आरक्षित वार्डों में परिवार के प्रभाव से ज्यादा उम्मीदवार की राजनीतिक सक्रियता और जनता के बीच पकड़ होगी अहम
रायपुर। प्रदेश के चार नगर निगमों रायपुर के बीरगांव तथा दुर्ग जिले के भिलाई, भिलाई-चरौदा और रिसाली में दिसंबर में प्रस्तावित चुनाव को लेकर राजनीतिक गतिविधियां तेज होने लगी हैं। चारों निकायों में वार्ड आरक्षण की प्रक्रिया पूरी होने के बाद अब राजनीतिक दलों का पूरा ध्यान प्रत्याशी चयन पर है। इस बार खासतौर पर महिला आरक्षित वार्डों में टिकट का समीकरण बदलता दिखाई दे रहा है।
महिला आरक्षण वाले वार्डों में अब ऐसे चेहरों को प्राथमिकता मिलने की संभावना है, जो स्वयं राजनीतिक और सामाजिक गतिविधियों में सक्रिय रहे हैं। इसकी एक बड़ी वजह नगरीय निकायों में निर्वाचित महिला प्रतिनिधियों के स्थान पर उनके पति या परिवार के अन्य सदस्यों द्वारा कामकाज संभालने की व्यवस्था पर शासन की सख्ती है। अगस्त में जारी अधिसूचना के अनुसार निर्वाचित महिला प्रतिनिधि के किसी करीबी रिश्तेदार को उनके परोक्ष प्रतिनिधि या समन्वयक के तौर पर नामित नहीं किया जा सकेगा।
इस बदलाव का असर सीधे राजनीतिक दलों की उम्मीदवार चयन प्रक्रिया पर पड़ना तय माना जा रहा है। अब केवल परिवार की राजनीतिक पहचान या पति-पिता के प्रभाव के आधार पर महिला उम्मीदवार को टिकट देने की बजाय उसकी व्यक्तिगत राजनीतिक सक्रियता, संगठन में भूमिका और मतदाताओं के बीच पकड़ को महत्व दिया जा सकता है।
खुद संभालनी होगी पार्षद की जिम्मेदारी
महिला आरक्षित वार्डों में पार्टियां ऐसे उम्मीदवार तलाश रही हैं, जो चुनाव जीतने के बाद निकाय की बैठकों से लेकर वार्ड की समस्याओं तक स्वयं सक्रियता से काम कर सकें। पार्टी कार्यकर्ताओं के बीच स्वीकार्यता, स्थानीय स्तर पर जनसंपर्क और क्षेत्र की समस्याओं की समझ भी टिकट के लिए महत्वपूर्ण कसौटी बन सकती है।
भाजपा और कांग्रेस दोनों ने चारों निगमों में चुनावी तैयारियां शुरू कर दी हैं। संबंधित निकायों के लिए प्रभारियों की नियुक्ति के साथ संभावित दावेदारों से चर्चा और स्थानीय पदाधिकारियों से फीडबैक लेने का दौर भी शुरू होने की तैयारी है। इससे साफ है कि आरक्षण के बाद अब राजनीतिक दलों के सामने सबसे बड़ी चुनौती मजबूत और जिताऊ चेहरों की तलाश की है।
बीरगांव और रिसाली में महापौर पद भी अहम
बीरगांव में महापौर पद महिला के लिए आरक्षित है। ऐसे में यहां राजनीतिक दलों को पार्षद पद के साथ महापौर के लिए भी प्रभावशाली महिला चेहरा तलाशना होगा। दूसरी ओर रिसाली में महापौर पद एससी महिला के लिए आरक्षित है। यहां एससी वर्ग की महिला दावेदारों में राजनीतिक अनुभव, स्थानीय जनाधार और संगठन के साथ सक्रियता टिकट की दौड़ में निर्णायक हो सकती है।
230 वार्डों में 76 महिलाओं के लिए आरक्षित
चारों नगर निगमों को मिलाकर कुल 230 पार्षद पद हैं। इनमें 76 वार्ड महिलाओं के लिए आरक्षित किए गए हैं। भिलाई के 70 वार्डों में 23 ओबीसी, 9 एससी, 3 एसटी और 35 सामान्य वार्ड हैं। रिसाली के 40 वार्डों में 8 ओबीसी, 7 एससी, 3 एसटी और 22 सामान्य वार्ड हैं।
इसी तरह भिलाई-चरौदा के 40 वार्डों में 11 ओबीसी, 6 एससी, 2 एसटी और 21 सामान्य वार्ड हैं। बीरगांव के 40 वार्डों में 13 ओबीसी, 5 एससी, 2 एसटी और 20 सामान्य वार्ड हैं।
आरक्षण के बाद बड़ी संख्या में महिलाएं चुनावी मैदान में उतरेंगी। ऐसे में राजनीतिक दलों के सामने चुनौती सिर्फ आरक्षित वर्ग की महिला प्रत्याशी तलाशने तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि उन्हें ऐसे चेहरे चुनने होंगे जो अपने दम पर चुनाव लड़ सकें और जीत के बाद निकाय की जिम्मेदारियों को प्रभावी ढंग से संभाल सकें।