एविएशन सेक्टर में 65% हिस्सेदारी, किराया बढ़ाने और दबदबे के दुरुपयोग के आरोप; DGCA भी सख्त
देश की सबसे बड़ी एयरलाइन इंडिगो की एविएशन सेक्टर में एकतरफा पकड़ अब जांच के घेरे में आ गई है। कॉम्पिटिशन कमीशन ऑफ इंडिया (CCI) यह परख रहा है कि क्या इंडिगो ने अपनी बाजार में मजबूत स्थिति का दुरुपयोग कर प्रतिस्पर्धा के नियमों का उल्लंघन किया है। किराया निर्धारण से लेकर खास रूट्स पर दबदबे तक, कई पहलुओं की छानबीन शुरू हो चुकी है।
नई दिल्ली (ए)। भारतीय एविएशन सेक्टर में सबसे बड़ी हिस्सेदारी रखने वाली इंडिगो एयरलाइन पर मोनोपोली बनाए रखने और ताकत के गलत इस्तेमाल के गंभीर आरोप लगे हैं। कॉम्पिटिशन कमीशन ऑफ इंडिया (CCI) इसे कॉम्पिटिशन एक्ट, 2002 की धारा 4 का संभावित उल्लंघन मानते हुए प्रारंभिक जांच कर रहा है। वर्तमान में इंडिगो की घरेलू एविएशन बाजार में लगभग 65 प्रतिशत हिस्सेदारी है और एयरलाइन रोजाना करीब 2,200 उड़ानों का संचालन करती है। आरोप है कि इस दबदबे का इस्तेमाल कर कंपनी ने कुछ रूट्स पर मनमाने किराए वसूले और यात्रियों को विकल्पहीन स्थिति में डाल दिया। CCI के सूत्रों के अनुसार, आयोग इंडिगो की बाजार स्थिति, खास रूट्स पर नियंत्रण और संभावित किराया बढ़ोतरी जैसे मामलों का विश्लेषण कर रहा है। यदि आरोप प्रथम दृष्टया सही पाए गए, तो औपचारिक जांच के आदेश दिए जा सकते हैं।
किराया बढ़ाने पर सख्ती संभव
कॉम्पिटिशन एक्ट के तहत कोई भी कंपनी अपनी मजबूत स्थिति का फायदा उठाकर कीमतों में मनमानी नहीं कर सकती और न ही सेवाओं को इस तरह नियंत्रित कर सकती है, जिससे उपभोक्ताओं के हित प्रभावित हों। विशेषज्ञों का मानना है कि किराया बढ़ोतरी साबित होने पर इंडिगो पर भारी जुर्माना भी लग सकता है।
इंडिगो संकट की जांच के लिए इंटरनेशनल एक्सपर्ट की नियुक्ति
क्रू मेंबर्स की भारी कमी और बड़े पैमाने पर फ्लाइट कैंसिलेशन के बाद इंडिगो ने आंतरिक जांच अंतरराष्ट्रीय विशेषज्ञ को सौंप दी है। दिसंबर के पहले दस दिनों में एयरलाइन की 5,000 से अधिक उड़ानें रद्द हुई थीं। इंडिगो के CEO पीटर एल्बर्स हाल ही में DGCA की समिति के सामने पेश हुए। कंपनी ने विश्व प्रसिद्ध एविएशन एक्सपर्ट कैप्टन जॉन इल्सन को स्वतंत्र जांच का जिम्मा सौंपा है। यह फैसला इंडिगो बोर्ड के क्राइसिस मैनेजमेंट ग्रुप की सिफारिश पर लिया गया। इल्सन को चार दशकों का वैश्विक एविएशन अनुभव है और वे एयरलाइन के ऑपरेशनल मॉडल व मैनेजमेंट प्रक्रियाओं की गहन समीक्षा करेंगे।
चार फ्लाइट ऑपरेशंस इंस्पेक्टर बर्खास्त
DGCA ने इंडिगो के चार फ्लाइट ऑपरेशंस इंस्पेक्टर—ऋषि राज चटर्जी, सीमा झामनानी, अनिल कुमार पोखरियाल और प्रियम कौशिक—को सेवा से हटा दिया है। ये अधिकारी एयरलाइन की सेफ्टी और ऑपरेशनल कंप्लायंस की निगरानी के जिम्मेदार थे।
DGCA ने बदली निगरानी व्यवस्था, नए सख्त नियम लागू
देशभर में फ्लाइट देरी, भीड़भाड़ और स्टाफ की कमी को देखते हुए DGCA ने निगरानी तंत्र में बड़े बदलाव किए हैं। शुक्रवार से नए आदेश तत्काल प्रभाव से लागू कर दिए गए हैं।
नए आदेश की प्रमुख बातें
- DGCA की निरीक्षण टीमें एयरपोर्ट पर कम से कम 7 घंटे रुककर ऑन-ग्राउंड निरीक्षण करेंगी।
- 32 बिंदुओं वाली विशेष एयरपोर्ट इंस्पेक्शन चेकलिस्ट लागू की गई है।
- निरीक्षण रिपोर्ट 48 घंटे के भीतर मुख्यालय भेजनी अनिवार्य होगी।
- तकनीकी कारणों से 15 मिनट या उससे अधिक की देरी पर जांच जरूरी होगी।
- किसी भी ‘मेजर डिफेक्ट’ की सूचना तुरंत फोन पर देनी होगी, 72 घंटे में विस्तृत रिपोर्ट भेजनी होगी।
- एक ही खराबी तीन बार दोहराने पर उसे ‘रिपीटेटिव डिफेक्ट’ मानकर विशेष जांच होगी।
- DGCA का कहना है कि नए नियमों से एयरलाइंस और एयरपोर्ट ऑपरेटरों की जवाबदेही बढ़ेगी और यात्रियों को बेहतर सेवा मिलेगी।