9 नवंबर से लागू होगी ट्रेड मार्जिन की नई सीमा, अधिकतम खुदरा मूल्य पर 30 प्रतिशत तक तय होगा मार्जिन; कंपनियों को सात दिन में देनी होगी संशोधित मूल्य सूची
कैंसर के महंगे इलाज का खर्च उठाने वाले मरीजों और उनके परिजनों को राहत मिलने की उम्मीद है। केंद्र सरकार के राष्ट्रीय औषधि मूल्य निर्धारण प्राधिकरण (एनपीपीए) ने कैंसर के उपचार में इस्तेमाल होने वाली 137 जीवनरक्षक दवाओं के ट्रेड मार्जिन को अधिकतम खुदरा मूल्य के 30 प्रतिशत तक सीमित करने का फैसला किया है। नई व्यवस्था 9 नवंबर से लागू होने की जानकारी दी गई है। इससे निर्धारित सीमा से अधिक कीमत पर बिक रही दवाओं के दाम घट सकते हैं।
नई दिल्ली (ए)। कैंसर के इलाज में इस्तेमाल होने वाली कई महंगी दवाओं की कीमतों को नियंत्रित करने के लिए केंद्र सरकार ने कदम उठाया है। राष्ट्रीय औषधि मूल्य निर्धारण प्राधिकरण (एनपीपीए) ने 137 जीवनरक्षक दवाओं के ट्रेड मार्जिन पर अधिकतम 30 प्रतिशत की सीमा तय की है। इस निर्णय का उद्देश्य दवाओं की बिक्री व्यवस्था में कीमतों को नियंत्रित करना और मरीजों पर इलाज का आर्थिक बोझ कम करना है।
नई सूची में एटेजोलिज़ुमैब, बेवासिज़ुमैब, डाराटुमुमैब, एन्ज़ालुटामाइड, एर्लोटिनिब, इपिलिमुमैब और लैपाटेनिब जैसी दवाएं शामिल हैं। हालांकि, इम्यूनोथेरेपी में इस्तेमाल होने वाली कीट्रूडा को इस व्यवस्था से बाहर रखा गया है। आदेश के अनुसार, नई दरें 9 नवंबर से लागू होंगी।
नई कीमत तय करने का आधार निर्धारित
प्राधिकरण के निर्देश के मुताबिक, जीएसटी को छोड़कर अधिकतम खुदरा मूल्य पर 30 प्रतिशत की ट्रेड मार्जिन सीमा लागू होगी। वितरक या स्टॉकिस्ट को मिलने वाली मूल कीमत के आधार पर यह 42.86 प्रतिशत के मार्क-अप के बराबर है। यह नियम दवाओं की अलग-अलग क्षमता, खुराक, स्वरूप और इस्तेमाल के तरीके पर लागू होगा। इसमें टैबलेट, कैप्सूल और इंजेक्शन जैसे रूप शामिल हैं।
नई अधिकतम खुदरा कीमत तय करने के लिए मार्च 2026 में वितरकों को दी गई कीमत को आधार बनाया जाएगा। जिन दवाओं की उस महीने बिक्री नहीं हुई थी, उनके लिए अप्रैल 2025 से मार्च 2026 तक के बिक्री आंकड़ों का इस्तेमाल किया जाएगा। जिन दवाओं का मौजूदा मूल्य निर्धारित सीमा से अधिक है, उनकी कीमतें घटानी होंगी। वहीं, जो दवाएं पहले से कम कीमत पर बिक रही हैं, उनके दाम बढ़ाने की अनुमति इस आदेश से नहीं मिलती।
अस्पतालों को सीधे आपूर्ति पर भी लागू होंगे नियम
यह व्यवस्था उन नए दवा फॉर्मूलेशन पर भी लागू होगी, जो 31 मार्च 2026 के बाद बाजार में उतारे गए हैं और जिनमें सूचीबद्ध दवाओं का कोई घटक शामिल है। यदि निर्माता सीधे अस्पतालों या कैंसर उपचार केंद्रों को दवा उपलब्ध कराते हैं, तो कीमत तय करने के लिए संबंधित संस्थानों को वितरक मानकर इनवॉइस के आधार पर गणना की जाएगी।
दवाओं की उपलब्धता बनाए रखने के लिए कंपनियों को मौजूदा उत्पादन स्तर जारी रखने के निर्देश दिए गए हैं। उत्पादन घटाने के लिए एनपीपीए की पूर्व लिखित मंजूरी जरूरी होगी। वहीं, किसी दवा का उत्पादन या आयात पूरी तरह बंद करने से कम से कम छह महीने पहले सूचना देनी होगी।
सात दिन में जमा करनी होगी संशोधित मूल्य सूची
आदेश के आधिकारिक राजपत्र में प्रकाशित होने के सात दिनों के भीतर दवा निर्माताओं को संशोधित अधिकतम खुदरा मूल्य की जानकारी एनपीपीए और राज्य औषधि नियंत्रकों को देनी होगी। नई मूल्य सूची एकीकृत औषधि डेटाबेस प्रबंधन प्रणाली पर भी सार्वजनिक करनी होगी।
नियमों का पालन नहीं करने पर औषधि मूल्य नियंत्रण आदेश के तहत कार्रवाई की जा सकती है। निर्धारित सीमा से अधिक वसूली गई राशि ब्याज और लागू दंड के साथ वापस ली जा सकती है। मरीज सहायता कार्यक्रमों के तहत मुफ्त दी जाने वाली दवाओं को निर्धारित शर्तों के अधीन छूट दी गई है। इसके लिए कंपनियों को मरीजों, पर्चों और दवाओं के वितरण का रिकॉर्ड रखना होगा।