कच्चा तेल 150 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंचने का अनुमान, शेयर बाजार पर भी दबाव संभव
अमेरिका-इजराइल और ईरान के बीच बढ़ते सैन्य तनाव का असर वैश्विक बाजारों पर दिखाई देने लगा है। ईरान के सर्वोच्च नेता Ali Khamenei की मौत के दावों के बाद पश्चिम एशिया में हालात अस्थिर हैं। यदि रणनीतिक दृष्टि से अहम Strait of Hormuz प्रभावित होता है, तो भारत समेत दुनिया के कई देशों की कच्चे तेल की आपूर्ति पर संकट खड़ा हो सकता है। इसका सीधा असर पेट्रोल-डीजल, महंगाई, शेयर बाजार और सोना-चांदी की कीमतों पर पड़ने की आशंका है।
भारत की आधी तेल सप्लाई इसी मार्ग से
एनालिटिक्स फर्म केपलर के आंकड़ों के अनुसार, जनवरी-फरवरी 2026 के दौरान भारत ने अपनी कुल कच्चे तेल की जरूरत का लगभग 50% आयात इसी जलमार्ग के जरिए किया। यह रास्ता फारस की खाड़ी को अरब सागर से जोड़ता है और वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति की जीवनरेखा माना जाता है।
दुनिया के कुल पेट्रोलियम व्यापार का करीब 20% हिस्सा इसी मार्ग से गुजरता है। ऐसे में यदि यह रूट अस्थायी रूप से भी बंद होता है, तो सप्लाई अचानक घट सकती है और कीमतों में तेज उछाल आ सकता है।
कच्चा तेल 150 डॉलर तक पहुंचने की आशंका
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि ईरान इस जलमार्ग को अवरुद्ध करने की कोशिश करता है, तो अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमत 120 से 150 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच सकती है। फिलहाल ब्रेंट क्रूड करीब 66 डॉलर प्रति बैरल के आसपास कारोबार कर रहा है।
ब्लूमबर्ग के विश्लेषण के मुताबिक, मार्ग असुरक्षित होने पर तेल टैंकरों को सैन्य सुरक्षा के बीच गुजरना पड़ेगा, जिससे शिपमेंट की गति धीमी होगी और लागत बढ़ेगी।
पेट्रोल-डीजल महंगे होने का खतरा
कच्चा तेल महंगा होने पर भारत में पेट्रोल और डीजल की कीमतों में बढ़ोतरी संभव है। डीजल महंगा होने से ट्रांसपोर्टेशन कॉस्ट बढ़ेगी, जिसका असर फल-सब्जी, दूध, अनाज समेत रोजमर्रा की वस्तुओं की कीमतों पर पड़ेगा। इससे खुदरा महंगाई दर में उछाल आ सकता है।
शेयर बाजार पर दबाव
युद्ध या भू-राजनीतिक तनाव की स्थिति में विदेशी निवेशक जोखिम कम करने के लिए उभरते बाजारों से पूंजी निकालते हैं। महंगाई बढ़ने से कंपनियों की लागत बढ़ती है और मुनाफा घटता है, जिससे शेयर बाजार में गिरावट की आशंका रहती है।
सोना-चांदी बन सकते हैं सुरक्षित ठिकाना
अस्थिरता के दौर में निवेशक सुरक्षित निवेश विकल्पों की ओर रुख करते हैं। सोना और चांदी पारंपरिक रूप से ‘सेफ हेवन’ माने जाते हैं। कमोडिटी विशेषज्ञों के अनुसार यदि तनाव लंबा चला तो सोने की कीमतें रिकॉर्ड स्तर तक पहुंच सकती हैं। मांग बढ़ने से घरेलू बाजार में भी सोना-चांदी महंगे हो सकते हैं।
निर्यात पर भी असर संभव
होर्मुज मार्ग से भारत का 10% से अधिक ‘नॉन-ऑयल एक्सपोर्ट’ गुजरता है, जिसमें बासमती चावल, चाय, मसाले और इंजीनियरिंग उत्पाद शामिल हैं। मार्ग बाधित होने पर निर्यात लागत और डिलीवरी समय दोनों प्रभावित हो सकते हैं।
क्यों अहम है यह जलमार्ग
करीब 167 किमी लंबा यह जलमार्ग दुनिया की ऊर्जा आपूर्ति का प्रमुख केंद्र है। प्रतिदिन लगभग 1.8 से 2 करोड़ बैरल कच्चा तेल और ईंधन यहां से गुजरता है। सऊदी अरब, इराक, कुवैत और ईरान जैसे प्रमुख तेल उत्पादक देश अपने निर्यात के लिए इसी मार्ग पर निर्भर हैं।