2026 में अब तक सोना करीब ₹28 हजार और चांदी ₹14 हजार महंगी; दिसंबर तक सोना ₹1.70 लाख और चांदी ₹3 लाख पहुंचने का अनुमान
नई दिल्ली (ए)। घरेलू सराफा बाजार में बुधवार को सोने की कीमत में हल्की गिरावट, जबकि चांदी में तेज उछाल दर्ज किया गया। इंडिया बुलियन एंड ज्वेलर्स एसोसिएशन (IBJA) के मुताबिक 24 कैरेट सोना 610 रुपए सस्ता होकर 1.61 लाख रुपए प्रति 10 ग्राम पर आ गया। दूसरी ओर चांदी की कीमत 2,299 रुपए बढ़कर 2.44 लाख रुपए प्रति किलो पहुंच गई। हालांकि मौजूदा भाव जनवरी के रिकॉर्ड स्तर से नीचे हैं, लेकिन इस साल दोनों कीमती धातुओं में अब तक बड़ी तेजी दर्ज हो चुकी है।
इस साल सोना करीब ₹28 हजार महंगा
31 दिसंबर 2025 को 24 कैरेट सोने की कीमत 1.33 लाख रुपए प्रति 10 ग्राम थी। अब यह बढ़कर करीब 1.61 लाख रुपए हो गई है। यानी साल की शुरुआत से सोने में लगभग 28 हजार रुपए की तेजी आ चुकी है।
चांदी भी 31 दिसंबर 2025 के 2.30 लाख रुपए प्रति किलो के मुकाबले अब 2.44 लाख रुपए पर पहुंच गई है। इस तरह चांदी में करीब 14 हजार रुपए की बढ़त हुई है।
इस साल 29 जनवरी को सोने ने 1.76 लाख रुपए प्रति 10 ग्राम और चांदी ने 3.86 लाख रुपए प्रति किलो का रिकॉर्ड स्तर छुआ था।
दिसंबर तक और महंगे हो सकते हैं सोना-चांदी
कोटक सिक्युरिटीज के सीनियर वीपी और कमोडिटी रिसर्च हेड अनिंद्य बनर्जी के मुताबिक वैश्विक स्तर पर सोने को केंद्रीय बैंकों की खरीदारी का भी समर्थन मिल रहा है। आरबीआई समेत कई केंद्रीय बैंक अपने भंडार में सोने की हिस्सेदारी बढ़ा रहे हैं।
उनका अनुमान है कि यदि वैश्विक परिस्थितियां चुनौतीपूर्ण बनी रहती हैं तो सोने की कीमतों में तेजी जारी रह सकती है। वहीं हालात सामान्य होने पर औद्योगिक मांग बढ़ने से चांदी को भी फायदा मिल सकता है। मौजूदा परिस्थितियों को देखते हुए दिसंबर तक सोना 1.70 लाख रुपए और चांदी 3 लाख रुपए प्रति किलो तक पहुंच सकती है।
गहना खरीदते समय इन 3 बातों का रखें ध्यान
1. BIS हॉलमार्क जरूर देखें: सोना खरीदते समय BIS हॉलमार्क वाला प्रमाणित आभूषण लें। हॉलमार्क से सोने की शुद्धता की जानकारी मिलती है।
2. कीमत और वजन की जांच करें: खरीदारी से पहले सोने का वजन और उस दिन का बाजार भाव अलग-अलग विश्वसनीय स्रोतों से जांच लें। 24, 22 और 18 कैरेट सोने के भाव अलग होते हैं।
3. मेकिंग चार्ज पर बात करें: आभूषण की कीमत में मेकिंग चार्ज भी जुड़ता है। यह हर ज्वेलर के यहां समान नहीं होता, इसलिए लेबर या मेकिंग चार्ज का पूरा ब्रेकअप मांगें और संभव हो तो मोलभाव करें।