ठेका दिलाने और बकाया बिल पास कराने के एवज में 50 हजार रुपये रिश्वत मांगने का आरोप; स्पेशल कोर्ट ने तीन दिन की सीबीआई रिमांड मंजूर की
दुर्ग-भिलाई। चरोदा स्थित रेलवे के पीपी यार्ड में केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) ने कथित रिश्वतखोरी के मामले में बड़ी कार्रवाई करते हुए रायपुर रेल मंडल के सीनियर डिविजनल मैकेनिकल इंजीनियर (सीनियर डीएमई) अनमोल उइके को गिरफ्तार किया। आरोप है कि उन्होंने एक रेलवे ठेकेदार से नया ठेका दिलाने और पुराने कार्यों के लंबित बिलों का भुगतान कराने के बदले 50 हजार रुपये की रिश्वत मांगी थी। शिकायत की पुष्टि के बाद सीबीआई ने ट्रैप कार्रवाई कर आरोपी अधिकारी को रंगे हाथ पकड़ लिया। स्पेशल कोर्ट ने उन्हें तीन दिन की सीबीआई रिमांड पर भेज दिया है।
सीबीआई की टीम ने शुक्रवार को पीपी यार्ड स्थित सीनियर डीएमई कार्यालय में दबिश दी। बताया गया कि ठेकेदार दीपक वर्मा ने भ्रष्टाचार निरोधक शाखा में शिकायत दर्ज कराई थी कि नए कार्य का ठेका और पहले किए गए कामों के बकाया बिल पास कराने के बदले 50 हजार रुपये की मांग की जा रही है। प्रारंभिक जांच में शिकायत सही पाए जाने पर सीबीआई ने ट्रैप की योजना बनाई।

कार्रवाई के दौरान ठेकेदार को रासायनिक पदार्थ लगे नोटों से भरा लिफाफा देकर अधिकारी के पास भेजा गया। जैसे ही लिफाफा स्वीकार किया गया, सीबीआई टीम ने कार्यालय में प्रवेश कर कार्रवाई शुरू कर दी। जांच के दौरान अधिकारी के हाथ धुलवाए गए, जिनमें रासायनिक परीक्षण सकारात्मक बताया गया।
सूत्रों के अनुसार, कार्रवाई में दिल्ली, रायपुर और दुर्ग की संयुक्त सीबीआई टीम शामिल थी। टीम ने कार्यालय से टेंडर से संबंधित फाइलें, भुगतान अभिलेख, रजिस्टर, मोबाइल फोन, लैपटॉप और अन्य डिजिटल रिकॉर्ड जब्त किए हैं। इसके अलावा कुछ अन्य अधिकारियों के इलेक्ट्रॉनिक रिकॉर्ड की भी जांच की गई।
गुरुवार देर शाम शुरू हुई कार्रवाई शुक्रवार दोपहर तक चली। इसके बाद सीबीआई टीम आरोपी अधिकारी और ठेकेदार को रायपुर ले गई। रायपुर स्थित डब्ल्यूआरएस कॉलोनी में अधिकारी के आवास की भी तलाशी ली गई। बाद में दोनों को सीबीआई की विशेष अदालत में पेश किया गया, जहां अदालत ने अनमोल उइके को तीन दिन की सीबीआई रिमांड पर भेज दिया। इस दौरान उनसे रिश्वत मांगने, ठेका प्रक्रिया और बिल भुगतान से जुड़े पहलुओं पर पूछताछ की जाएगी।
रेलवे सूत्रों के अनुसार, चरोदा का पीपी यार्ड भिलाई इस्पात संयंत्र और एनएसपीसीएल के लिए आने वाली मालगाड़ियों के वैगनों की तकनीकी जांच और मरम्मत का प्रमुख केंद्र है। यहां होने वाले अधिकांश कार्य विभिन्न ठेकों के माध्यम से कराए जाते हैं, जिससे टेंडर और भुगतान प्रक्रिया महत्वपूर्ण मानी जाती है।
घटना की जानकारी मिलते ही रायपुर रेल मंडल के अधिकारियों और कर्मचारियों में हड़कंप मच गया। विशेष रूप से ठेका स्वीकृति और बिल भुगतान से जुड़े विभागों में मामले को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं। सीबीआई ने मामले में आधिकारिक बयान जारी नहीं किया है और जांच जारी है।