पराजय से उबरने की नसीहत देते हुए विपक्ष को ‘परफॉर्मेंस टिप्स’ की पेशकश; सत्र की शुरुआत हंगामे से हुई
शीतकालीन सत्र के आगाज़ से पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने संसद परिसर में मीडिया से बातचीत करते हुए विपक्ष को पराजय की निराशा से बाहर निकलने की सलाह दी और कहा कि सदन में ड्रामा नहीं, बल्कि ठोस डिलीवरी दिखनी चाहिए। वहीं सत्र की शुरुआत लोकसभा में हंगामे के साथ हुई।
नई दिल्ली (ए)। संसद का शीतकालीन सत्र सोमवार से शुरू हुआ, लेकिन कार्यवाही शुरू होते ही विपक्ष के हंगामे के कारण लोकसभा की कार्यवाही 12 बजे तक स्थगित करनी पड़ी। कई विपक्षी सांसद नारेबाज़ी करते हुए वेल तक पहुंच गए। उधर, राज्यसभा में नए सभापति सीपी राधाकृष्णन का स्वागत किया गया, जहां प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उनका अभिनंदन किया।
सत्र शुरू होने से पहले प्रधानमंत्री मोदी ने लगभग 10 मिनट तक मीडिया को संबोधित किया। उन्होंने हाल में हुए चुनाव परिणामों का जिक्र करते हुए कहा कि विपक्ष पराजय की निराशा से बाहर आए और सदन में रचनात्मक मुद्दों के साथ मजबूती से भागीदारी करे। पीएम ने यहां तक कहा कि अगर विपक्ष चाहे तो वह उन्हें “कैसे बेहतर परफॉर्म किया जाए” इस पर सुझाव देने के लिए भी तैयार हैं।
प्रधानमंत्री ने कहा कि संसद का यह सत्र किसी की हार की हताशा या जीत के अहंकार का मंच नहीं बनना चाहिए। उन्होंने कहा कि देश को आगे बढ़ाने के लिए सदन में बहस, संवाद और नतीजे जरूरी हैं—“यहां ड्रामा नहीं, डिलीवरी होनी चाहिए।” उन्होंने नव-निर्वाचित सदस्यों को वरिष्ठों के अनुभव से सीखने की सलाह भी दी। पीएम के बयान पर कांग्रेस ने तीखी प्रतिक्रिया दी और इसे “पाखंड” करार दिया। कांग्रेस नेताओं ने कहा कि जो खुद सबसे बड़ा “ड्रामेबाज़” है, वही ड्रामा की बात कर रहा है। शीतकालीन सत्र 1 दिसंबर से 19 दिसंबर तक चलेगा। इस दौरान 15 बैठकें प्रस्तावित हैं और एटॉमिक एनर्जी बिल सहित 10 नए बिल पेश किए जा सकते हैं।