विदेश मंत्रालय बोला- जम्मू-कश्मीर और लद्दाख समेत पूरा क्षेत्र आधिकारिक नक्शे के अनुसार दिखे; UN के इक्वल एरिया प्रोजेक्शन का किया समर्थन
नई दिल्ली (ए)। संयुक्त राष्ट्र में दुनिया को नए तरीके से मानचित्र पर दिखाने के प्रस्ताव के बीच भारत ने अपनी क्षेत्रीय अखंडता को लेकर स्थिति स्पष्ट कर दी है। विदेश मंत्रालय ने कहा कि जम्मू-कश्मीर और लद्दाख समेत भारत का पूरा संप्रभु क्षेत्र आधिकारिक भारतीय नक्शे के अनुरूप ही प्रदर्शित किया जाना चाहिए। भारत ने क्षेत्रफल के वास्तविक अनुपात को दर्शाने वाले नए मानचित्र प्रक्षेपण का समर्थन किया है, लेकिन इसे किसी खास नक्शे या सीमा-चित्र की मंजूरी नहीं माना जा सकता।
UN के प्रस्ताव के पक्ष में भारत ने दिया वोट
संयुक्त राष्ट्र महासभा ने शुक्रवार को दुनिया के मानचित्र को अधिक वास्तविक क्षेत्रफल के अनुपात में प्रदर्शित करने से जुड़े प्रस्ताव को मंजूरी दी। इसमें देशों और महाद्वीपों को उनके वास्तविक क्षेत्रफल के करीब दिखाने की अवधारणा को बढ़ावा दिया गया है। भारत ने इस प्रस्ताव के पक्ष में मतदान किया है। हालांकि, विदेश मंत्रालय ने स्पष्ट किया कि प्रस्ताव किसी एक मानचित्र, प्रोजेक्शन या देश की सीमाओं को स्वीकृति नहीं देता।
भारत की आपत्ति नक्शे में क्षेत्र दिखाने के तरीके पर
भारत ने कहा है कि नए प्रोजेक्शन को लेकर उसे कोई आपत्ति नहीं है। चिंता इस बात की है कि मानचित्र में भारत के क्षेत्र को कहीं गलत, अधूरा या भ्रामक तरीके से न दर्शाया जाए। मंत्रालय के मुताबिक जम्मू-कश्मीर और लद्दाख सहित भारत का पूरा क्षेत्र आधिकारिक भारतीय मानचित्र के अनुसार ही प्रदर्शित होना चाहिए।
जमीन और सीमाओं पर कोई असर नहीं
नए मानचित्र प्रक्षेपण से भारत के वास्तविक क्षेत्रफल या अंतरराष्ट्रीय सीमाओं में कोई बदलाव नहीं होगा। बदलाव सिर्फ पृथ्वी को सपाट नक्शे पर प्रस्तुत करने के तरीके में आएगा। भारत की आकृति कुछ अलग दिखाई दे सकती है और अन्य देशों की तुलना में उसका आकार पहले की अपेक्षा थोड़ा अलग नजर आ सकता है।
मर्केटर मैप में ध्रुवों के पास के इलाके बड़े
दुनिया में लंबे समय से मर्केटर प्रोजेक्शन का बड़े पैमाने पर इस्तेमाल होता रहा है। इसे 1569 में यूरोपीय मानचित्रकार जेरार्डस मर्केटर ने विकसित किया था। इसका प्रमुख उद्देश्य समुद्री यात्रा में दिशा और मार्ग को समझना आसान बनाना था। हालांकि, गोल पृथ्वी को सपाट सतह पर दिखाने के कारण इसमें भूमध्य रेखा से दूर स्थित क्षेत्र वास्तविक आकार से काफी बड़े दिखाई देते हैं।
नए प्रोजेक्शन में अफ्रीका का आकार ज्यादा वास्तविक
इक्वल एरिया प्रोजेक्शन में देशों और महाद्वीपों के क्षेत्रफल को अधिक वास्तविक अनुपात में दिखाने की कोशिश की जाती है। इसके चलते अफ्रीका पहले की तुलना में बड़ा दिखाई देगा, जबकि यूरोप और उत्तरी अमेरिका का आकार अपेक्षाकृत छोटा नजर आएगा। एशिया के कुछ हिस्सों की दृश्य प्रस्तुति में भी बदलाव हो सकता है।