केंद्रीय गृह मंत्री ने कहा— 150 वर्षों से राष्ट्रीय गीत स्वतंत्रता संग्राम की प्रेरणा और आज भी सांस्कृतिक राष्ट्रवाद की आधारशिला
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने कहा कि राष्ट्रीय गीत ‘वंदे मातरम्’ ने न केवल आजादी के आंदोलन को नई दिशा दी, बल्कि स्वतंत्रता प्राप्ति के बाद भी देश को एकसूत्र में बांधने का कार्य किया। वे शुक्रवार को भाजपा प्रदेश कार्यालय में आयोजित ‘वंदे मातरम्’ के 150वें वर्ष समारोह को संबोधित कर रहे थे।
नईदिल्ली (ए)। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने कहा कि ‘वंदे मातरम्’ भारतीय स्वतंत्रता संग्राम की प्रेरक शक्ति रहा है और राष्ट्र निर्माण की प्रक्रिया में इसकी भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण रही है। भाजपा प्रदेश कार्यालय में शुक्रवार को आयोजित ‘वंदे मातरम्’ के 150वें वर्ष समारोह को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि स्वतंत्रता सेनानियों के सपने आज सामूहिक प्रयासों से साकार होते दिखाई दे रहे हैं।
शाह ने बताया कि बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय ने यह गीत अक्षय नवमी के दिन, 7 नवंबर 1875 को लिखा था। उसी दिन इसे पहली बार सार्वजनिक किया गया और यह गीत धीरे-धीरे स्वतंत्रता आंदोलन का उत्साहवर्धक नारा बन गया। बाद में ‘वंदे मातरम्’ चट्टोपाध्याय के प्रसिद्ध उपन्यास ‘आनंदमठ’ में ‘बंगदर्शन’ पत्रिका के माध्यम से प्रकाशित हुआ।
उन्होंने कहा कि भाजपा सांस्कृतिक राष्ट्रवाद के सिद्धांत पर चलने वाली पार्टी है और ‘वंदे मातरम्’ इसी राष्ट्रवादी भाव की प्रेरक शक्ति बना। उन्होंने घोषणा की कि ‘वंदे मातरम् 150’ शीर्षक से एक राष्ट्रीय सोशल मीडिया अभियान शुरू किया जाएगा, जिसमें लोग इस गीत को अपनी भाषाओं में लिखकर राष्ट्रीय एकता का संदेश देंगे।
कार्यक्रम के दौरान अमित शाह ने बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय को नमन किया और कहा कि आगामी एक वर्ष तक देशभर में क्रमबद्ध रूप से ‘वंदे मातरम्’ गाने के अभियान चलाए जाएंगे। उन्होंने बताया कि 15 अगस्त 1947 को सरदार वल्लभभाई पटेल के अनुरोध पर पंडित ओंकारनाथ ठाकुर ने पूरे गीत का गायन किया था। बाद में 24 जनवरी 1950 को डॉ. राजेंद्र प्रसाद ने इसे राष्ट्रगीत के रूप में औपचारिक मान्यता प्रदान की।
समारोह में शाह ने ‘वंदे मातरम्@150’ कार्यक्रम के तहत ‘स्वदेशी संकल्प पत्र’ भी पढ़ा और विदेशी वस्तुओं की जगह भारतीय उत्पादों को अपनाने का संकल्प लिया। संकल्प पत्र में स्थानीय उद्योगों को बढ़ावा देने, स्वदेशी उत्पादों को प्राथमिकता देने, भारतीय भाषाओं और पर्यटन स्थलों को बढ़ावा देने तथा युवाओं में स्वदेशी की भावना विकसित करने पर बल दिया गया।