लगते रहे हैं। संगठन का मानना है कि ऐसे माहौल में सीधे चुनावी राजनीति में उतरने से उसका ज्यादातर समय राजनीतिक संघर्ष में निकल सकता है।
इसीलिए फिलहाल संगठन ने खुद को प्रेशर ग्रुप तक सीमित रखने का फैसला किया है।
प्रेशर ग्रुप के जरिए क्या करेगी CJP?
प्रेशर ग्रुप का उद्देश्य सीधे चुनाव लड़ना नहीं, बल्कि किसी मुद्दे पर सरकार और नीति निर्माताओं पर जनदबाव बनाना होता है।
CJP भी इसी मॉडल पर काम करने की तैयारी में है। उसका लक्ष्य युवाओं को जोड़ना, देशभर में संगठन का नेटवर्क तैयार करना और जनसमस्याओं को लेकर सरकार के सामने दबाव बनाना है।
2029 में किसे होगा फायदा?
CJP का भविष्य में राजनीतिक प्रभाव कितना होगा, यह उसके संगठन विस्तार और जनसमर्थन पर निर्भर करेगा। राजनीतिक विश्लेषकों के मुताबिक, अगर संगठन भविष्य में राजनीतिक दल बनता है तो उसके सामने सबसे बड़ी चुनौती विपक्षी वोटों के बंटवारे की होगी।
अगर CJP सरकार विरोधी वोटों में हिस्सेदारी बनाती है तो इसका असर मौजूदा विपक्षी दलों पर पड़ सकता है। वहीं यदि संगठन चुनावी राजनीति से बाहर रहकर मजबूत प्रेशर ग्रुप बनता है, तो उसके आंदोलन और अभियानों से सरकार पर राजनीतिक दबाव बढ़ सकता है।
फिलहाल CJP का लक्ष्य चुनाव जीतना नहीं, बल्कि अपना जनाधार तैयार करना है। आने वाले महीनों में देशभर में होने वाला सदस्यता अभियान यह तय करेगा कि सोशल मीडिया से शुरू हुआ यह प्रयोग कितना बड़ा जमीनी आंदोलन बन पाता है।