इस बार देश को सामान्य से ज्यादा बारिश की उम्मीद, जून से सितंबर तक 105% तक वर्षा संभव; किसानों और मौसम विशेषज्ञों के लिए राहत की खबर
देशभर में इस बार मानसून चार दिन पहले ही दस्तक देने को तैयार है। मौसम विभाग के अनुसार 27 मई को मानसून केरल तट से टकराएगा — यह 16 वर्षों में सबसे जल्दी आगमन होगा। उम्मीद की जा रही है कि इस बार बारिश सामान्य से ज्यादा होगी, जो कृषि और जल प्रबंधन के लिहाज से एक सकारात्मक संकेत है।
नई दिल्ली (ए)। भारत में इस बार दक्षिण-पश्चिम मानसून 27 मई को केरल पहुंचने वाला है, जो सामान्य तिथि 1 जून से चार दिन पहले है। भारतीय मौसम विभाग (IMD) ने इसकी पुष्टि करते हुए कहा कि ऐसा 16 सालों में पहली बार हो रहा है, जब मानसून इतनी जल्दी केरल के तट पर दस्तक देगा। इससे पहले 2009 में यह 23 मई को आया था।
मौसम विज्ञान मंत्रालय के सचिव एम. रविचंद्रन ने कहा कि जून से सितंबर के बीच देशभर में सामान्य से अधिक वर्षा होने की प्रबल संभावना है। चार महीनों के इस सीजन में औसतन 87 सेमी बारिश होती है, लेकिन इस बार यह आंकड़ा 105% तक पहुंच सकता है।
- ☔ बारिश का वर्गीकरण:
96%-104%: सामान्य - 104%-110%: सामान्य से अधिक
- >110%: अत्यधिक
- <90%: बहुत कम
- 90%-95%: सामान्य से कम
मौसम की चाल और खेती पर असर:
IMD के अनुसार मानसून की समय से जल्दी शुरुआत का देशभर में बारिश की मात्रा से सीधा संबंध नहीं होता। यानी केरल में मानसून जल्दी आना जरूरी नहीं कि वह पूरे देश में समय से पहले और समान रूप से फैले।
अंडमान-निकोबार से शुरुआत:
IMD ने 9 मई को घोषणा की थी कि 13 मई तक मानसून अंडमान और निकोबार द्वीप समूह और बंगाल की खाड़ी के कुछ हिस्सों में पहुंच सकता है। हालांकि देश में मानसून के आधिकारिक आगमन की तिथि केरल से मानी जाती है।
बीते 5 सालों में अनुमान की सटीकता:
- 2024: 108% बारिश (IMD ने 106%, स्काईमेट ने 102% अनुमान जताया था)
- 2023: 94% बारिश (IMD: 96%, स्काईमेट: 94%)
- 2022: 106% बारिश (अनुमान से अधिक)
- इस तरह मानसून का पूर्वानुमान लगातार सटीक हो रहा है, जो मौसम विज्ञान की तकनीकी प्रगति को दर्शाता है।