समीक्षा बैठक में मंत्री यादव ने व्यवस्थाओं पर जताई नाराजगी; बोले- स्कूल को अपना समझें शिक्षक-प्राचार्य, बच्चों की पढ़ाई पर दें पूरा ध्यान
रायपुर। सरकारी स्कूलों की व्यवस्थाओं और शिक्षा की गुणवत्ता को लेकर शिक्षा मंत्री गजेंद्र यादव ने मंगलवार को अधिकारियों के सामने कई सवाल खड़े किए। पं. दीनदयाल उपाध्याय ऑडिटोरियम में हुई समीक्षा बैठक में मंत्री ने कहा कि स्कूलों की समस्याओं की जड़ केवल संसाधनों की कमी नहीं, बल्कि जिम्मेदारी की भावना का अभाव भी है। उन्होंने कहा कि कई शिक्षक और प्राचार्य स्कूल को अपना संस्थान नहीं मानते। शिक्षक अतिरिक्त जिम्मेदारी मिलने पर आंदोलन तक कराते हैं, जबकि कुछ प्राचार्यों का ध्यान बच्चों की पढ़ाई से ज्यादा अपने केबिन की व्यवस्था पर रहता है। मंत्री ने अधिकारियों को स्कूलों का नियमित निरीक्षण करने और विद्यार्थियों की समस्याओं को प्राथमिकता देने के निर्देश दिए।
स्कूल को अपना समझने की मानसिकता जरूरी
मंत्री यादव ने कहा कि स्कूलों में बच्चों की संख्या क्यों कम हो रही है, शौचालय खराब क्यों हैं और भवनों की स्थिति क्यों बिगड़ रही है, इस पर शिक्षक और प्राचार्य गंभीरता से विचार नहीं कर रहे हैं। उन्होंने अधिकारियों से कहा कि स्कूल केवल वेतन लेने की जगह नहीं, बल्कि बच्चों का भविष्य तैयार करने की जिम्मेदारी वाला संस्थान है।
उन्होंने कहा कि यदि शिक्षक और प्राचार्य स्कूल को अपना मानकर काम करें तो कई समस्याओं का समाधान स्थानीय स्तर पर ही हो सकता है।
प्राचार्य के बड़े केबिन पर मंत्री ने उठाए सवाल
मंत्री ने सरकारी स्कूलों के परिसर और कमरों के उपयोग का उदाहरण देते हुए कहा कि कई जगह स्कूल की बेहतर जगह और बड़े कमरे प्राचार्य या स्टाफ के उपयोग में हैं, जबकि बच्चों के लिए पर्याप्त व्यवस्था नहीं है।
उन्होंने गनियारी का उदाहरण देते हुए बताया कि वहां स्कूल की बाउंड्री करीब तीन एकड़ में फैली है। पुरानी स्कूल बिल्डिंग बंद पड़ी है और उसमें कचरा जमा है, जबकि नई बिल्डिंग के अच्छे कमरे प्राचार्य और स्टाफ के उपयोग में हैं।
तरीघाट के स्कूल का उदाहरण देते हुए उन्होंने बताया कि वहां बच्चों ने कक्षा नहीं लगने की बात कही। निरीक्षण के दौरान प्राचार्य का कमरा काफी बड़ा मिला। मंत्री ने कहा कि स्कूल के संसाधनों का उपयोग सबसे पहले विद्यार्थियों के हित में होना चाहिए।
शिक्षक आंदोलन कराते हैं, बोले मंत्री
मंत्री ने कहा कि स्कूलों में होने वाले कई आंदोलन वास्तविक समस्याओं के बजाय व्यवस्थागत दबाव बनाने के लिए कराए जाते हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि किसी शिक्षक को अतिरिक्त विषय पढ़ाने की जिम्मेदारी देने पर भी बच्चों को आंदोलन में आगे कर दिया जाता है।
उन्होंने कहा कि पुराने प्रभावशाली लोगों को हटाने या व्यवस्था में बदलाव करने पर भी विरोध शुरू हो जाता है। अधिकारियों से कहा कि वे केवल कागजी रिपोर्ट पर निर्भर न रहें, बल्कि स्वयं स्कूलों का निरीक्षण करें।
शौचालय और पानी की समस्या पर नाराजगी
मंत्री ने समग्र शिक्षा के माध्यम से मिलने वाली राशि के उपयोग पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि जब स्कूलों को पर्याप्त राशि उपलब्ध कराई जा रही है, इसके बावजूद बच्चे पानी और शौचालय जैसी बुनियादी सुविधाओं के लिए आंदोलन करें तो यह गंभीर स्थिति है।
उन्होंने अधिकारियों को उपलब्ध संसाधनों का बेहतर उपयोग करने के निर्देश दिए।
स्कूलों में मीडिया प्रवेश पर भी बोले
समीक्षा बैठक में मंत्री ने स्कूलों में मीडिया और यूट्यूब कंटेंट क्रिएटर्स के प्रवेश को लेकर भी टिप्पणी की। उन्होंने कहा कि बिना आवश्यकता किसी को स्कूल का पूरा परिसर दिखाने की जरूरत नहीं है। उनका कहना था कि स्कूल की व्यवस्थाओं को लेकर रिपोर्टिंग या निरीक्षण के दौरान अनावश्यक हस्तक्षेप से बचना चाहिए। मंत्री ने बाद में स्पष्ट किया कि उनका संदर्भ यूट्यूबर्स और पत्रकारों की अनावश्यक एंट्री से था।
छात्राओं को सेल्फ डिफेंस, स्कूलों में बैंड दल
मंत्री यादव ने हाई और हायर सेकेंडरी स्कूलों में बैंड दल बनाने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि इसके लिए जिला पुलिस बैंड की मदद ली जा सकती है। उन्होंने कहा कि खरीदे गए म्यूजिकल इंस्ट्रूमेंट केवल स्टोर में रखने के लिए नहीं हैं, उनका इस्तेमाल विद्यार्थियों की प्रतिभा निखारने में होना चाहिए। उन्होंने छात्राओं के लिए सेल्फ डिफेंस ट्रेनिंग अनिवार्य करने की बात भी कही।
शिक्षकों की कमी तक यूट्यूब से पढ़ाई
शिक्षकों की कमी को लेकर मंत्री ने पीएम ई-विद्या की व्यवस्था का उपयोग करने के निर्देश दिए। उन्होंने अधिकारियों से पूछा कि क्या सभी स्कूलों में पीएम ई-विद्या का उपयोग हो रहा है। मंत्री ने कहा कि जब तक नई शिक्षक भर्ती नहीं हो जाती, तब तक डिजिटल माध्यम से बच्चों की पढ़ाई प्रभावित नहीं होनी चाहिए। स्कूल आने वाला कोई भी बच्चा खाली न बैठे, उसे किसी न किसी माध्यम से पढ़ाई से जोड़ा जाए।
सरकारी स्कूलों में बढ़े बच्चे, मंत्री ने दी बधाई
मंत्री यादव ने कहा कि पिछले पांच वर्षों में पहली बार सरकारी स्कूलों में विद्यार्थियों की संख्या बढ़ी है। उन्होंने शिक्षकों और अधिकारियों को इसके लिए बधाई दी। गुजरात का उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा कि यदि वहां बच्चे सरकारी स्कूलों की ओर वापस आ सकते हैं तो छत्तीसगढ़ में भी यह बदलाव संभव है। उन्होंने स्कूलों में भोजन मंत्र जैसी गतिविधियों को बढ़ावा देने की बात कही और कहा कि इससे बच्चों में संस्कार विकसित करने में मदद मिलेगी।