- 9 दिग्गज कंपनियों की वैल्यू फिसली, HDFC बैंक और रिलायंस भी दबाव में
- सिर्फ हिंदुस्तान यूनिलीवर की मार्केट वैल्यू में बढ़ोतरी
- सेंसेक्स 961 अंक टूटा, निवेशकों की संपत्ति में भारी कमी
शेयर बाजार में बीते सप्ताह की तेज गिरावट का असर देश की शीर्ष कंपनियों पर साफ दिखा। मार्केट कैपिटलाइजेशन के लिहाज से 10 सबसे बड़ी कंपनियों में से 9 की संयुक्त वैल्यू करीब ₹2.18 लाख करोड़ घट गई। इस दौरान टेलीकॉम दिग्गज Bharti Airtel सबसे ज्यादा नुकसान झेलने वाली कंपनी रही।
एयरटेल को सबसे बड़ा झटका
बीते सप्ताह एयरटेल का मार्केट कैप ₹55,852 करोड़ घटकर ₹10.71 लाख करोड़ पर आ गया। इसके अलावा HDFC Bank की वैल्यू ₹37,580 करोड़ घटकर ₹13.65 लाख करोड़ रह गई।
ऊर्जा क्षेत्र की दिग्गज Reliance Industries का मार्केट कैप भी ₹34,846 करोड़ घटकर ₹18.86 लाख करोड़ पर पहुंच गया।
इन कंपनियों की वैल्यू भी घटी
गिरावट की मार Bajaj Finance, Tata Consultancy Services, Life Insurance Corporation of India, Larsen & Toubro, State Bank of India और ICICI Bank जैसी कंपनियों पर भी पड़ी।
HUL बनी अपवाद
इस सुस्ती भरे बाजार में सिर्फ Hindustan Unilever ने बढ़त दर्ज की। कंपनी का मार्केट कैप ₹5,462 करोड़ बढ़कर ₹5.49 लाख करोड़ पर पहुंच गया।
सेंसेक्स-निफ्टी में तेज गिरावट
शुक्रवार को BSE Sensex 961 अंक (1.17%) टूटकर 81,287 के स्तर पर बंद हुआ। वहीं Nifty 50 में 318 अंकों की गिरावट रही और यह 25,179 पर बंद हुआ। रियल्टी और ऑटो शेयरों में खासा दबाव देखा गया।
क्या होता है मार्केट कैपिटलाइजेशन?
मार्केट कैप किसी कंपनी के कुल जारी शेयरों (आउटस्टैंडिंग शेयर्स) की मौजूदा बाजार कीमत का योग होता है। इसकी गणना कंपनी के कुल शेयरों की संख्या को प्रति शेयर बाजार मूल्य से गुणा कर की जाती है।
उदाहरण के तौर पर, यदि किसी कंपनी के 1 करोड़ शेयर बाजार में हैं और प्रति शेयर कीमत ₹20 है, तो कंपनी का मार्केट कैप ₹20 करोड़ होगा।
- बढ़त और गिरावट के संकेत
- मार्केट कैप बढ़ने के कारण
- शेयर कीमत में उछाल
- मजबूत तिमाही नतीजे
- सकारात्मक खबर या निवेशक विश्वास
- मार्केट कैप घटने के कारण
- शेयर कीमत में गिरावट
- कमजोर वित्तीय प्रदर्शन
- नकारात्मक वैश्विक या घरेलू संकेत
- निवेशकों और कंपनियों पर असर
बड़ा मार्केट कैप कंपनियों को पूंजी जुटाने, विस्तार करने या अधिग्रहण (एक्विजिशन) में मदद करता है। वहीं गिरावट से कंपनी की बाजार साख और निवेश क्षमता प्रभावित हो सकती है। निवेशकों के लिए मार्केट कैप में गिरावट का मतलब उनके पोर्टफोलियो की वैल्यू घटना है, जबकि बढ़त से उनकी संपत्ति में इजाफा होता है।