रक्षाबंधन पर मिठाई-पनीर खरीदते समय रहें सावधान; फूड एनालिस्ट ने LIVE TEST से समझाए तरीके, रंग-गंध से लेकर पैकिंग तक की बताई पहचान
रायपुर। रक्षाबंधन पर बाजारों में मिठाई, खोया, पनीर और घी की मांग बढ़ते ही मिलावट का खतरा भी बढ़ जाता है। ऐसे में मिठाई की चमक, स्वाद और कम कीमत देखकर खरीदारी करना भारी पड़ सकता है। दैनिक भास्कर ने फूड एंड ड्रग विभाग के फूड एनालिस्ट अखिलेश श्रीवास्तव के साथ मिलकर खाद्य पदार्थों की शुद्धता जांचने के कुछ LIVE TEST किए। एक्सपर्ट ने बताया कि आयोडीन टिंचर की मदद से घर पर ही खोया और पनीर में स्टार्च की शुरुआती जांच की जा सकती है। घी और मक्खन में भी स्टार्च की मौजूदगी का संकेत इसी तरह मिल सकता है। हालांकि घरेलू टेस्ट केवल प्राथमिक जांच हैं, अंतिम पुष्टि प्रयोगशाला परीक्षण से ही होती है।
खोया-पनीर में स्टार्च ऐसे पकड़ें
फूड एनालिस्ट के मुताबिक पनीर या खोये की थोड़ी मात्रा लेकर उसे पानी में गर्म करें और फिर ठंडा होने दें। इसके बाद आयोडीन टिंचर की 2 से 3 बूंद डालें। यदि मिश्रण का रंग नीला या नीला-काला हो जाए तो उसमें स्टार्च की मौजूदगी का संकेत हो सकता है।
मिलावट में कॉर्न स्टार्च, अरारोट या आलू जैसे स्टार्चयुक्त पदार्थों का इस्तेमाल किया जा सकता है। इसलिए केवल इस टेस्ट के आधार पर किसी खाद्य पदार्थ को निश्चित रूप से मिलावटी घोषित नहीं करना चाहिए। संदेह होने पर खाद्य सुरक्षा विभाग की प्रयोगशाला में जांच कराना जरूरी है।

घी-मक्खन में भी कर सकते हैं प्राथमिक जांच
घी या मक्खन की करीब आधा चम्मच मात्रा पारदर्शी कटोरी में लें। इसमें आयोडीन टिंचर की 2 से 3 बूंद डालें। यदि रंग नीला दिखाई देता है, तो स्टार्चयुक्त पदार्थ की मौजूदगी का संकेत मिल सकता है। हालांकि घी की शुद्धता जांचने के लिए केवल घरेलू आयोडीन टेस्ट पर्याप्त नहीं है। संदेह होने पर सैंपल की वैज्ञानिक जांच जरूरी है।
जरूरत से ज्यादा चमकीली मिठाई से रहें सावधान
मिठाई का रंग अगर जरूरत से ज्यादा चटख या असामान्य नजर आए तो सावधानी बरतनी चाहिए। इसी तरह तेज या अजीब गंध भी गुणवत्ता को लेकर सवाल खड़े कर सकती है। मिठाई खरीदते समय रंग, गंध, स्वाद और बनावट चारों चीजों पर ध्यान देना चाहिए।
जलेबी, लड्डू जैसी मिठाइयों में इस्तेमाल होने वाले रंगों को लेकर भी सावधानी जरूरी है। किसी संदिग्ध रासायनिक रंग की मौजूदगी की पुष्टि के लिए प्रयोगशाला परीक्षण जरूरी होता है। घर पर रसायनों और एसिड का इस्तेमाल कर ऐसे परीक्षण करने से बचना चाहिए।
दुकान की सफाई भी गुणवत्ता का संकेत
मिठाई खरीदते समय केवल कीमत और स्वाद ही न देखें। दुकान में सफाई की स्थिति, मिठाइयों को ढककर रखने की व्यवस्था और मक्खियों या धूल से बचाव भी देखें। खुली मिठाइयों पर मक्खियां बैठ रही हों, आसपास गंदगी हो या खाद्य सामग्री बिना ढके रखी हो तो ऐसी जगह से खरीदारी करने से बचना बेहतर है।
मिठाई पानी छोड़ रही है तो सावधान
रसगुल्ला, रबड़ी, कलाकंद और अन्य दूध से बनी मिठाइयों में अगर सामान्य से ज्यादा पानी अलग हो रहा हो, परतें टूट रही हों, दुर्गंध आ रही हो या फफूंदी दिखाई दे रही हो तो उसे न खरीदें। ऐसे बदलाव खाद्य पदार्थ की ताजगी या गुणवत्ता खराब होने का संकेत हो सकते हैं।
बहुत ज्यादा सफेद पनीर भी जांचें
पनीर का रंग बहुत ज्यादा सफेद होना अकेले उसकी शुद्धता की गारंटी नहीं है। खरीदते समय पनीर की गंध, बनावट और ताजगी भी देखें।
अगर पनीर असामान्य रूप से सख्त हो, अलग तरह की गंध आए या स्वाद सामान्य न लगे तो उसे खाने से बचें। पैक्ड पनीर में निर्माण तिथि, बेस्ट-बिफोर या यूज-बाय डेट जरूर देखें।
पैकेट पर FSSAI नंबर और डेट जरूर देखें
पैक्ड दूध, पनीर, घी या मिठाई खरीदते समय लेबल को ध्यान से पढ़ें। पैकेट पर FSSAI लोगो और लाइसेंस नंबर, बैच या लॉट नंबर, निर्माता की जानकारी, शुद्ध मात्रा और सामग्री की सूची देखें।
पैकेट फूला हुआ, फटा, लीक या क्षतिग्रस्त हो तो उसे न खरीदें। खरीदारी के बाद बिल जरूर लें, ताकि शिकायत की स्थिति में उसका रिकॉर्ड उपलब्ध रहे।
शिकायत करनी हो तो बिल संभालकर रखें
मिलावट या खराब गुणवत्ता का संदेह होने पर दुकान का नाम-पता, खरीद की तारीख, खाद्य पदार्थ का नाम और शिकायत का कारण दर्ज करें। पैकेट, लेबल, फोटो और बिल को सुरक्षित रखना उपयोगी रहेगा।
उपभोक्ता FSSAI के Food Safety Connect माध्यम से शिकायत दर्ज कर सकते हैं। छत्तीसगढ़ में खाद्य सुरक्षा विभाग के माध्यम से भी शिकायत की जा सकती है। शिकायत करते समय स्पष्ट रूप से खाद्य पदार्थ में मिलावट या खाद्य सुरक्षा से जुड़ी समस्या का उल्लेख करना चाहिए।
मिलावट पर कार्रवाई और सजा का प्रावधान
सीनियर एडवोकेट विराट वर्मा के मुताबिक खाद्य पदार्थों में मिलावट और असुरक्षित खाद्य सामग्री के मामलों में कानून के तहत कार्रवाई का प्रावधान है। मामले की प्रकृति और आरोपों के आधार पर आरोपी के खिलाफ जुर्माना और कारावास जैसी सजा हो सकती है। किसी विशेष मामले में लागू धाराएं और सजा न्यायालय द्वारा तथ्यों और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर तय की जाती है।