EMI-बिल समय पर भरें, कार्ड लिमिट का कम इस्तेमाल करें; बार-बार लोन आवेदन और पुराने खाते बंद करने से बचें
नई दिल्ली (ए)। लोन या क्रेडिट कार्ड लेने के दौरान बैंक और वित्तीय संस्थान सबसे पहले ग्राहक की क्रेडिट हिस्ट्री और स्कोर देखते हैं। कमजोर स्कोर होने पर कर्ज मिलना मुश्किल हो सकता है या ब्याज दर अधिक हो सकती है। हालांकि, खराब क्रेडिट स्कोर को कुछ वित्तीय अनुशासन अपनाकर धीरे-धीरे बेहतर किया जा सकता है। समय पर भुगतान, सीमित क्रेडिट इस्तेमाल और सोच-समझकर नए कर्ज के लिए आवेदन जैसी आदतें क्रेडिट प्रोफाइल को मजबूत बनाने में मदद करती हैं।
1. EMI और बिल की तारीख न चूकें
क्रेडिट स्कोर को बेहतर रखने के लिए सबसे जरूरी है कि लोन की EMI और क्रेडिट कार्ड का भुगतान तय तारीख पर हो। भुगतान में देरी क्रेडिट हिस्ट्री पर नकारात्मक असर डाल सकती है। तारीख याद रखने के लिए ऑटो-पेमेंट या मोबाइल रिमाइंडर का इस्तेमाल किया जा सकता है।
2. कार्ड की पूरी लिमिट खर्च न करें
क्रेडिट कार्ड की उपलब्ध सीमा को लगातार ज्यादा इस्तेमाल करना आपकी वित्तीय स्थिति पर सवाल खड़े कर सकता है। इसे क्रेडिट यूटिलाइजेशन रेश्यो कहा जाता है। कुल लिमिट के मुकाबले जितना कम क्रेडिट इस्तेमाल किया जाएगा, सामान्य तौर पर प्रोफाइल उतनी बेहतर दिखाई देती है।
3. जरूरत पर ही नया कार्ड या लोन लें
हर ऑफर आकर्षक हो, यह जरूरी नहीं कि उसके लिए आवेदन भी किया जाए। नए क्रेडिट कार्ड या लोन के लिए आवेदन करने पर संबंधित संस्थान आपकी क्रेडिट रिपोर्ट देखता है। इसे हार्ड इंक्वायरी कहा जाता है। कम समय में कई हार्ड इंक्वायरी होने से क्रेडिट स्कोर पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है।
4. पुराने अच्छे रिकॉर्ड वाले खाते जल्द बंद न करें
लंबे समय से चल रहा ऐसा क्रेडिट अकाउंट, जिसका भुगतान रिकॉर्ड अच्छा है, क्रेडिट हिस्ट्री को मजबूत कर सकता है। पुराने कार्ड को बंद करने पर उपलब्ध कुल क्रेडिट लिमिट कम हो सकती है और इससे क्रेडिट यूटिलाइजेशन रेश्यो बढ़ सकता है। हालांकि, ज्यादा वार्षिक शुल्क या अन्य अनावश्यक लागत होने पर खाता बंद करने का फैसला किया जा सकता है।
5. क्रेडिट रिपोर्ट पर नजर रखें
क्रेडिट रिपोर्ट की समय-समय पर जांच करते रहना भी जरूरी है। इसमें लोन, क्रेडिट कार्ड, भुगतान का रिकॉर्ड और क्रेडिट इंक्वायरी जैसी जानकारी दर्ज होती है। अगर किसी ऐसे खाते, गलत बकाया, डुप्लीकेट एंट्री या अनधिकृत इंक्वायरी का पता चलता है जिसे आपने नहीं किया है, तो समय रहते शिकायत या विवाद दर्ज कराया जा सकता है।
स्कोर सुधारने का रास्ता अनुशासन से होकर गुजरता है
क्रेडिट स्कोर को मजबूत करने के लिए कोई त्वरित उपाय नहीं है। समय पर भुगतान, सीमित क्रेडिट इस्तेमाल, जरूरत के मुताबिक ही नया कर्ज लेना, पुराने अच्छे खातों को बनाए रखना और रिपोर्ट की नियमित निगरानी—इन आदतों से लंबे समय में क्रेडिट प्रोफाइल बेहतर हो सकती है।
नॉलेज बॉक्स: हार्ड और सॉफ्ट इंक्वायरी में अंतर
हार्ड इंक्वायरी: जब आप लोन या नए क्रेडिट कार्ड के लिए आवेदन करते हैं और बैंक या वित्तीय संस्था आपकी क्रेडिट रिपोर्ट जांचती है, तो इसे हार्ड इंक्वायरी कहा जाता है। ऐसी इंक्वायरी का स्कोर पर सीमित नकारात्मक असर हो सकता है।
सॉफ्ट इंक्वायरी: जब आप खुद अपनी क्रेडिट रिपोर्ट देखते हैं या कोई संस्था प्री-अप्रूव्ड ऑफर के लिए आपकी जानकारी की प्रारंभिक जांच करती है, तो इसे सॉफ्ट इंक्वायरी कहा जाता है। आम तौर पर इसका क्रेडिट स्कोर पर असर नहीं पड़ता।